संपादकीय (Editorial)

संपादकीय (Editorial) में भारत में कृषि, कृषि नीतियों, किसानों की प्रतिक्रिया और भारतीय परिदृश्य में इसकी प्रासंगिकता से संबंधित नवीनतम समाचार और लेख शामिल हैं। संपादकीय (Editorial) में अतिथि पोस्ट और आजीविका या ग्रामीण जीवन से संबंधित लेख भी शामिल हैं।

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बैंकों के सहयोग, वानिकी के विस्तार और मज़बूत पशुपालन कर बढ़ाया जा सकता है रोजगार

बैंकों के सहयोग, वानिकी के विस्तार और मज़बूत पशुपालन कर बढ़ाया जा सकता है रोजगार बैंकों के सहयोग, वानिकी के विस्तार और मज़बूत पशुपालन कर बढ़ाया जा सकता है रोजगार – वैश्विक महामारी कोविड -19 के चलते पूरे विश्व में

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किसानों की समस्याओं का समाधान कृषक जगत फेस बुक लाइव

कृषक जगत ने फेस बुक लाइव से किया किसानों की समस्याओं का समाधान इंदौर। कोरोना लॉक डाउन -4 के दौरान कृषक जगत ने 22 मई से 2 जून की अवधि में फेस बुक लाइव के माध्यम से सब्जियों (टमाटर /मिर्च

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सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी, लक्षण व उनका प्रबंधन

सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी, लक्षण व उनका प्रबंधन कमी के लक्षण व प्रबंधन सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी, लक्षण व उनका प्रबंधन – जिंक : जस्ते की कमी सामान्य रूप से नई व पुरानी सभी पत्तियों में दिखाई देती

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किसानों को नई तकनीक के साथ जुडऩा होगा

किसानों को नई तकनीक के साथ जुडऩा होगा किसानों को नई तकनीक के साथ जुडऩा होगा – डॉ. रविन्द्र पस्तोर पूर्व आईएएस कृषि विपणन विशेषज्ञ समय समय पर कृषक जगत के पाठकों के लिए अग्री मार्केटिंग के विभिन्न पहलुओं पर

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लाभकारी और किफायती – हरी खाद

लाभकारी और किफायती – हरी खाद लाभकारी और किफायती – हरी खाद – हरी खाद का उपयोग भूमि तथा पौधों दोनों के लिये अत्यंत लाभकारी और उर्वरकों के मद में पैसा बचाकर खेती को लाभकारी बनाने का सबसे सस्ता, सुलभ

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ग्लोबल वार्मिंग और किसान

ग्लोबल वार्मिंग और किसान ग्लोबल वार्मिंग और किसान – वैज्ञानिक मानते हैं कि मानवीय गतिविधियाँ ही ग्लोबल वार्मिंग के लिए दोषी हैं। ग्लोबल वार्मिंग का मतलब है कि पृथ्वी लगातार गर्म होती जा रही है। उससे न केवल सूखा, बाढ़

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क्या खेती के लिए कोई प्लान ‘बी’ आवश्यक है ?

क्या खेती के लिए कोई प्लान ‘बी’ आवश्यक है ? क्या खेती के लिए कोई प्लान ‘बी’ आवश्यक है – हम प्रति दिन ऐसे व्हिडिओ टीवी व सोशल मीडिया पर देख रहे है जिस में किसानों द्वारा अपनी उपज को

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जरूरी है समय से कृषि आदान

जरूरी है समय से कृषि आदान जैसा कि पूर्व में लिखा जा चुका है खेती एक निरन्तर क्रिया है। खरीफ गया, रबी आया और रबी के बाद जायद। कृषि की इसी निरन्तरता में खरीफ आदानों की व्यवस्था की जाना जरूरी

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देश की रीढ़ है किसान

देश की रीढ़ है किसान ये वास्तविक और सर्वविदित है कि हमारा देश कृषि प्रधान है। आज भी अधिकांश लोग अपनी जीविका के लिए कृषि पर निर्भर हैं। हमारे आर्थिक विकास का सबसे मजबूत स्तम्भ कृषि ही है।मौजूदा दौर में

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जैविक खाद में खरपतवार का उपयोग

जैविक खाद में खरपतवार का उपयोग जैविक खेती आदिकाल से चली आ रही है, हमारे पूर्वजों ने अन्न उत्पादन के लिये जैविक खाद का ही उपयोग किया और स्वयं को तथा पर्यावरण को भी स्वच्छ रखने में सक्षम रहे। अनियंत्रित

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