बागवानी तीर्थ बने लक्ष्मीनारायण पाटीदार के बगीचे

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इंदौर। ये तीतरी के किसान श्री लक्ष्मीनारायण पाटीदार का अनार का बगीचा है। उनके खेत को यदि बागवानी का तीर्थ कहा जाए तो अतिश्योक्ति नहीं। वकालत का पेशा छोड़ बागवानी को अंगीकार करने वाले श्री पाटीदार अकेले ऐसे किसान हैं, जो अनार, अंगूर, स्ट्रॉबेरी, सेव, बेर एवं अमरूद की उच्च किस्मों की खेती एक साथ करते हैं।
वर्तमान में उनके खेत अनार से लदे पौधों से आच्छादित हैं। लगभग 13 वर्ष पूर्व रोपे गए इस बगीचे को गर्व से देखते श्री पाटीदार कहते हैं, ये देश के उत्तम बगीचों की श्रेणी में आता है। मेरा पूरा समय इसकी मॉनिटरिंग में बीतता है। बेमौसम बारिश, ओलावृष्टि के बावजूद ये बगीचा जस का तस है। प्रतिदिन कई किसान बागवानी के इस तीर्थ को देखने-सीखने आते हैं। यहां उत्पादित सेंद्री और जम्बो किस्मों के अनार को बाजार में खासी कीमत मिल रही है। जम्बो अनार आकार में काफी बड़ा, वहीं स्वाद में अत्यंत मीठा होता है। दिल्ली, उदयपुर, जयपुर, भोपाल के बाजारों में इनकी खासी मांग है। सामान्य अनार जहां 60 से 70 रु. के दाम में बिकते हैं, वहीं उत्कृष्ट स्वाद एवं ताजगी भरे ये अनार 130 से 150 रु. प्रति किलो बिक रहे हैं। श्री पाटीदार बताते हैं, इसमें इल्ली और थ्रिप्स का आक्रमण होने की आशंका रहती है। रोगों की बात करें तो डाउनी मिल्ड्यू और पाउडरी मिल्ड्यू का प्रकोप होने की संभावना रहती है। पुत्र राजेश पाटीदार उनकी पूरी मदद करते हैं।

हॉलैण्ड में देखी ग्लास हाउस खेती
प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर कई कृषि सम्मान पा चुके श्री लक्ष्मीनारायण पाटीदार पिछले दिनों म.प्र. शासन की ओर से हॉलैण्ड यात्रा पर गए थे। वे बताते हैं, पॉली हाउस, नेट हाउस के साथ ही वहां ग्लास हाउस में विशेष रूप से खेती की जाती है। विपरीत मौसम में फूल, फल और सब्जियों का सामान्य से दस गुना उत्पादन लेते हैं। लगभग सभी प्रकार की सब्जियों और फलों का उत्पादन होता है, जिनकी गुणवत्ता और आकार भारतीय सब्जियों की तुलना में बड़ा और श्रेष्ठ है। आज हालैंड अपनी जरूरत पूर्ति के पश्चात बड़ी मात्रा में निर्यात कर रहा है। यहां खेती के यंत्रीकरण पर विशेष ध्यान दिया गया है। बड़े-बड़े फाम्र्स पर गन्ना हार्वेस्टर, बेलर रेक, कॉटन पिकर, फोडर मेज हार्वेस्टर, न्यूमेटिक कॉटन प्लांटर, सब सोइलर, शुगरकेन इनफील्डर जैसे आधुनिक यंत्रों से खेती की जा रही है। श्री पाटीदार कहते हैं, हॉलैंड में सरकार आदानों के न्यूनतम दाम तय कर देती है। फसल ऋण 0 प्रतिशत पर उपलब्ध होता है। प्रति हैक्टेयर 5 करोड़ रु.(भारतीय मुद्रा में) तक ऋण आसानी से मिल जाता है।

यांत्रिक विधि से छिड़काव
श्री पाटीदार बताते हैं, इजराइल जाकर ड्रिप इरिगेशन, मल्टीपल स्प्रेयर की तकनीक देखी और उसे अपने खेतों में उपयोग में लिया है। बगीचों में दवा छिड़काव के लिए लगभग बीस वर्ष पूर्व माइक्रो स्प्रेयर एवं छोटा जापानी ट्रैक्टर लेकर आया। इससे 10 से 20 फीट ऊंचे पौधों पर दवा के छिड़काव में आसानी होती है।

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