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फसल की खेती (Crop Cultivation)

जैविक फसल सुरक्षा के लिए कीटनाशक फफूंदनाशी बनाने की विधि 

9 जुलाई 2022, भोपाल: जैविक फसल सुरक्षा के लिए कीटनाशक फफूंदनाशी बनाने की विधि – किसी भी फसल पर या फलदार पेड़ों पर छिड़काव के लिए घर पर ही कम लागत से जैविक फसल के लिए कीटनाशक फफूंदनाशी बनाए जा सकते है ।

नीमास्त्र : रस चूसने वाले कीट एवं छोटी सुंडी इल्लियों के नियंत्रण हेतु।
विधि : पांच किलो नीम की हरी पत्तियां लें या नीम के पांच किलो सूखे फल लें और पत्तियों को या फलों को कूटकर रखें। 100 लीटर पानी में यह कुटी हुई नीम या फल का पाउडर डालें। उसमें 5 लीटर गोमूत्र डालें और एक किलो  देशी गाय का गोबर मिला लें। लकड़ी से उसे घोलें और ढककर 48 घंटे तक रखें। दिन में तीन बार घोलें और 48 घंटे के बाद उस घोल को कपड़े से छान लें। अब फसल पर छिड़काव करें।

ब्रह्मास्त्र : कीड़ों, बड़ी सुंडियों व इल्लियों के लिए।
विधि : 10 लीटर गोमूत्र लें। उसमें 3 किलो नीम के पत्ते पीसकर डालें। उसमें 2 कि.ग्रा. करंज के पत्ते डालें। यदि करंज के पत्ते न मिलें तो 3 किलो की जगह 5 किलो नीम के पत्ते डालें, उसमें 2 किलो सीताफल के पत्ते पीसकर डालें। सफेद धतूरे के 2 कि.ग्रा. पत्ते भी पीसकर इसमें डालें। अब इस सारे मिश्रण को गोमूत्र में घोलें और ढक कर उबालें। 3-4 उबाल आने के बाद उसे आग से नीचे उतार लें। 48 घंटों तक उसे ठंडा होने दें। बाद में उसे कपड़े से छानकर किसी बड़े बर्तन में भरकर रख लें। यह हो गया ब्रह्मास्त्र तैयार। 100 लीटर पानी में 2-2.5 लीटर मिलाकर फसल पर छिड़काव करें।

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अग्नि अस्त्र (अग्न्यस्त्र) : पेड़ के तनों या डंठलों में रहने वाले कीड़े, फलियों में रहने वाली सुंडियों, फलों में रहने वाली सुंडियों, कपास के टिण्डों में रहने वाली सुंडियों तथा सभी प्रकार की बड़ी सुंडियों व इल्लियों के लिए।
विधि : 20 लीटर गोमूत्र लें, उसमें आधा कि.ग्रा. हरी मिर्च कूटकर डालें। आधा किलो लहसुन पीसकर डालें। नीम के 5 कि.ग्रा. पत्ते पीसकर डालें तथा लकड़ी के डंडे से घोलें और उसे एक बर्तन में उबालें। 4-5 उबाल आने पर उतार लें। 48 घंटे तक ठण्डा होने दें। 48 घंटे के बाद उस घोल को कपड़े से छानकर एक बर्तन में रखें। 100 लीटर पानी में 2-2.5 लीटर डालकर फसल पर छिड़काव करें।

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जैविकफंगीसाइड : फफूंदी नाशक दवा या उल्ली नाशक।
विधि : 100 लीटर पानी में 3 लीटर खट्टी छाछ या लस्सी मिलाकर फसल पर छिड़काव करें। यह कवक नाशक है, सजीवक है और विषाणुरोधक है। बहुत ही बढिय़ा कार्य करता है।

दशपर्णी अर्क दवा : एक ड्रम या मिट्टी के बर्तन में 200 लीटर पानी लें। उसमें 10 लीटर गोमूत्र डालें। 2 कि.ग्रा. देशी गाय का गोबर डालें और अच्छी तरह से घोलें। बाद में उसमें 5 कि.ग्रा. नीम की छोटी-छोटी डालियां टुकड़े करके डालें और 2 कि.ग्रा. शरीफा के पत्ते, 2 कि.ग्रा. करंज के पत्ते, 2 कि.ग्रा. अरंडी के पत्ते, 2 कि.ग्रा. धतूरे के पत्ते, 2 कि.ग्रा. बेल के पत्ते, 2 कि.ग्रा. मढार के पत्ते,  2 कि.ग्रा. बेर के पत्ते, 2 कि.ग्रा. पपीते के पत्ते, 2 कि.ग्रा. बबूल के पत्ते, 2 कि.ग्रा. अमरूद के पत्ते, 2 कि.ग्रा. जांसवद के पत्ते, 2 कि.ग्रा. तरोटे के पत्ते, 2 कि.ग्रा. बावची के पत्ते, 2 कि.ग्रा. आम के पत्ते, 2 कि.ग्रा. कनेर के पत्ते, 2 कि.ग्रा. देशी करेले के पत्ते, 2 कि.ग्रा. गेंदे के पौधों के टुकड़े डालें। 

उपरोक्त वनस्पतियों में से कोई दस वनस्पति डालें। यदि आपके क्षेत्र में अन्य औषधयुक्त वनस्पतियों की जानकारी है, तब उसकी भी 2 कि.ग्रा. पत्तियां लें। सभी प्रकार की वनस्पतियों को डालने की आवश्यकता नहीं। बाद में उसमें आधा से एक किलो तक खाने का तम्बाकू डालें और आधा किलो तीखी चटनी डालें। तदनन्तर उसमें 200 ग्राम सोंठ का पाउडर व 500 ग्राम हल्दी का पाउडर डालें। 

अब इनको लकड़ी से अच्छी तरह घोलें। दिन में दो बार सुबह-शाम लकड़ी से घोलना है, घोल को छाया में रखें। इसे वर्षा के जल और सूर्य की रोशनी से बचाएं। इसको 40 दिन तैयार होने में लगते हैं। 40 दिन में दवा तैयार हो जाएगी, बाद में इसे कपड़े से छान लें और ढककर रख लें। इसे छह महीने तक रख सकते हैं। 200 लीटर पानी में यह 5 से 6 लीटर दशपर्णी अर्क कहीं भी कीट नियंत्रण के लिए छिड़कें। यह बहुत ही आसान और असरदार है।

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