विश्व मृदा दिवस में किसानों की भागीदारी हो

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अन्तर्राष्ट्रीय मृदा विज्ञान संघ ने वर्ष 2012 में मृदा के महत्व तथा मानव जाति की तंदुरुस्ती के लिए उसके योगदान को ध्यान में रखते हुए एक प्रस्ताव का अनुमोदन किया कि प्रतिवर्ष 5 दिसम्बर को विश्व मृदा दिवस के रूप में मनाया जाय। संयुक्त राष्ट्र संघ ने 20 दिसम्बर 2013 को आमसभा में प्रस्ताव का अनुमोदन कर 5 दिसम्बर को विश्व मृदा दिवस बनाने का फैसला किया। पिछले साल 2015 से 5 दिसम्बर को प्रथम बार विश्व मृदा दिवस मनाया गया। इस वर्ष भी मृदा दिवस 5 दिसम्बर को मनाया गया। भारत सरकार के कृषि तथा कृषक कल्याण मंत्री श्री राधामोहन सिंह ने विश्व मृदा दिवस को इन्जीनियरिंग कॉलेज बिन्डा, रुड़की (उत्तरांचल) में आयोजित कार्यक्रम में कहा कि किसान की आय खेतों में उगाई फसलों से होती है इसलिए उन्हें अपनी मिट्टी को स्वस्थ रखना चाहिए। मंत्री ने बताया कि भारत सरकार द्वारा मृदा स्वास्थ्य कॉर्ड योजना 2015 में आरंभ की गई ताकि किसान अपनी मृदा तथा मृदा प्रबंधन के बारे में अधिक जानकारी रख सके तथा उत्पादन में जो अन्तर वैज्ञानिकों, विस्तार अधिकारियों तथा किसान के बीच आता है उसे कम किया जा सके। दो वर्षों में मृदा परीक्षण के आधार पर 14 करोड़ किसानों को मृदा स्वास्थ्य कॉर्ड वितरित करने का लक्ष्य है। इसकी सफलता के लिए किसानों की भागीदारी होना आवश्यक है। इसके लिए किसानों का जाग्रत करने की आवश्यकता है उसके बिना इस योजना के लक्ष्य पूर्ण नहीं हो पाएंगे।
मृदा स्वास्थ्य कॉर्ड के लक्ष्यों तथा उसके प्रति जागरुकता के लिए उसे विश्व मृदा दिवस के साथ जोड़कर आगे बढ़ाया जाय तो इस योजना को गति देने तथा सफल बनाने में सहयोग मिल सकता है। प्रति वर्ष 5 दिसम्बर को विश्व मृदा दिवस को किसानों के सहयोग से किसानों के लिए कार्यक्रम आयोजित कर उन्हें मृदा तथा मृदा प्रबंधन के प्रति जागरुक करने के लिए इस दिवस का लाभ उठाया जा सकता है। हमें यह भी देखना होगा कि यह दिवस एक औपचारिकता बन कर न रह जाये बल्कि किसान को इस दिन मृदा, मृदा प्रबंधन तथा मृदा से सम्बन्धित उसकी शंकाओं का निराकरण हो सके। इसके लिए कृषि विभाग, कृषि विज्ञान केन्द्रों, अनुसंधान केन्द्रों, कृषि महाविद्यालयों तथा कृषि विश्व विद्यालयों की उनकी सार्थक भूमिका निभानी होगी। इससे मृदा स्वास्थ्य कॉर्ड की योजना तथा विश्व मृदा दिवस किसानों के उत्थान के लिए अपना योगदान दे पायेगा।

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