उत्पादन सुधार हेतु ऊँटों का संतुलित पोषण

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ऊँटों का संतुलित पोषण जरूरी

ऊँट के आहार स्रोत- चरागाह से उपलब्ध वनस्पति : खेजड़ी, जाल, बबूल, नीम, कीकर, बेर, फोग, खीप, तारामीरा, दूधेली, काँटी, सेवन, धामन, डचाब, बरसीम, ज्वार, जई।

उत्तरी-पश्चिम राजस्थान में सीमित जल एवं चारा संसाधन के पश्चात भी मरुक्षेत्र में पशुधन की अधिकता, पशुपालकों के रोजगार, आय एवं पोषण में पशुधन की उपयोगिता सिद्ध करती है। अन्य पशुओं की तुलना में पशुपालक उष्ट्र पोषण पर कम ध्यान एवं महत्व देते हैं। सामाजिक एवं आर्थिक बदलाव के साथ-साथ जलवायु परिवर्तन ने उष्ट्र पालन को प्रभावित किया है। चरागाहों के नष्ट होने से ऊँट पालक शहरों के आस-पास बसने लगे हैं तथा ऊँटों को चरागाह में रखने की बजाय घर पर खिलाने लगे हैं। नतीजतन आहार पर अधिक खर्च होने लगा है। इसीलिए पशु आहार क्षेत्र में विकसित तकनीकियों का उपयोग कर अधिक उत्पादन की ओर पशुपालक ध्यान देने लगे हैं। इसके लिए पशुपालकों को ऊँट के आहार संबंधी जानकारी का ज्ञान अवश्य होना चाहिए।

कृषि उत्पाद और उप-उत्पाद

  • अनाज काटने के बाद का बचा हुआ सूखा चारा – मूंगफली चारा, ग्वार चारा, मोठ चारा, गेहूँ की तूड़ी, जौ का भूसा, ज्वार, बाजरा एवं मक्का की कुट्टी।
  • तेल निकालने के बाद प्राप्त खल : मूंगफली, तिल, सरसों, सोयाबीन, बिनौला।
  • अनाज : बाजरा, जौ, ग्वार, मूंगचूरी।
  • चोकर/ चापड़ : गेहूँ चोकर, चावल चोकर।

ऊंट पालन की सफलता

ऊंट पालन की सफलता में संतुलित आहार, नस्ल संवर्धन एवं स्वास्थ्य रक्षा महत्वपूर्ण पहलू हैं। पशु पोषण का पशु उत्पादन में सर्वाधिक प्रभाव पड़ता है। वैश्विक परिवर्तनों से परम्परागत पशुपालन पद्धति पर विपरीत प्रभाव पड़ा है। आहार पर व्यय अधिक होने से पशुपालकों का लाभ कम हुआ है। ऐसी स्थिति में उपलब्ध प्राकृतिक संसाधनों का समुचित उपयोग, वातावरणीय अनुकूल खाद्य सुरक्षा तथा टिकाऊ उत्पादन हेतु संतुलित आहार आज की आवश्यकता है। पशु का आहार सुपाच्य एवं पोषक तत्वों से भरपूर होना चाहिये। संतुलित आहार में सभी पोषक तत्व जैसे प्रोटीन, वास, कार्बोहाइड्रेड, विटामिलन एवं खनिज मिश्रण उचित मात्रा एवं अनुपात में पशु की उत्पादक मांग के अनुरूप होने चाहिये।

सिर्फ एकल चारे अथवा दाने से सभी पोषक तत्वों की पूर्ति संभव नहीं है इसीलिए संतुलित आहार में ऊजाँ स्रोत हेतु मोटा अनाज दाना, प्रोटीन स्रोत हेतु खल एवं पूरक उप पदार्थ के रूप में चोकर, चापड़ मिलाया जाता है। साधारणतया पशु पालक ऊँटों को सिर्फ चरागाह पर अथवा सूखे चारे पर रखते हैं। सूखे चारे में पोषक तत्वों की मात्रा बहुत कम होती है। इससे सिर्फ पशु का पेट भरता है। दाना मिश्रण सिर्फ गर्भित ऊँटनियों को, ब्यांत पूर्व व ब्यांत पश्चात तथा बोझा ढोने वाले ऊँटों को दिया जाता है। खनिज लवण मिश्रण अधिकांशत: नहीं दिया जाता है।

इस तरह असंतुलनता के कारण कुछ पोषक तत्व आवश्यकता से अधिक और कुछ कम मात्रा में पशु को उपलब्ध होते हैं जिससे शरीर के रखरखाव एवं उत्पादन हेतु पोषक तत्वों की पूर्ति नहीं हो पाती। फलस्वरूप उत्पादन एवं प्रजनन पर विपरीत प्रभाव पड़ता है साथ ही असंतुलनता के कारण आहार की पचनीयता कम होने से प्रति उत्पादन आहार खर्च बढ़ जाता है। अपचित अपशिष्ट पदार्थों के अधिक उत्सर्जन से वातावरणीय प्रदूषण बढ़ता है।

सस्ते एवं संतुलित आहार बनाने के लिए खाद्य पदार्थों की उपलब्धता एवं बाजार भाव के बारे में जानकारी होना आवश्यक होता है। आवश्यक अवयवों की मात्रा को घटा/बढ़ा सकते हैं। परन्तु दाना मिश्रण में किसी एक तत्व की कमी या अधिकता से प्रजनन, दुग्ध उत्पादन एवं वृद्धि पर विपरीपत प्रभाव पड़ता है।

सम्पूर्ण पशु आहार- सम्पूर्ण आहार तकनीकी द्वारा पोषक तत्वों की मांग (रखरखाव दुधारू, वर्धनशील, ग्याभिन) के अनुसार विभिन्न अनुपात में चारा एवं दाना मिश्रण तैयार किया जाता है। संतुलित आहार कई प्रकार से बनाया जा सकता है।

