फसल की खेती (Crop Cultivation)

धान की फसल में BPH, लीफ फोल्डर और येलो स्टेम बोरर का खतरा, ICAR ने बताए बचाव के उपाय

31 जुलाई 2026, नई दिल्ली: धान की फसल में BPH, लीफ फोल्डर और येलो स्टेम बोरर का खतरा, ICAR ने बताए बचाव के उपाय – भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के सेंट्रल राइस रिसर्च इंस्टीट्यूट (CRRI), कटक ने “कृषि परामर्श सेवा: जुलाई 2026 के दूसरे पखवाड़े के लिए कृषि सलाह” में धान की फसल में प्रमुख कीटों के प्रबंधन को लेकर किसानों के लिए विस्तृत सलाह जारी की है। एडवाइजरी में विशेष रूप से ब्राउन प्लांट हॉपर (BPH), येलो स्टेम बोरर और लीफ फोल्डर की नियमित निगरानी और समय पर नियंत्रण उपाय अपनाने की सिफारिश की गई है।

आईसीएआर के अनुसार, येलो स्टेम बोरर और लीफ फोल्डर की निगरानी के लिए खेत में प्रति एकड़ 4 से 5 फेरोमोन ट्रैप लगाए जाएं। यदि ट्रैप में नर पतंगों की संख्या 4 से 5 तक पहुंच जाए, तो अनुशंसित कीटनाशियों का उपयोग किया जा सकता है। इसके अलावा, ट्राइकोग्रामा जापोनिकम और ट्राइकोग्रामा चिलोनिस जैसे अंड परजीवी छोड़ने की भी सलाह दी गई है। कीट गतिविधि दिखाई देने पर इनका उपयोग हर 7 से 10 दिन के अंतराल पर किया जा सकता है।

एडवाइजरी में कहा गया है कि यदि लीफ फोल्डर से नुकसान दिखाई दे, तो क्लोरान्ट्रानिलिप्रोल 18.5% SC, टेट्रानिलिप्रोल 200 SC या फ्लूबेंडियामाइड 20 WG का अनुशंसित मात्रा में छिड़काव किया जा सकता है। वहीं, स्वॉर्मिंग कैटरपिलर, केस वर्म और हिस्पा के प्रकोप की स्थिति में क्लोरपायरीफॉस 20 EC या क्विनालफॉस 25% EC के उपयोग की सलाह दी गई है।

आईसीएआर ने बताया कि यदि ब्राउन प्लांट हॉपर (BPH) की संख्या आर्थिक क्षति स्तर से अधिक हो जाए, तो सबसे पहले खेत में अल्टरनेट वेटिंग एंड ड्राइंग (AWD) तकनीक अपनाकर लंबे समय तक पानी जमा न रहने दें। यदि इसके बाद भी समस्या बनी रहती है, तो ट्राइफ्लूमेजोपाइरिम 10% SC, पाइमेट्रोजीन 50% WG, डाइनोटेफ्यूरान 20% SG, थायमेथोक्साम 25% WG, एथोफेनप्रॉक्स 10% EC, एसीफेट 75% SP या फिप्रोनिल 5% SC का अनुशंसित मात्रा में उपयोग किया जा सकता है।

आईसीएआर ने किसानों को सलाह दी है कि कीटनाशियों का उपयोग केवल अनुशंसित मात्रा में ही करें। साथ ही, BPH के प्रकोप के दौरान नाइट्रोजनयुक्त उर्वरकों के उपयोग से बचें, क्योंकि इससे कीट का प्रकोप बढ़ सकता है। नियमित निगरानी और समय पर नियंत्रण उपाय अपनाकर धान की फसल को नुकसान से बचाया जा सकता है।

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