बीज का परिचय एवं उपयोग के विभिन्न पहलू
(अ) उत्तम बीज को स्त्रोत के आधार पर निम्न तीन समूहों में रखा गया है- प्रजनक बीज, आधार बीज और प्रमाणित बीज। प्रजनक बीज वह वर्ग है जो आनुवांशिक रूप से शुद्ध रहता है तथा इसको प्रजनक (व्रीडर) की देखरेख
नवीनतम उद्यानिकी (Horticulture) सम्बंधित जानकारी और कृषि पद्धतियों में नवाचार, बुआई का समय, बीज उपचार, खरपतवार नियन्तारन, रोग नियन्तारन, कीटो और संक्रमण से सुरक्षा, बीमरियो का नियन्तारन। उद्यानिकी (Horticulture) फसल सम्बंधित समस्या और उनका समाधान। टमाटर, प्याज़, आम, केला, पपीता, तरबूज़, मटर, गोभी, ककड़ी, फूल गोभी, करेला, स्टीविया, जुकिनी (तुरई), कद्दू, करेला, मिर्च, शिमला मिर्च, अरबी, रतालू, कटहल की फसल की खेती की जानकारी और नई किस्मे। ग्लेडियोलस, गुलाब, गेंदे की खेती। उद्यानिकी फसल में कीट नियंतरण एवं रोग नियंतरण। उद्यानिकी फसलों मैं बीज उपचार कैसे करे, बीज उपचार का सही तरीका। मशरुम की खेती, जिमीकंद की खेती, प्याज़ की उपज कैसे बढ़ाए, औषदि फसलों की खेती, जुकिनी की खेती, ड्रैगन फ्रूट की खेती, बैंगन की खेती, भिंडी की खेती, टमाटर की खेती, गर्मी में मूंग की खेती, आम की खेती, नीबू की खेती, अमरुद की खेती, स्ट्रॉबेरी की खेती, पपीते की खेती, मटर की खेती, शक्ति वर्धक हाइब्रिड सीड्स, लहसुन की खेती। शीत लहर में फसलों एवं सब्जियों को कीट-रोगों, पाले से बचाएँ
(अ) उत्तम बीज को स्त्रोत के आधार पर निम्न तीन समूहों में रखा गया है- प्रजनक बीज, आधार बीज और प्रमाणित बीज। प्रजनक बीज वह वर्ग है जो आनुवांशिक रूप से शुद्ध रहता है तथा इसको प्रजनक (व्रीडर) की देखरेख
मिट्टी में अत्यधिक रसायनिक उर्वरकों के प्रयोग से मिट्टी की उर्वरकता व उत्पादकता में प्रतिदिन ह्रास होता जा रहा है अत: वर्तमान समय में जैविक खेती की आवश्यकता बढ़ती जा रही है जैविक खेती में रसायनिक उर्वरकों, सिंथेटिक कीटनाशकों के
(विशेष प्रतिनिधि) भोपाल। प्रदेश की भूली-बिसरी किस्मों एवं प्रजातियों के संरक्षण के लिये म.प्र. राज्य जैव विविधता बोर्ड एवं कृषि विभाग द्वारा बीज बचाओ कृषि बचाओ यात्रा गत 2 मई से प्रारंभ की गई है जो 35 जिलों का भ्रमण
जलवायु एवं भूमि- ईसबगोल की उन्नत खेती के लिए सर्द एवं शुष्क जलवायु उपयुक्त रहती है। बीजों के अच्छे अंकुरण के लिए 20-25 सेल्सियस के मध्य का तापमान व मिट्टी का पी.एच. मान 7-8 सर्वोत्तम होता है। इसकी खेती के
जलवायु मूंग की खेती खरीफ एवं जायद दोनों मौसम में की जा सकती है। फसल पकते समय शुष्क जलवायु की आवश्यकता पड़ती है। खेती हेतु समुचित जल निकास वाली दोमट तथा बलुई दोमट भूमि सबसे उपयुक्त मानी जाती है, लेकिन
गाजर का जड़ वाली सब्जियों में प्रमुख स्थान है। यह स्वादिष्ट एवं पौष्टिक तत्वों से भरपूर होता है। गाजर में विटामिन ए तथा विटामिन ए को निर्मित करने वाला तत्व केरोटिन भरपूर मात्रा में पाया जाता है। इसके रंग में
हरदा। जवाहरलाल नेहरु कृषि विश्वविद्यालय के अन्तर्गत कृषि विज्ञान केन्द्र, हरदा के वैज्ञानिकों ने चने की फसल की सतत् निगरानी की सलाह देते हुए बताया कि बादल युक्त मौसम के बने रहने से फसल में इल्ली की संभावनाएँ बढ़ सकती
जबलपुर। जवाहरलाल नेहरु कृषि विश्वविद्यालय, जबलपुर के कृषि अर्थशास्त्र एवं प्रक्षेत्र प्रबंध विभाग में बाजार असूचना सी-4 (372) नामक परियोजना चलायी जा रही है, जिसके अंतर्गत साप्ताहिक थोक मूल्य को एकत्रित कर विभिन्न अर्थमित्तीय तकनीकों (आर्च, गार्च एवं एरिमा) का
बीज उत्पादक कम्पनियों की संकर एवं उन्नत किस्में कंपनी किस्में बैंगन सिंजेंटा मंजू, हरित कामिनी, काजल, छाया, संध्या, हर्षिता, कान्हा, रजनी, अनन्या, नुन 0137, मंजुला, नुन 0537, 1539, छईया नुनहेम्स सीड्स बी.ई.-707, 706, मोहिनी, नामधारी सीड्स एनएस
बीज उत्पादक कम्पनियों की संकर एवं उन्नत किस्में कंपनी किस्में टमाटर सिंजेन्टा इंडिया अभिनव, टीएच-1387, टीओ-848, टीओ 1389, निरूपम, अविष्कार महिको सीड्स एस41 (गोट्या), एमएचटीएम 301, 401 क्लाज इंटरनेशनल फ्रांस टाप-21, क्रिस्टल, एक्सप्लोरर जेकेएग्री जेनेटिक्स अक्षय