फसल की खेती (Crop Cultivation)

फसल की खेती (Crop Cultivation) से जुड़ी संपूर्ण जानकारी प्राप्त करें। गेहूं, धान, सोयाबीन, मक्का, चना, सरसों, कपास, दालों और तिलहनी फसलों की उन्नत खेती, बुवाई, सिंचाई, पोषण प्रबंधन, रोग एवं कीट नियंत्रण के विशेषज्ञ सुझाव पढ़ें।

फसल की खेती (Crop Cultivation)

यूपी 2865 (UP 2865) गेहूँ किस्म: उत्तराखंड की लेट सown, सिंचित खेती के लिए उच्च प्रोटीन वाली किस्म

11 नवंबर 2025, नई दिल्ली: यूपी 2865 (UP 2865) गेहूँ किस्म: उत्तराखंड की लेट सown, सिंचित खेती के लिए उच्च प्रोटीन वाली किस्म – UP 2865 जीबी पंत कृषि विश्वविद्यालय द्वारा मैदानी खेती के लिए तैयार की गई है। मुख्य विशेषताएं: यह

फसल की खेती (Crop Cultivation)

यूपी 2844 (UP 2844) गेहूँ किस्म: उत्तराखंड की लेट सown, सिंचित परिस्थितियों के लिए उपयुक्त उच्च उपज वाली किस्म

11 नवंबर 2025, नई दिल्ली: यूपी 2844 (UP 2844) गेहूँ किस्म: उत्तराखंड की लेट सown, सिंचित परिस्थितियों के लिए उपयुक्त उच्च उपज वाली किस्म – UP 2844 पंतनगर द्वारा विकसित की गई और मैदानी क्षेत्रों में लोकप्रिय है। मुख्य विशेषताएं: यह फसल

फसल की खेती (Crop Cultivation)

यूपी 2944 (UP 2944) गेहूँ किस्म: उत्तराखंड के मैदानी क्षेत्रों में लेट सown के लिए उपयुक्त गेहूँ

11 नवंबर 2025, नई दिल्ली: यूपी 2944 (UP 2944) गेहूँ किस्म: उत्तराखंड के मैदानी क्षेत्रों में लेट सown के लिए उपयुक्त गेहूँ – UP 2944, गोविंद बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, पंतनगर द्वारा विकसित एक उच्च-yielding गेहूँ किस्म है। मुख्य विशेषताएं: लेट सown

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वीएल गेहूँ 3010 (VL Gehun 3010) गेहूँ किस्म: सिंचित परिस्थितियों में लेट सown के लिए उच्च लौह सामग्री वाली किस्म

11 नवंबर 2025, नई दिल्ली: वीएल गेहूँ 3010 (VL Gehun 3010) गेहूँ किस्म: सिंचित परिस्थितियों में लेट सown के लिए उच्च लौह सामग्री वाली किस्म – ICAR-VPKAS, अल्मोड़ा द्वारा विकसित यह गेहूँ किस्म मैदानी इलाकों में उच्च उपज देती है और लेट सown के

फसल की खेती (Crop Cultivation)

वीएल गेहूँ 967 (VL Gehun 967) गेहूँ किस्म: जैविक खेती और वर्षा आधारित, पहाड़ी क्षेत्रों के लिए उपयुक्त

11 नवंबर 2025, नई दिल्ली: वीएल गेहूँ 967 (VL Gehun 967) गेहूँ किस्म: जैविक खेती और वर्षा आधारित, पहाड़ी क्षेत्रों के लिए उपयुक्त – ICAR-VPKAS, अल्मोड़ा द्वारा विकसित यह गेहूँ किस्म उत्तराखंड के पहाड़ी, वर्षा आधारित क्षेत्रों के लिए समर्पित है, जो देर से

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पूसा डबल जीरो मस्टर्ड 35 (PDZ 14): किसानों के लिए वरदान, कम लागत में बंपर मुनाफा

11 नवंबर 2025, भोपाल: पूसा डबल जीरो मस्टर्ड 35 (PDZ 14): किसानों के लिए वरदान, कम लागत में बंपर मुनाफा – किसानों के लिए सरसों की नई किस्म पूसा डबल जीरो मस्टर्ड 35 (PDZ 14) वरदान साबित हो रही है।

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एएआई–डब्ल्यू10 (AAI-W10) (SHIATS-W10) गेहूँ किस्म: उत्तर प्रदेश के वर्षा आधारित क्षेत्रों के लिए उपयुक्त

10 नवंबर 2025, नई दिल्ली: एएआई–डब्ल्यू10 (AAI-W10) (SHIATS-W10) गेहूँ किस्म: उत्तर प्रदेश के वर्षा आधारित क्षेत्रों के लिए उपयुक्त – AAI-W10 (SHIATS-W10) एक उच्च-yielding गेहूँ किस्म है जो समय पर बुवाई और वर्षा आधारित वातावरण में अच्छी उपज देती है। मुख्य विशेषताएं: यह

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एएआई–डब्ल्यू13 (AAI-W13) (SHUATS-W13): प्रयागराज के लिए उपयुक्त गेहूँ किस्म

10 नवंबर 2025, नई दिल्ली: एएआई–डब्ल्यू13 (AAI-W13) (SHUATS-W13): प्रयागराज के लिए उपयुक्त गेहूँ किस्म – AAI-W13, जिसे SHUATS-W13 के नाम से भी जाना जाता है, शुआट्स, प्रयागराज द्वारा विकसित की गई है। मुख्य विशेषताएं: यह किस्म रोग प्रबंधन के लिए बेहतर

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पीबीडब्ल्यू 803 (PBW 803): उत्तर प्रदेश के लिए बेहतर सिंचित गेहूँ

10 नवंबर 2025, नई दिल्ली: पीबीडब्ल्यू 803 (PBW 803): उत्तर प्रदेश के लिए बेहतर सिंचित गेहूँ – PAU, लुधियाना द्वारा विकसित PBW 803 उत्तर प्रदेश की खेतिहर स्थितियों के लिए एक उच्च-yielding और रोग प्रतिरोधी किस्म है। मुख्य विशेषताएं: यह किस्म

फसल की खेती (Crop Cultivation)

एचडी 3298 (HD 3298): बहुत देर से बुवाई के लिए विकसित उच्च-yielding किस्म

10 नवंबर 2025, नई दिल्ली: एचडी 3298 (HD 3298): बहुत देर से बुवाई के लिए विकसित उच्च-yielding किस्म – HD 3298 ICAR-IARI, नई दिल्ली द्वारा विकसित गेहूँ किस्म है, जो बहुत देर से बुवाई करने वाले किसानों के लिए उपयुक्त है।

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