प्राकृतिक खेती में जीरो टिलेज से लागत में कमी आई

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  • प्रधान वैज्ञानिक एवं प्रमुख
    कृषि विज्ञान केन्द्र, टीकमगढ़ (म.प्र.)

26 फरवरी 2022, टीकमगढ़ । प्राकृतिक खेती में जीरो टिलेज से लागत में कमी आई – कृषि विज्ञान केन्द्र, टीकमगढ़ द्वारा प्राकृतिक खेती में जीरो टिलेज मषीन से गेंहू का प्रदर्षन 5 किसानो के खेतो पर रानी लक्ष्मीबाई केन्द्रीय कृषि विष्वविद्यालय झांसी एवं अर्न्तराष्ट्रीय गेंहू एवं मक्का अनुसंधान संस्था मैक्सिको के सौजन्य से वर्ष 2021-22 रबी मौसम में क्रियान्वित किये गये है । विगत दिवस इन प्रदर्षनों का डॉ. एस. एस. सिंह, संचालक विस्तार सेवायें झॉंसी, डॉ रबी गोपाल, प्रधान वैज्ञानिक, मैक्सिको संस्था को डॉ. बी. एस. किरार, प्रधान वैज्ञानिक एवं प्रमुख, डॉ आर. के. प्रजापति, वैज्ञानिक, आई. डी. सिंह एवं जयपाल छिगारहा द्वारा गांव हसगौरा, बटवाह, कौडिया गांव में किसानो के खेतो पर जीरो टिलेज गेंहू प्रदर्षन का अवलोकन कराया साथ ही वैज्ञानिको ने किसानो से प्रदर्षन में अपनाई तकनीक एवं प्रदर्षन तकनीक पर विचार जाने ।

किसानो ने बताया कि कृषि विज्ञान केन्द्र द्वारा जीरो टिलेज मषीन से खेत की बिना जुताई किये बुवाई करायी गई उसके बाद हल्की सिंचाई की गयी जिससे हमारे 2-3 जुताई के पैसे बचे । वर्तमान में फसल बिना जुताई करके बोने के पश्चात् भी अच्छी है, वैज्ञानिक डॉ रबि गोपाल, डॉ एस. एस. सिंह ने जीरो टिलेज खेती के फायदे बताए, इस विधि से उत्पादन लागत कम लगती है भूमि की भौतिक संरचना मे सुधार व फसल को कार्बन अधिक मिलता है तथा कम पानी मे अधिक समय तक नमी संरक्षित रहती है जड़ो का अच्छा विकास होता है जिससे उत्पादन में वृद्वि होती है तथा मार्च में गर्मी बढ़ने, तेज हवाऐं चलने पर भी फसल समय से ही परिपक्व होती है जबकि दूसरी तकनीक से बोई गयी फसल समय से पहले पक जाती है।

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