खंडवा में कपास खेती पर कार्यशाला, विशेषज्ञों ने किसानों को उन्नत उत्पादन तकनीक की जानकारी दी
29 अप्रैल 2026, खंडवा: खंडवा में कपास खेती पर कार्यशाला, विशेषज्ञों ने किसानों को उन्नत उत्पादन तकनीक की जानकारी दी – मध्यप्रदेश के खंडवा जिले में खरीफ सीजन की तैयारियों के मद्देनजर मंगलवार को एक दिवसीय कृषि कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला में कृषि महाविद्यालय खंडवा के वैज्ञानिक डॉ. डी.के. श्रीवास्तव ने किसानों को कपास की उन्नत खेती के लिए वैज्ञानिक तकनीकों की विस्तृत जानकारी दी। विशेषज्ञों ने बताया कि कपास की बेहतर गुणवत्ता और अधिक उत्पादन प्राप्त करने के लिए खेत की तैयारी से लेकर फसल की चुनाई तक वैज्ञानिक पद्धतियों का पालन करना आवश्यक है।
कार्यशाला में वैज्ञानिकों ने किसानों को भूमि चयन, बुवाई का समय, बीजोपचार, खाद प्रबंधन और जैविक खाद के उपयोग के बारे में विस्तार से जानकारी दी। साथ ही यह भी बताया गया कि सही तकनीक अपनाने से फसल की उत्पादकता बढ़ती है और किसानों की आय में सुधार होता है।
भूमि चयन और खेत की तैयारी
विशेषज्ञों के अनुसार कपास की खेती के लिए मध्यम-काली, लाल और दोमट मिट्टी सबसे उपयुक्त होती है। खेत में पर्याप्त जीवांश और जलधारण क्षमता होना जरूरी है। रबी फसल की कटाई के बाद गहरी जुताई करने और वर्षा के बाद खेत को समतल करने की सलाह दी गई। गर्मी के कपास के लिए मई के पहले सप्ताह तक खेत तैयार कर लेना चाहिए।
बुवाई का सही समय
कृषि वैज्ञानिकों ने बताया कि कपास की बुवाई समय पर करना बेहद महत्वपूर्ण है। गर्मी के कपास की बुवाई 25 मई से 5 जून के बीच, सिंचित कपास जून के पहले सप्ताह में और वर्षा आधारित कपास 15 जून के बाद 5-6 इंच वर्षा होने पर करनी चाहिए। सही मौसम जानकारी के आधार पर सूखे में भी बुवाई संभव है।
बीज उपचार और रोग नियंत्रण
फसल को मिट्टी जनित रोगों से बचाने के लिए बीजोपचार अनिवार्य बताया गया। विशेषज्ञों ने थायरम, मेन्कोजेब और कार्बेन्डाजिम जैसी दवाओं से बीज उपचार करने की सलाह दी, जिससे फसल सुरक्षित और स्वस्थ रहती है।
खाद प्रबंधन और बुवाई विधि
कपास की बुवाई चौफली पद्धति से करने की सलाह दी गई, जिससे कृषि कार्य आसान होता है। बुवाई के समय खाद की आधार मात्रा 6-8 सेमी गहराई पर देने, 25-30 दिन बाद रिंग पद्धति से खाद देने और 60-70 दिन बाद कॉलम पद्धति अपनाने की सलाह दी गई। इससे पौधों की वृद्धि बेहतर होती है और उत्पादन में बढ़ोतरी होती है।
जैविक खाद का उपयोग
विशेषज्ञों ने रासायनिक खाद के साथ जैविक खाद के उपयोग पर भी जोर दिया। फसल के 40वें और 80वें दिन एजोटोबैक्टर, पीएसबी, वेस्ट डीकंपोजर और ट्राइकोडर्मा जैसे जैविक उत्पादों के उपयोग से फसल की गुणवत्ता और मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है।
कपास की चुनाई प्रक्रिया
कपास की फसल एक साथ नहीं पकती, इसलिए इसकी चुनाई अलग-अलग चरणों में करनी चाहिए। पहली चुनाई 130-140 दिन में, दूसरी 150-160 दिन में और तीसरी 170-180 दिन में करने की सलाह दी गई।
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