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फसल की खेती (Crop Cultivation)

धान में पोषक तत्व प्रबंधन: अधिक उत्पादन के लिए संतुलित उर्वरक प्रबंधन अपनाने की सलाह

06 अगस्त 2026, नई दिल्ली: धान में पोषक तत्व प्रबंधन: अधिक उत्पादन के लिए संतुलित उर्वरक प्रबंधन अपनाने की सलाह – अच्छी फसल के लिए संतुलित पोषण जरूरी

धान की अधिक उपज केवल उन्नत किस्मों या बेहतर सिंचाई पर ही निर्भर नहीं करती, बल्कि संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन भी उतना ही महत्वपूर्ण है। खेत की तैयारी के समय सही मात्रा में उर्वरकों का प्रयोग पौधों की जड़ विकास, कल्ले बनने और समान वृद्धि में मदद करता है।

आईसीएआर–केन्द्रीय धान अनुसंधान संस्थान (ICAR-CRRI), कटक के अनुसार रोपाई से पहले अंतिम पडलिंग (Puddling) के समय ही आधार (बेसल) उर्वरकों का प्रयोग कर देना चाहिए। 

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किस्म के अनुसार बदलती है उर्वरकों की मात्रा

संस्थान ने सलाह दी है कि सामान्य उच्च उत्पादक किस्मों तथा संकर (हाइब्रिड) धान के लिए उर्वरकों की मात्रा अलग-अलग रखी जाए। खेत की उर्वरता और मिट्टी की स्थिति को ध्यान में रखते हुए डीएपी, एसएसपी, यूरिया तथा एमओपी का प्रयोग निर्धारित मात्रा में किया जाना चाहिए। इससे फसल को शुरुआती अवस्था से ही संतुलित पोषण मिलता है और पौधों की बढ़वार बेहतर होती है। 

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सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी भी करें दूर

यदि खेत में जिंक या बोरॉन की कमी हो तो रोपाई से पहले उसका सुधार करना आवश्यक है। संस्थान ने जिंक की कमी वाले क्षेत्रों में जिंक सल्फेट अथवा जिंक ईडीटीए तथा बोरॉन की कमी वाले खेतों में बोरेक्स का प्रयोग करने की सलाह दी है। सूक्ष्म पोषक तत्वों की उपलब्धता पौधों की वृद्धि, जड़ों के विकास तथा दानों के बेहतर भराव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। 

मिट्टी परीक्षण के आधार पर करें निर्णय

विशेषज्ञों का मानना है कि मिट्टी परीक्षण के आधार पर उर्वरकों का प्रयोग करने से पोषक तत्वों का संतुलन बना रहता है, लागत कम होती है और उर्वरकों की उपयोग दक्षता भी बढ़ती है।

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