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फसल की खेती (Crop Cultivation)राज्य कृषि समाचार (State News)

धान की फसल पर कीट-रोग का खतरा, कृषि विभाग ने जारी की एडवाइजरी

तना छेदक, हिस्पा और बैक्टीरियल लीफ ब्लाइट से बचाव के लिए किसानों को समय पर निगरानी की सलाह

22 अगस्त 2026, पटना: धान की फसल पर कीट-रोग का खतरा, कृषि विभाग ने जारी की एडवाइजरी – धान की फसल इन दिनों तेजी से बढ़वार के दौर में है। ऐसे समय में तना छेदक, हिस्पा तथा बैक्टीरियल लीफ ब्लाइट जैसे कीट एवं रोग फसल को नुकसान पहुंचा सकते हैं। इनके प्रकोप से उत्पादन प्रभावित होने की आशंका को देखते हुए बिहार कृषि विभाग ने किसानों के लिए एडवाइजरी जारी कर खेतों की नियमित निगरानी और शुरुआती लक्षण दिखाई देने पर तत्काल नियंत्रण उपाय अपनाने की सलाह दी है।

तना छेदक से पौधों को नुकसान

कृषि विभाग के अनुसार तना छेदक धान की प्रमुख हानिकारक कीटों में शामिल है। यह पौधे के तने में प्रवेश कर अंदर से नुकसान पहुंचाता है। इसके प्रकोप से पौधे सूखने लगते हैं और उत्पादन में कमी आ सकती है।

विभाग ने नियंत्रण के लिए फेरेटेरा (क्लोरएन्ट्रानिलिप्रोल) 8 से 10 दाने प्रति लीटर पानी की दर से घोल बनाकर छिड़काव करने की सलाह दी है। इसके अलावा कार्टाप हाइड्रोक्लोराइड 75 प्रतिशत WP की 1 ग्राम मात्रा प्रति लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव किया जा सकता है।

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हिस्पा से पत्तियों को खतरा

हिस्पा कीट धान की पत्तियों को प्रभावित करता है। इसके प्रकोप से पौधों की बढ़वार और प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। इसके नियंत्रण के लिए कृषि विभाग ने इमामेक्टिन बेंजोएट 10 SG की 0.3 ग्राम प्रति लीटर पानी अथवा क्लोरएन्ट्रानिलिप्रोल 20 SC की 0.4 मिली प्रति लीटर पानी की दर से घोल तैयार कर छिड़काव की सलाह दी है।

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बैक्टीरियल रोगों से भी सावधानी

धान में बैक्टीरियल लीफ ब्लाइट और लीफ स्ट्रिक का खतरा भी बना रहता है। इनके प्रकोप में पत्तियां पीली पड़ने के बाद सूखने लगती हैं और इसका सीधा असर फसल की उत्पादकता पर पड़ता है। विभाग ने किसानों को खेत में अत्यधिक नाइट्रोजन उर्वरक के इस्तेमाल से बचने तथा संतुलित मात्रा में खाद देने की सलाह दी है।

अधिक प्रकोप की स्थिति में विभाग द्वारा सुझाए गए रासायनिक उपचार का उपयोग किया जा सकता है। एडवाइजरी के अनुसार स्ट्रेप्टोसाइक्लिन 50 ग्राम और कॉपर ऑक्सीक्लोराइड 50 प्रतिशत WP 2.5 किलोग्राम को 500 लीटर पानी में मिलाकर एक हेक्टेयर क्षेत्र में समान रूप से छिड़काव करने की सलाह दी गई है।

सप्ताह में एक-दो बार करें खेत की निगरानी

कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को सप्ताह में कम से कम एक-दो बार धान के खेत का निरीक्षण करने की सलाह दी है। पौधों में कीट या रोग के शुरुआती लक्षण दिखाई देने पर तत्काल नियंत्रण उपाय अपनाने से नुकसान को सीमित किया जा सकता है। प्रकोप बढ़ने का इंतजार करने पर फसल को गंभीर नुकसान हो सकता है।

कृषि विभाग ने किसानों से अपील की है कि किसी भी कीटनाशक या रोग नियंत्रण दवा का इस्तेमाल अनुशंसित मात्रा और विधि के अनुसार ही करें। समय पर निगरानी, संतुलित पोषण और उचित फसल प्रबंधन से धान को कीट एवं रोगों से बचाने के साथ बेहतर उत्पादन हासिल किया जा सकता है।

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