महिला समूहों को गौशालाओं के जरिए आत्मनिर्भर बनाएंगे

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महिला समूहों को गौशालाओं के जरिए आत्मनिर्भर बनाएंगे

22 जून 2020,कटनी। महिला समूहों को गौशालाओं के जरिए आत्मनिर्भर बनाएंगे – कटनी जिस महिला समूहों को गौशालाओं के माध्यम से आत्म निर्भर बनाने में स्थापित हो रही गौशालाओं को संचालित करने के लिए महिला समूहों को गौशालाओं के माध्यम से आत्मनिर्भर बनाने गोबर गौमूत्र से जैविक खाद एवं कीट नाशक तथा अन्य उत्पादों के निर्माण आदि की जानकारी लेने गत दिवस जिला आजीविका मिशन से रामसुजान द्विवेदी ने जैविक कृषि पाठशाला पहुँचकर संचालक रामसुख दुबे से भेंट की।

श्री दुबे ने पाठशाला संचालन , कृषकों के प्रशिक्षण एवं भ्रमण तथा विभिन्न जैविक घटकों की जानकारी पशुओं में दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के लिए नेपियर घास का अवलोकन कराया। इसके पश्चात तेवरी के कृषक श्यामनारायण पांडेय की गौशाला तथा जैविक कृषि फॉर्म का अवलोकन किया जहाँ श्री पांडेय ने गौशाला प्रबंधन तथा पशुआहार के साथ नेपियर घास तथा पैरा घास का अवलोकन कराया। इस घास को लगाने के 45 दिन बाद प्रथम कटाई कर पशुआहार के साथ देने से दुग्ध उत्पादन बढ़ता है।

इस घास को एक बार लगा देने से 5 वर्ष तक हरा चारा मिलता है। गौशाला में विभिन्न किस्मों की गाय गिर, साहीवाल, जर्सी, गंगातीर एवं हरियाणा उनके रखरखाव उनमें लगने वाले रोग एवं इलाज दूध की मात्रा आदि की जानकारी दिया। गौमूत्र से कीट नाशक तथा गोबर का उपयोग बायोगैस संयंत्र एवं केंचुआ खाद बनाने में किया जा रहा है। केंचुआ खाद का उपयोग ग्रीष्मकालीन मक्का, उड़द एवं सब्जियों तथा अन्य फसलों में किया जा रहा है। महिला समूह की महिलाएं गौशालाओं के माध्यम से दूध जैविक कृषि उत्पाद का विक्रय कर अपनी आमदनी में वृद्धि कर स्वावलंबी एवं आत्मनिर्भर हो सकती हैं।

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