खरीफ 2026: सोयाबीन की अधिक पैदावार के लिए कौन-सी किस्म बोएं? जानिए ICAR द्वारा जारी अनुशंसित किस्मों की सूची
23 जून 2026, नई दिल्ली: खरीफ 2026: सोयाबीन की अधिक पैदावार के लिए कौन-सी किस्म बोएं? जानिए ICAR द्वारा जारी अनुशंसित किस्मों की सूची – खरीफ सीजन की शुरुआत के साथ ही देशभर के किसान सोयाबीन की बुवाई की तैयारियों में जुट गए हैं। ऐसे में अच्छी पैदावार और बेहतर गुणवत्ता के लिए सही किस्म का चयन सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि यदि किसान अपने क्षेत्र की जलवायु और मिट्टी के अनुसार अनुशंसित किस्मों का चुनाव करें तो उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि की जा सकती है। इसी उद्देश्य से भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के अंतर्गत राष्ट्रीय सोयाबीन अनुसंधान संस्थान, इंदौर ने वर्ष 2026 के लिए विभिन्न कृषि-जलवायु क्षेत्रों के अनुसार सोयाबीन की अनुशंसित किस्मों की सूची जारी की है।
संस्थान के अनुसार, अलग-अलग राज्यों और क्षेत्रों की जलवायु परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए किस्मों की सिफारिश की गई है, ताकि किसानों को अधिक उत्पादन और बेहतर लाभ मिल सके।
मध्य क्षेत्र के किसानों के लिए ये हैं बेहतर विकल्प
मध्य क्षेत्र में मध्य प्रदेश, राजस्थान, गुजरात, उत्तर प्रदेश का बुंदेलखंड क्षेत्र और उत्तर-पश्चिम महाराष्ट्र शामिल हैं। यह देश का सबसे बड़ा सोयाबीन उत्पादक क्षेत्र माना जाता है।
इस क्षेत्र के लिए NRC 150, JS 21-72, NRC 142, JS 23-03, JS 23-09, MAUS 731, गुजरात सोया-4, JS 22-12, JS 22-16, NRC 165 और NRC 157 जैसी किस्मों की अनुशंसा की गई है।
इसके अलावा RVSM 2011-35, AMS 100-39 (पीडीकेवी अंबा), MACS 1520, RSC 10-46, RSC 10-52 और AMS-MB-5-18 (सुवर्ण सोया) भी किसानों के लिए उपयुक्त मानी गई हैं। महाराष्ट्र के किसानों के लिए MAUS 725 और फुले दुर्वा (KDS 992) को भी बेहतर विकल्प बताया गया है।
पूर्वी और उत्तर-पूर्वी राज्यों के लिए अनुशंसित किस्में
छत्तीसगढ़, झारखंड, बिहार, ओडिशा और पश्चिम बंगाल सहित पूर्वी भारत तथा असम, मेघालय, मणिपुर, नागालैंड और सिक्किम जैसे उत्तर-पूर्वी राज्यों के लिए अलग किस्मों की सिफारिश की गई है।
इन क्षेत्रों के लिए RSC 11-35, RSC 10-71, RSC 10-52, बिरसा सोया-4, MACS 1407, MACS 1460, NRC 128, RSC 11-07 और RSC 10-46 को उपयुक्त माना गया है। बिरसा सोया-4 विशेष रूप से झारखंड के किसानों के लिए अनुशंसित की गई है।
उत्तर भारत के मैदानी क्षेत्रों के लिए विशेष किस्में
पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, उत्तर प्रदेश के उत्तर-पूर्वी मैदानी क्षेत्र, उत्तराखंड के मैदानी भाग और पूर्वी बिहार के किसानों के लिए भी कई उन्नत किस्मों की सिफारिश की गई है।
इनमें Pusa Soybean-21, NRC 149, Pant Soybean-27, PS 1670, SL 1074, SL 1028, NRC 128, उत्तराखंड ब्लैक सोयाबीन (भट्ट-202), SL 979, SL 955, Pant Soybean-26 (PS 1572), PS 1368, PS 24 (PS 1477) और VLS 89 शामिल हैं।
पर्वतीय क्षेत्रों के किसानों के लिए उपयुक्त किस्में
हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों और जम्मू-कश्मीर जैसे इलाकों के लिए विशेष रूप से विकसित किस्मों की अनुशंसा की गई है।
इनमें शालीमार सोयाबीन-3 (SKAU-S-3), NRC 197, VLS 99, हिम पालम सोया-1, Pant Soybean-25 (PS 1556) तथा शालीमार सोयाबीन-1 प्रमुख हैं। ये किस्में पर्वतीय क्षेत्रों की जलवायु के अनुरूप बेहतर प्रदर्शन करने के लिए जानी जाती हैं।
दक्षिण भारत के किसानों के लिए ये किस्में रहेंगी बेहतर
कर्नाटक, तमिलनाडु, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और महाराष्ट्र के दक्षिणी हिस्सों के लिए भी कई उन्नत किस्मों की अनुशंसा की गई है।
इनमें ALSB 50, MAUS 725, फुले दुर्वा (KDS 992), NRCMACS 1667, NRC 142, MACS 1460, NRC 132, DSb 34, KDS 753 (फुले किमाया) तथा KBS 23 शामिल हैं। ALSB 50 को तेलंगाना और KBS 23 को कर्नाटक के लिए विशेष रूप से उपयुक्त माना गया है।
सही किस्म का चयन क्यों है जरूरी?
कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार, सोयाबीन की सही किस्म का चयन करने से न केवल उत्पादन बढ़ता है, बल्कि फसल की रोग प्रतिरोधक क्षमता, दानों की गुणवत्ता और बाजार मूल्य पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। इसलिए किसानों को बीज खरीदने से पहले अपने क्षेत्र के लिए अनुशंसित किस्मों की जानकारी अवश्य प्राप्त करनी चाहिए।
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