घनजीवामृत (सूखी खाद) बनाने की विधि

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9 जुलाई 2022, भोपाल: घनजीवामृत (सूखी खाद) बनाने की विधि – घनजीवामृत (सूखी खाद) अब आप इस प्रकार भी बना सकते हैं।

घनजीवामृत के लिए क्या करना है-

1. 100 कि.ग्रा. देशी गाय का गोबर
2. 1 कि.ग्रा. गुड़
3. 2 कि.ग्रा. दलहन का आटा (अरहर, चना, मूंग या उड़द)
4. एक मुट्ठी उस खेत की मिट्टी
5. थोड़ा-सा गोमूत्र
उपरोक्त सभी पदार्थों को अच्छी तरह से मिलाकर गूंथ लें ताकि उसका हलवा, लड्डू जैसा गाढ़ा बन जाये। उसे 2 दिन तक बोरे से ढककर रखें और थोड़ा पानी छिड़क दें। बाद में उसे इतना घना बनाएं, जिससे उसके लड्डू बनें। अब इस घनजीवामृत के लड्डू को कपास, मिर्च, टमाटर, बैंगन, भिण्डी, सरसों के बीज के साथ भूमि पर रख दें। उसके ऊपर सूखी घास डालें। यदि आपके पास डिप सिंचन है तो घनजीवामृत के ऊपर सूखी घास रखकर घास पर डिपर से पानी डालें। 
ये घनजीवामृत के लड्डू और पेड़-पौधों के पास रख सकते हैं ताकि जीवामृत जड़ों तक पहुंच सके, इसके लिए भूमि में नमी नहीं होनी चाहिए। सूखा घनजीवामृत इस गीले घनजीवामृत को आप छाया या हल्की धूप में अच्छी तरह फैलाकर सुखा लें। सूखने के बाद इसको लकड़ी से पीटकर बारीक करें व बोरों में भरकर छाया में भंडारण करें। यह घनजीवामृत आप सुखाकर 6 महीने तक रख सकते हैं। सूखने के बाद घनजीवामृत स्थित सूक्ष्म जीव समाधि लेकर कोष धारण करते हैं। जब आप घनजीवामृत भूमि में डालते हैं, तब भूमि में नमी मिलते ही वे सूक्ष्म जीव कोष तोड़कर, समाधि भंग करके पुन: कार्य में लग जाते हैं। जिसके पास गोबर ज्यादा है, उसके लिए ज्यादा मात्रा में घनजीवामृत बनाकर सीमित फसलों में गोबर खाद में मिलाकर उसका प्रयोग करें। बड़े ही चमत्कारी परिणाम मिलेंगे।
किसी भी फसल की बुआई के समय प्रति एकड़ 100 कि.ग्रा. छाना हुआ गोबर खाद और 100 कि.ग्रा. घनजीवामृत मिलाकर बीज बोइए। बहुत ही अच्छे परिणाम मिलते हैं। मैंने यह परीक्षण प्रत्येक फसल में और फलदार पौधों में किया है और चमत्कारी परिणाम पाया है। इससे आप रासायनिक खेत से या जैविक खेती से ज्यादा उपज ले सकते हैं।

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