मैशरूप (मसला हुआ) : मैशरूप में सभी खाद्य घटकों का आवश्यकतानुसार चुनाव कर 9 मि.मी. के छलनीयुक्त ग्राइण्डर में पीसा जाता है। इसके पश्चात सभी अवयवों को मिक्सचर में डालकर खनिज मिश्रण, विटामिन एवं नमक डालकर इकसार किया जाता है। शीरा डालकर 10 मिनट तक घुमाकर संग्रहित कर लिया जाता है।

पैलेट्स (गोलीदार दाना) : पैलेटिंग हेतु सर्वप्रथम चारे को पलविजर (चारा पीसने की मशीन) द्वारा पीसा जाता है। दाने को फीड हॉपर द्वारा पीसा जाता है। फीड मिक्सचर की सहायता से पीसे चारे एवं दाने में खनिज मिश्रण, विटामिन, नमक एवं शीरा मिला लेते हैं। तत्पश्चात 9 मि.मी. की डाई पर दबाव से पैलेट मशीन द्वारा पैलेट्स तैयार किये जाते हैं।

फीड ब्लॉक (ईंट रूप) : पीसे दाने एवं खनिज मिश्रण, विटामिन तथा नमक को अलग से बनाने के पश्चात चारे पर डालकर मिलाकर इकसार कर लिया जाता है। इसके पश्चात ईंट मशीन में उच्च हाइड्रॉलिक दबाव देकर चारायुक्त ईंट का आकार दे दिया जाता है।

लाभ

  • स्थानीय गैर परम्परागत चारे/दाने जिन्हें पशु एकल खाना पसंद नहीं करते। परन्तु यह ऊर्जा, प्रोटीन, लवण के अच्छी स्रोत होते हैं, को मिलाकर सस्ता आहार तैयार किया जा सकता है।
  • पशु चारे/ दाने का चुनाव करने के लिए स्वतंत्र नहीं रहता। अत: आहार की बर्बादी कम होती है।
  • संकटग्रस्त क्षेत्रों में (सूखे/बाढ़ की स्थिति), दुर्गम क्षेत्रों में जहां आवागमन मुश्किल होता है तथा चारे की असंतुलनता (अत्यधिक/कमी) में आसानी से संग्रहित एवं परिवहन कर पशु उत्पादन को बनाए रखा जा सकता है।

खनिज लवण मिश्रण

खनिज मिश्रण खिलाने पर खर्चा कम तथा लाभ अत्यधिक होता है तथा बहुत कम मात्रा में आवश्यक होते हैं। पशुओं में सुचारू शारीरित क्रियाएं, नियमित प्रजनन एवं उत्तम स्वास्थ्य के लिए आहार में खनिज लवण आवश्यक होते हैं। इन सबके पश्चात भी पशु पालक पशुओं को खनिज लवण मिश्रण नहीं देते हैं। आहार में लापरवाही से पशु कई बीमारियों से ग्रस्त हो जाता है। उत्पादन तेजी से कम हो जाता है।

अत: पशु के उत्तम स्वास्थ्य एवं अधिक उत्पादन प्राप्त करने के लिए अनिवार्य रूप से आहार में खनिज लवण एवं विटामिन मिलाना चाहिये। क्योंकि खनिज बहुत-सी प्रजनन एवं उत्पादन के लिए आवश्यक एन्जाइम्स क्रियाओं में प्रमुख घटक के रूप में काम आते हैं। इसलिए पशु आहार में कैल्शियम, फॉस्फोरस, जिंक, कॉपर, मैंगनीज एवं कोबाल्ट मुख्य रूप से महत्वपूर्ण होते हैं। पशु खाद्य पदार्थों में मुख्यतया इनकी कमी पायी जाती है।

जनन, प्रजनन एवं वृद्धि के दौरान खनिज तत्वों की मांग बढ़ जाती है। अत: वर्धनशील टोरडियों, दुधारू ऊँटनियों, ब्याँत पूर्ण एवं बाद तथा गर्भधारण योग्य ऊँटनियों को खनिज लवण मिश्रण अवश्य देवें। चरागाह की वनस्पति, हरा चारा तथा पेड़ों की पत्तियाँ खनिज तत्वों के उत्तम स्रोत हैं। सिर्फ सूखे चारे से खनिज तत्वों की पूर्ति नहीं हो पाती, इसीलिए सूखे चारे में पेड़ों की पत्तियाँ (3:1) या हरा चारा मिलाकर खिलायें। प्रतिदिन 50 ग्राम खनिज मिश्रण देकर खनिजों की आवश्यकता पूर्ण की जा सकता है।

स्थानीय रूप से उपलब्ध ऊँट चारा/दाना संसाधनों में उपस्थित खनिजों की जांच के पश्चात कैल्शियम, फॉस्फोरस, तांबा, जस्ता मैंगनीज एवं कोबाल्ट द्वारा तैयार क्षेत्र विशिष्ट खनिज मिश्रण ‘केमिन’ बनाया गया है। मिश्रित राशन में 0.1 प्रतिशत खनिज लवण अवश्य मिलायें।
संतुलित उत्पादन एवं लाभ के लिए पशु पोषण के प्रति जागरूकता की आवश्यकता है। संतुलित एवं सस्था पशु आहार बनाने के लिए प्रयुक्त घटकों की गुणवत्ता, बाजार भाव एवं उपलब्धता की जानकारी आवश्यक है। इससे जहां एक ओर पशु की उत्पादन एवं प्रजनन क्षमता बढ़ती है वहीं दूसरी ओर पशुपालकों को अधिक लाभ प्राप्त होता है।

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