फसल की खेती (Crop Cultivation)

धान में गॉल मिज प्रबंधन: समय पर नियंत्रण से बचाएं कल्ले

06 अगस्त 2026, नई दिल्ली: धान में गॉल मिज प्रबंधन: समय पर नियंत्रण से बचाएं कल्ले – गॉल मिज से प्रभावित होती है कल्ले बनने की प्रक्रिया

गॉल मिज (Gall Midge) धान की ऐसी कीट है जो पौधों की नई बढ़वार पर हमला करती है। इसके प्रकोप से प्रभावित कल्ले सामान्य रूप से विकसित नहीं हो पाते, जिससे पौधों की उत्पादक क्षमता घट सकती है।

आईसीएआर-सीआरआरआई ने सलाह दी है कि खेतों की नियमित निगरानी की जाए ताकि कीट का प्रकोप शुरुआती अवस्था में ही पहचाना जा सके। 

प्रकोप होने पर अपनाएं नियंत्रण उपाय

संस्थान ने फिप्रोनिल, थायमेथोक्साम, लैम्ब्डा-सायहेलोथ्रिन, क्लोरपायरीफॉस अथवा कार्बोफ्यूरान का अनुशंसित मात्रा में उपयोग करने की सलाह दी है। छिड़काव या दवा का प्रयोग केवल आवश्यकता होने पर ही करें। 

नियमित निगरानी से कम होगी हानि

विशेषज्ञों का कहना है कि खेतों का नियमित निरीक्षण और शुरुआती अवस्था में नियंत्रण उपाय अपनाने से गॉल मिज के कारण होने वाली उपज हानि को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

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