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पशुपालन (Animal Husbandry)

गर्मी के मौसम में पशुओं का रखे विशेष ध्यान, धूप व लू से करे बचाव

26 अप्रैल 2025, भोपाल: गर्मी के मौसम में पशुओं का रखे विशेष ध्यान, धूप व लू से करे बचाव – कृषि विज्ञान केन्द्र पोकरण द्वारा गर्मी से पशुओ का बचाव एवं बेहतर आहार प्रबंधन विषयक किसान चौपाल ग्राम रामदेवरा में आयोजित की गयी। केन्द्र के अध्यक्ष डॉ दशरथ प्रसाद ने बताया कि क्षेत्र में बढ़ता  तापमान और  गर्म हवा चलने से पशुओं में दुग्ध उत्पादन कम होने और  बीमारियों का अंदेशा रहता है। गर्मियों के दिनों में पशुओं से ज्यादा उत्पादन प्राप्त करना एवं उनका प्रबंधन बहुत कठिन होता है, गर्मियों मे पशु का दाना ग्रहण करने की क्षमता घट जाती है जिसके कारण दूध उत्पादन गिरने लगता है। 

ऐसे में पशुपालक अगर पशुओं के प्रबंधन एवं आहार व्यवस्था पर ध्यान दे तो काफी हद तक दूध उत्पादन को घटने से रोका जा सकता है। दुधारू पशुओं  एवं नवजात पशुओं की देखभाल उचित तरीके से  करके और गर्मी के प्रकोप एवं बिमारियों से बचाव करके  उत्पादन को बढ़ाया जा सकता है। केन्द्र के पशुपालन वैज्ञानिक डॉ राम निवास ने बताया कि  गर्मियों में तेज धूप और गर्मी से पशुओं को बचाने के लिए पशुशाला के मुख्य द्वार पर खस या जूट के बोरे का पर्दा लगाना चाहिये। पशु आवास को इस प्रकार बनाये की सभी जानवरों के लिए उचित स्थान हो ताकि हवा को आने जाने के लिए जगह मिले। रहन के आस पास छायादार वृक्षों की मौजूदगी पशुशाला के तापमान को कम रखने में सहायक होती है। क्षेत्र विशिष्ट संतुलित खनिज मिश्रण जानवरों को दैनिक रूप से प्रदान किया जाना चाहिए ।  

इससे गर्मी के तनाव के दौरान प्रतिरक्षा को बनाए रखने में मदद मिलेगी और फीड सेवन में वृद्धि करने में भी मदद मिलेगी । गर्मी के मौसम में जब तापमान बढ़ने लगता है तब पशु अपना सामान्य तापक्रम बनाए रखने के लिए खानपान में कमी, दुग्ध उत्पादन में 10 से 25 फीसदी की गिरावट, दूध में वसा के प्रतिशत में कमी, प्रजनन क्षमता में कमी, प्रतिरक्षा प्रणाली में कमी आदि लक्षण दिखाने लगते है एवं पशुओं की शारीरिक क्रियाओं में कुछ बदलाव देखने को मिलते हैं । 

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पशुओं के दाने में ज्यादा ऊर्जा वाला दाना जैसे मक्का, जौ इत्यादि का प्रयोग करें तथा पशुओं के लिये संतुलित आहार का प्रयोग करें जिसमे दाने के साथ-साथ हरा चारा, खनिज लवण एवं नमक का भी समावेश हो, जिससे पशुओं को उनकी आवश्यकतानुसार प्रोटीन, ऊर्जा, खनिज, विटामिन की आवश्यक मात्रा उपलब्ध हो जाती हैं। जहां तक संभव हो सके हरे चारे की समुचित मात्रा देनी चाहिए। गर्मी के मौसम में मक्का, लोबिया, चरी, ज्वार, को लगाए ताकि पशुओं को हरा चारा लगातार मिलता रहे। इससे पशुओं को अच्छा पोषण तो मिलता ही है, साथ मे पानी की उपलब्धता भी बढ़ जाती है। 

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अगर हरे चारे की उपलब्धता कम हो तो पशुओं को अलग से विटामिन दें। गर्मी के दिनों में पशुओं को नमक की आवश्यकता बढ़ जाती है। प्रत्येक पशु को 25-30 ग्राम नमक जरूर खिलाना चाहिए साथ ही पानी भरपूर मात्रा में पिलाना चाहिए। पशुओ हेतु पर्याप्त मात्रा में साफ सुथरा ताजा पीने का पानी हमेशा उपलब्ध होना चहिये। पीने के पानी को छाया में रखना चाहिये। पशुओं का इस मौसम में गलाघोंटू , खुरपका मुंहपका , लंगड़ी बुखार आदि बीमारियों से बचाने के लिए टीकाकरण जरूर कराना चाहिये जिससे वे आगे आने वाली बरसात में इन बीमारियों से बचे रहें। 

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