कम केमिकल में कीट नियंत्रण
04 जुलाई 2026, नई दिल्ली: कम केमिकल में कीट नियंत्रण – खरीफ का सीजन शुरू होने वाला है। खेतों की तैयारी, बीजों का चयन और फसल प्रबंधन की योजनाएं बन रही हैं। आगे चलकर सोयाबीन और धान जैसी फसलों में कई तरह के कीट और बीमारियां सामने आएंगी, जिनसे निपटने के लिए अधिकांश किसान रासायनिक कीटनाशकों एवं खरपतवारनाशकों का इस्तेमाल करेंगे। ऐसे समय में किसानों के मन में एक महत्वपूर्ण सवाल उठता है- क्या फसलों को कीटों से बचाने के लिए बार-बार और अधिक मात्रा में केमिकल का उपयोग करना ही एकमात्र विकल्प है? या फिर कोई ऐसा तरीका भी है, जिससे कम केमिकल में भी कीटों को प्रभावी ढंग से नियंत्रित किया जा सके?
कीटनाशक अब कम प्रभावी
पिछले कुछ वर्षों में कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग के कारण कई नई समस्याएं सामने आई हैं। कुछ कीटों में दवाओं के प्रति प्रतिरोधक क्षमता विकसित हो गई है, जिससे पहले असरदार रहने वाले कीटनाशक अब कम प्रभावी दिखाई देते हैं। इसके अलावा, अधिक केमिकल उपयोग से मिट्टी के लाभकारी सूक्ष्मजीव, प्राकृतिक मित्र कीट और उर्वरता भी प्रभावित होते हैं।
लेकिन अच्छी बात यह है कि कीट नियंत्रण के लिए केवल रासायनिक दवाओं पर निर्भर रहना जरूरी नहीं है। आज कृषि वैज्ञानिक और अनुभवी किसान ऐसे कई वैकल्पिक उपायों की सलाह दे रहे हैं, जिनकी मदद से कम केमिकल में भी बेहतर परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं।
सबसे पहले बात करते हैं जैविक उपायों की। प्रकृति ने स्वयं कई ऐसे जीव विकसित किए हैं जो हानिकारक कीटों को नियंत्रित करने में मदद करते हैं। खेतों में पाए जाने वाले मित्र कीट, जैसे लेडीबर्ड बीटल, क्राइसोपा और मकड़ियां, अनेक हानिकारक कीटों को खाकर उनकी संख्या नियंत्रित करते हैं। यदि हम अनावश्यक रूप से हर कीट पर स्प्रे करने की बजाय इन मित्र जीवों को सुरक्षित रखें, तो वे हमारे लिए प्राकृतिक सुरक्षा कवच का काम कर सकते हैं। आज की परिस्थितियों और वातावरण को ध्यान में रखकर ऐसा कर पाना बहुत कठिन मालूम पड़ता है और अधिकांश किसान इसे संभव नहीं समझते।
किसान केवल एक उपाय पर निर्भर न रहें
दूसरा महत्वपूर्ण उपाय है मिश्रित या एकीकृत प्रबंधन (Integrated Approach)। इसका अर्थ है कि किसान केवल एक उपाय पर निर्भर न रहकर कई तरीकों का उपयोग करें। उदाहरण के लिए, समय पर बुवाई, फसल चक्र अपनाना, फेरोमोन ट्रैप का उपयोग करना, मित्र कीटों का संरक्षण करना और आवश्यकता पड़ने पर सीमित मात्रा में रासायनिक दवाओं या जैविक समाधानों का प्रयोग करना। इससे फसल पर रसायनों का दबाव कुछ हद तक कम हो जाता है, लेकिन मिश्रित उपाय में भी उत्पादन की स्थिरता निश्चित नहीं होती।
हर समस्या का समाधान रासायनिक दवाएं ही नहीं
यहां सबसे महत्वपूर्ण बात है “संतुलित उपयोग”। अक्सर यह समझ लिया जाता है कि या तो पूरी तरह केमिकल खेती होगी या पूरी तरह जैविक खेती। लेकिन वास्तविकता इससे कहीं अलग है। हर परिस्थिति में पूरी तरह केमिकल छोड़ना संभव नहीं होता, और हर समस्या का समाधान केवल रासायनिक दवाएं भी नहीं हैं। इसलिए आवश्यकता है संतुलित सोच की।
संतुलित उपयोग का मतलब है कि रासायनिक कीटनाशकों और उर्वरकों का प्रयोग केवल आवश्यकता होने पर, सही मात्रा में किया जाए और उपलब्ध होने पर किसी गैर-रासायनिक उपाय का इस्तेमाल किया जाए। जब खेत में कीटों की संख्या आर्थिक क्षति स्तर से कम हो, तब तुरंत स्प्रे करने की बजाय अन्य विकल्पों पर विचार किया जा सकता है। इससे खेत में केमिकल कम होगा और मिट्टी का प्राकृतिक संतुलन भी बना रहता है।
यही सोच “संतुलित खेती” की अवधारणा को जन्म देती है। संतुलित खेती का अर्थ है ऐसी सोच जिसमें मिट्टी, फसल, उत्पादन और किसान की आर्थिक स्थिति- सभी के बीच संतुलन बनाया जाए। इसमें गैर-रासायनिक उपायों को बढ़ावा देकर किसान की सहूलियत और उत्पादन को स्थिर रखते हुए धीरे-धीरे फसल से केमिकल कम किया जाता है, और जरूरत पड़ने पर केमिकल का उपयोग सोच-समझकर किया जाता है।
इसका उद्देश्य किसी एक पद्धति को श्रेष्ठ या न्यून साबित करना नहीं, बल्कि ऐसी खेती करना है जो कम केमिकल में भी भरपूर उत्पादन दे।
कम केमिकल में भी बेहतर उत्पादन
नए सीजन की शुरुआत किसानों के लिए एक नया अवसर लेकर आती है। यह अवसर है अपनी खेती की रणनीति पर पुनर्विचार करने का। यदि इस बार कीट नियंत्रण के लिए केवल अधिक स्प्रे पर निर्भर रहने की बजाय संतुलित उपायों को अपनाया जाए, तो कम केमिकल में भी बेहतर उत्पादन पाया जा सकता है।
तो सवाल का जवाब है- हाँ, बिना या बहुत कम केमिकल के भी कीट नियंत्रण काफी हद तक संभव है। इसके लिए जरूरी है सही जानकारी, संतुलित खेती की सोच और मिट्टी को उसके प्राकृतिक स्वरूप में वापस ले जाने की इच्छाशक्ति।
आने वाले सीजन में यही दृष्टिकोण किसानों को कम केमिकल में भरपूर उत्पादन पाने के लिए संतुलित खेती को एक व्यावहारिक विकल्प के रूप में मजबूत कर रहा है।
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