फसल की खेती (Crop Cultivation)

किसान बैंगन की इन 6 उन्नत किस्मों की करें खेती, मिलेगा ज्यादा उत्पादन और बेहतर मुनाफा

01 जुलाई 2026, नई दिल्ली: किसान बैंगन की इन 6 उन्नत किस्मों की करें खेती, मिलेगा ज्यादा उत्पादन और बेहतर मुनाफा – अगर आप बैंगन की खेती से अधिक उत्पादन और बेहतर मुनाफा कमाना चाहते हैं, तो सही किस्म का चयन सबसे अहम है। उन्नत और अधिक उपज देने वाली किस्में न केवल बेहतर गुणवत्ता के फल देती हैं, बल्कि रोगों का सामना करने में भी सक्षम होती हैं।

देश के अलग-अलग राज्यों की जलवायु को ध्यान में रखते हुए विकसित की गई बैंगन की कई संकर और उन्नत किस्में किसानों को 350 से 650 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक उत्पादन देने की क्षमता रखती हैं। आइए जानते हैं बैंगन की ऐसी 6 उन्नत किस्मों के बारे में, जिनकी खेती अपनाकर किसान अपनी पैदावार और आय दोनों बढ़ा सकते हैं।

1. रसिका – खरीफ सीजन के लिए अधिक उत्पादन देने वाली किस्म

रसिका बैंगन की एक लोकप्रिय हाईब्रिड किस्म है, जिसे बेजो शीतल सीड्स प्राइवेट लिमिटेड, जालना ने वर्ष 2009 में विकसित किया था। इस किस्म के फल लगभग 16.37 सेंटीमीटर लंबे होते हैं और इसकी उत्पादन क्षमता 400 से 580 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक है। इसकी खेती के लिए 150 से 200 ग्राम बीज प्रति हेक्टेयर पर्याप्त होता है। यह मुख्य रूप से खरीफ मौसम के लिए उपयुक्त है और पंजाब, उत्तर प्रदेश, बिहार तथा झारखंड में इसकी खेती की जाती है।

2. शामली – लंबी फल वाली हाईब्रिड किस्म

शामली किस्म को सेमिनिस सीड्स ने वर्ष 2009 में विकसित किया था। यह लंबे फलों वाली हाईब्रिड किस्म है, जिसकी उपज क्षमता 350 से 650 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक बताई गई है। इस किस्म के लिए भी 150 से 200 ग्राम बीज प्रति हेक्टेयर की आवश्यकता होती है। खरीफ मौसम में इसकी खेती पंजाब, उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड में की जा सकती है। अधिक उत्पादन क्षमता के कारण यह किसानों के लिए बेहतर विकल्प मानी जाती है।

3. VNR-51C – छोटे गोल फलों वाली किस्म

VNR-51C हाईब्रिड किस्म को वीएनआर सीड्स प्राइवेट लिमिटेड, रायपुर ने वर्ष 2009 में विकसित किया। इस किस्म के फल छोटे और गोल आकार के होते हैं। इसकी उपज क्षमता 450 से 500 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है। खेती के लिए 150 से 200 ग्राम बीज प्रति हेक्टेयर पर्याप्त होता है। खरीफ सीजन में पंजाब, उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड के किसान इसकी खेती कर सकते हैं।

4. HABH-8 – तीनों सीजन में उगाई जा सकने वाली किस्म

HABH-8 हाईब्रिड किस्म को आईसीएआर-आईसीईआर, रांची ने विकसित किया है। यह छोटे गोल फलों वाली किस्म है, जिसकी उत्पादन क्षमता 375 से 544 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसे खरीफ, रबी और जायद तीनों मौसमों में उगाया जा सकता है। इसके लिए 150 से 200 ग्राम बीज प्रति हेक्टेयर की आवश्यकता होती है। यह किस्म मुख्य रूप से कर्नाटक, तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी के लिए उपयुक्त है।

5. PB-70 – रोग प्रतिरोधी और अधिक उत्पादन देने वाली किस्म

PB-70 किस्म को जीबी पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, पंतनगर ने वर्ष 2010 में विकसित किया। यह किस्म फोमोप्सिस झुलसा, बैक्टीरियल विल्ट तथा तना एवं फल छेदक कीट के प्रति प्रतिरोधी मानी जाती है। इसकी उत्पादन क्षमता 400 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है। इसकी खेती के लिए 400 से 500 ग्राम बीज प्रति हेक्टेयर की आवश्यकता होती है। इसे खरीफ, रबी और जायद तीनों मौसमों में उगाया जा सकता है। यह किस्म पंजाब, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़, ओडिशा, आंध्र प्रदेश, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, गोवा, कर्नाटक, तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी सहित कई राज्यों के लिए उपयुक्त है।

6. DBL-02 – लंबे बैंगनी फलों वाली उन्नत किस्म

DBL-02 किस्म को भाकृअनुप-भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (आईएआरआई), नई दिल्ली ने वर्ष 2010 में विकसित किया। इस किस्म के फल लंबे और गहरे बैंगनी रंग के होते हैं। इसकी उत्पादन क्षमता 370 से 390 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है। खेती के लिए 400 से 500 ग्राम बीज प्रति हेक्टेयर की आवश्यकता होती है। इसे खरीफ और वसंत मौसम में उगाया जा सकता है। यह किस्म जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, राजस्थान, गुजरात, हरियाणा और दिल्ली के किसानों के लिए उपयुक्त मानी जाती है।

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