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फसल की खेती (Crop Cultivation)

एआरआई- 516: अंगूर की इस वैरायटी को उगा लें किसान, कम समय में मिलेगा बेहतर मुनाफा और उच्च पैदावार  

16 अप्रैल 2026, नई दिल्ली: एआरआई- 516: अंगूर की इस वैरायटी को उगा लें किसान, कम समय में मिलेगा बेहतर मुनाफा और उच्च पैदावार – पुणे स्थित आघारकर अनुसंधान संस्थान द्वारा विकसित अंगूर की नई किस्म एआरआई-516 किसानों के लिए एक लाभकारी विकल्प  है। यह किस्म फफूंद रोधी होने के साथ-साथ अधिक पैदावार देने और बेहतर गुणवत्ता वाले फल उत्पादन के लिए बेस्ट है। विशेषज्ञों के अनुसार यह किस्म कम समय में तैयार होकर किसानों को बेहतर मुनाफा देने की क्षमता रखती है।

गर्मियों के मौसम में अंगूर की इस नई किस्म को लेकर किसानों में रुचि बढ़ रही है। एआरआई-516 न केवल रोगों के प्रति सहनशील है, बल्कि इसके फल रस से भरपूर होते हैं, जिनका उपयोग जूस, जैम और रेड वाइन जैसे उत्पादों में भी किया जा सकता है। इससे इसकी बाजार मांग और आर्थिक लाभ की संभावनाएं भी बढ़ जाती हैं।

वर्ष 2020 में विकसित हुई संकर किस्म

यह अंगूर किस्म वर्ष 2020 में आघारकर अनुसंधान संस्थान द्वारा विकसित की गई थी। इसे अमेरिकी काटावाबा और विटिस विनिफेरा जैसी दो किस्मों को मिलाकर तैयार किया गया है। यह किस्म बीज रहित है और फफूंद जनित रोगों के प्रति अधिक सुरक्षित मानी जाती है।

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110–120 दिनों में तैयार, घने गुच्छों वाली किस्म

एआरआई-516 अंगूर किस्म 110 से 120 दिनों में तैयार हो जाती है और इसके गुच्छे घने व आकर्षक होते हैं। यह किस्म महाराष्ट्र एसोसिएशन फॉर कल्टिवेशन साइंस (एमएसीएस)-एआरआई की वैज्ञानिक डॉ. सुजाता तेताली द्वारा विकसित की गई है।

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कई राज्यों की जलवायु में उपयुक्त

विशेषज्ञों के अनुसार यह किस्म महाराष्ट्र, तेलंगाना, तमिलनाडु, पंजाब और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों की जलवायु के लिए उपयुक्त है। भारत में अंगूर उत्पादन में महाराष्ट्र की हिस्सेदारी सबसे अधिक है, ऐसे में यह नई किस्म किसानों की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि रोग-रोधी और अधिक उत्पादक किस्मों को अपनाकर किसान कम समय में बेहतर उत्पादन और अधिक मुनाफा प्राप्त कर सकते हैं।

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