किसान भाई ग्रीष्मकालीन गहरी जुताई अवश्य करायें

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देवास। किसान भाईयों जैसा कि आपको पता है कि फसल की कटाई से लेकर पकने तक कुल जल मांग का 95 प्रतिशत खेत की सतह से वाष्पोत्सर्जन द्वारा व्यर्थ चला जाता है। जिसे हम कुछ हद तक गर्मी की एक गहरी जुताई करके रोक सकते है। हमारे यहां अधिकतर काली मिट्टी पाई जाती है तथा कृषकों को सोयाबीन की खेती के लिये खेत तैयार करने का समय नहीं मिल पाता है ऐसी स्थिति में किसान भाई मार्च माह से ही जुताई कार्यों में लग जाता है और वर्षा आते-आते 3-4 जुताई कर देता है। जिसका केवल एक ही उद्देश्य होता है मिट्टी को भुर-भुरा करना तथा खरपतवार से मुक्ति पाना। इस समस्या का समाधान हम एक गहरी जुताई करके कर सकते है। जिसके फलस्वरुप मिट्टी के बड़े-बड़े ढेले बन जाते हैं। जो वर्षा होने पर पानी अवशोषित करके खुद व खुद मुलायम हो जाते हैं और बाद में पाटा चलाकर या जुताई करके मिट्टी को भुरभुरा किया जा सकता है।

गहरी जुताई कई फायदें जैसे जिस खेत में गहरी जुताई की गई उसमे खरपतवार कम उगते हैं । गहरी जुताई करने से कीटों के अंड प्यूपे नष्ट हो जाते है जिससे कीट फसल में कम लगते हैं। मिट्टी की जलधारण क्षमता बढ़ जाती है इसके साथ-साथ मृदा में वायु का आवागमन अच्छा होता है। जिससे हमारा उत्पादन बढ़ता है। सभी किसान भाई तीन वर्ष में खेत की जुताई अवश्य करायें।

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