फसल की खेती (Crop Cultivation)

बारिश में करें पपीते की इन 7 उन्नत किस्मों की खेती, एक पौधे से मिलेंगे 60 किलो तक फल; जानिए खासियत

18 जुलाई 2026, नई दिल्ली: बारिश में करें पपीते की इन 7 उन्नत किस्मों की खेती, एक पौधे से मिलेंगे 60 किलो तक फल; जानिए खासियत – मानसून का मौसम पपीते की खेती के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है। इस दौरान पर्याप्त नमी और अनुकूल तापमान के कारण पौधों की बढ़वार अच्छी होती है और जड़ें तेजी से विकसित होती हैं। यदि किसान इस मौसम में सही किस्म का चयन करें और वैज्ञानिक तरीके से पौधरोपण करें तो कम समय में बेहतर उत्पादन के साथ अधिक मुनाफा भी कमा सकते हैं। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार पपीते की कई ऐसी उन्नत किस्में उपलब्ध हैं, जो अधिक उत्पादन, बेहतर गुणवत्ता, रोग सहनशीलता और बाजार में अच्छी मांग के कारण किसानों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रही हैं। इनमें कुछ किस्मों से एक पौधे से 55 से 60 किलोग्राम तक फल प्राप्त किए जा सकते हैं।

1. रेड लेडी-786

रेड लेडी देश की सबसे लोकप्रिय व्यावसायिक पपीता किस्मों में शामिल है। इसके फल का औसत वजन 1.5 से 2 किलोग्राम होता है। फल स्वादिष्ट, आकर्षक और लगभग 13 प्रतिशत शर्करा युक्त होते हैं। यह किस्म रिंग स्पॉट वायरस के प्रति सहनशील मानी जाती है, इसलिए व्यावसायिक खेती के लिए किसानों की पहली पसंद बन चुकी है।

2. पूसा डिलीशियस

यह एक गाइनोडायोशियस किस्म है, जिसके पौधे मध्यम ऊंचाई के होते हैं और भरपूर उत्पादन देते हैं। इसके फल गहरे नारंगी रंग, बेहतरीन स्वाद और सुगंध वाले होते हैं। फल का औसत वजन 1 से 2 किलोग्राम रहता है तथा प्रति पौधा 58 से 61 किलोग्राम तक उत्पादन मिलता है। पौधरोपण के लगभग 260 से 290 दिनों बाद फल लगना शुरू हो जाते हैं।

3. पूसा ड्वार्फ

सघन बागवानी और सीमित स्थान के लिए यह किस्म काफी उपयुक्त मानी जाती है। इसके पौधे आकार में छोटे होते हैं और जमीन से 25 से 30 सेंटीमीटर की ऊंचाई पर ही फल देना शुरू कर देते हैं। फल का औसत वजन 1 से 2 किलोग्राम होता है तथा प्रति पौधा 40 से 50 किलोग्राम तक उत्पादन मिलता है।

4. पूसा जायंट

यह मजबूत और तेज हवा सहने वाली किस्म है। इसके बड़े आकार के फल 2.5 से 3 किलोग्राम तक वजन के होते हैं। यह किस्म प्रसंस्करण (कैनिंग), पेठा और सब्जी बनाने के लिए भी उपयुक्त मानी जाती है। प्रति पौधा 30 से 35 किलोग्राम तक उपज प्राप्त होती है।

5. पूसा नन्हा

घर की छत, गृह वाटिका और गमलों में लगाने के लिए यह सबसे बेहतर किस्मों में से एक है। इसके पौधे बौने होते हैं और 15 से 20 सेंटीमीटर की ऊंचाई से ही फल देना शुरू कर देते हैं। यह किस्म लगभग तीन वर्ष तक फल देती है और प्रति पौधा 25 किलोग्राम तक उत्पादन देती है।

6. पूसा मैजेस्टी

यह किस्म मुख्य रूप से पपेन उत्पादन के लिए विकसित की गई है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह सूत्रकृमि (नेमाटोड) के प्रति सहनशील होती है। पपेन उद्योग और प्रसंस्करण कार्यों के लिए यह किस्म काफी उपयोगी मानी जाती है।

7. अर्का सूर्या

अर्का सूर्या एक गाइनोडायोशियस संकर किस्म है, जिसे सोलो और पिंक फ्लेश स्वीट किस्मों से विकसित किया गया है। इसके फल का औसत वजन 500 से 700 ग्राम होता है। यह किस्म प्रति पौधा 55 से 56 किलोग्राम तक उत्पादन देती है और इसके फलों की भंडारण क्षमता भी अच्छी होती है, जिससे बाजार में बेहतर कीमत मिलने की संभावना रहती है।

अन्य प्रमुख उन्नत किस्में

इनके अलावा ताइवान, हनीड्यू (मधुबिंदु), कुर्ग हनीड्यू, वाशिंगटन, कोयंबटूर-1, CO-3, CO-4, CO-5, CO-6, पंजाब स्वीट और पंत पपीता जैसी किस्में भी अलग-अलग उद्देश्यों के लिए किसानों के बीच लोकप्रिय हैं। वहीं CO-2 और पूसा मैजेस्टी पपेन उत्पादन के लिए बेहतर मानी जाती हैं, जबकि पूसा नन्हा और पूसा ड्वार्फ गमलों और सीमित जगह में खेती के लिए उपयुक्त हैं।

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