फसल की खेती (Crop Cultivation)

बारिश-नमी के बीच सोयाबीन में इन 3 रोगों का खतरा, ICAR-NSRI ने जारी की एडवाइजरी; जानें बचाव के उपाय

19 अगस्त 2026, नई दिल्ली: बारिश-नमी के बीच सोयाबीन में इन 3 रोगों का खतरा, ICAR-NSRI ने जारी की एडवाइजरी; जानें बचाव के उपाय – भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद-राष्ट्रीय सोयाबीन अनुसंधान संस्थान (ICAR-NSRI), इंदौर  ने सोयाबीन किसानों के लिए 17 से 23 अगस्त 2026 की साप्ताहिक एडवाइजरी जारी की है। संस्थान के अनुसार, वर्तमान स्थिति में सोयाबीन फसल में एन्थ्राक्नोज, रायजोक्टोनिया एरियल ब्लाइट और पीला मोजेक/सोयाबीन मोजेक जैसे प्रमुख रोग देखे जा रहे हैं। ऐसे में किसानों को फसल की नियमित निगरानी करने और रोग के शुरुआती लक्षण दिखाई देते ही अनुशंसित नियंत्रण उपाय अपनाने की सलाह दी गई है।

एन्थ्राक्नोज के लक्षण दिखें तो तुरंत करें छिड़काव

लगातार बारिश की स्थिति में सोयाबीन फसल में एन्थ्राक्नोज रोग का संक्रमण होने की संभावना रहती है। किसानों को नियमित अंतराल पर फसल का निरीक्षण करने की सलाह दी गई है। रोग के शुरुआती लक्षण दिखाई देने पर इनमें से किसी एक फफूंदनाशक का छिड़काव करें—

  • टेबूकोनाजोल 25.9 EC — 625 मिली/हेक्टेयर
  • टेबूकोनाजोल 38.39 SC — 625 मिली/हेक्टेयर
  • टेबूकोनाजोल 10% + सल्फर 65% WG — 1.25 किलोग्राम/हेक्टेयर
  • कार्बेन्डाजिम 12% + मेन्कोजेब 63% WP — 1.25 किलोग्राम/हेक्टेयर

रायजोक्टोनिया एरियल ब्लाइट में इन दवाओं की सलाह

सोयाबीन में रायजोक्टोनिया एरियल ब्लाइट के लक्षण दिखाई देने पर अनुशंसित फफूंदनाशकों का छिड़काव करने की सलाह दी गई है। किसान इनमें से किसी एक का उपयोग कर सकते हैं—

  • फ्लुक्सापायरोक्साड 167 g/l + पायरोक्लोस्ट्रोबिन 333 g/l SC — 300 मिली/हेक्टेयर
  • पायरोक्लोस्ट्रोबिन 133 g/l + इपोक्सीकोनाजोल 50 g/l SE — 750 मिली/हेक्टेयर

रोग के लक्षण दिखाई देते ही नियंत्रण उपाय शुरू करने की सलाह दी गई है।

पीला मोजेक और सोयाबीन मोजेक से बचाव जरूरी

पीला मोजेक/सोयाबीन मोजेक के लक्षण दिखाई देने पर रोगग्रस्त पौधों को शुरुआती अवस्था में ही खेत से उखाड़कर बाहर करने और नष्ट करने की सलाह दी गई है। इन रोगों को फैलाने वाले सफेद मक्खी और एफिड के नियंत्रण के लिए इनमें से किसी एक अनुशंसित कीटनाशक का छिड़काव किया जा सकता है—

  1. थायोमेथोक्सम + लैम्ब्डा सायहेलोथ्रिन — 125 मिली/हेक्टेयर
  2. बीटासायफ्लुथ्रिन + इमिडाक्लोप्रिड — 350 मिली/हेक्टेयर
  3. एसिटामिप्रिड 25% + बायफेंथ्रिन 25% WG — 250 ग्राम/हेक्टेयर

इनके छिड़काव से तना मक्खी के नियंत्रण में भी मदद मिल सकती है।

खेत में लगाएं पीले स्टिकी ट्रैप

सफेद मक्खी के नियंत्रण के लिए किसानों को खेत में अलग-अलग स्थानों पर पीले स्टिकी ट्रैप लगाने की भी सलाह दी गई है। ये ट्रैप सफेद मक्खियों को आकर्षित करने में मदद करते हैं। एडवाइजरी में किसानों को सलाह दी गई है कि वे सोयाबीन फसल की नियमित निगरानी करें और रोग के शुरुआती लक्षण दिखाई देते ही नियंत्रण उपाय अपनाएं, ताकि रोग को फैलने से रोका जा सके।

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