बागवानी किसान बीमा से वंचित क्यों?

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खरीफ-रबी में नहीं हुआ बीमा

(राजेश दुबे)
भोपाल। मध्य प्रदेश में सरकार ने बागवानी किसानों को हाशिये पर डाल दिया प्रतीत होता है। खेती की फसलों ने बागवानी की फसलों को दरकिनार कर दिया है। संभवत: इसलिए प्रदेश सरकार खेती की फसलों की बीमा योजना तो पूरे जोर-शोर से लागू करती है, परन्तु बागवानी फसलों की मौसम आधारित फसल बीमा योजना खरीफ-रबी दोनों सीजन निकलने के बाद भी लागू नहीं कर पाती है।
प्रदेश के उद्यानिकी विभाग द्वारा इस वर्ष खरीफ सीजन में मौसम आधारित फसल बीमा योजना के लिए 4-5 बार टेण्डर निकाले गये लेकिन खरीफ सीजन की अंतिम तारीख निकलने के बाद भी प्रीमियम दरों के लिए अंतिम निर्णय नहीं हो सका। जिसके कारण खरीफ सीजन में बागवानी फसलों का बीमा ही नहीं हो पाया। हालांकि खरीफ सीजन में मिर्च, संतरा, आम, केले की फसलें वायरस और मौसम की मार से खराब हुई सब्जीवर्गीय बागवानी फसलें भी अति वृष्टि और कीट व्याधियों से प्रभावित हुई। लेकिन इनके उत्पादक किसानों को बीमे से मिलने वाली राहत नहीं मिली। यही हाल वर्तमान रबी सीजन में भी है। इस सीजन में भी विभाग बीमा कम्पनियों से प्रीमियम दरों के लिए टेण्डर आमंत्रित कर चुका है। सीजन भी समाप्ति की ओर है लेकिन शासन इस पर कोई निर्णय नहीं ले पाया है।
कोरोना काल के मध्य में जब सरकारी विभागों में वेबिनार की प्रतिस्पर्धा चल रही थी, तब स्वयं मुख्यमंत्री ने उद्यानिकी विभाग के वेबिनार में कहा था कि प्रदेश में उद्यानिकी फसलों की भरपूर संभावना है और इसका सुनियोजित विकास किया जायेगा। ये विकास कब होगा? ये तो भविष्य बतायेगा। अभी तो उद्यानिकी किसान तक राज्य सरकार केन्द्र प्रवर्तित योजनाओं का लाभ ही पहुंचा दें तो किसान स्वयं विकास कर लेगा।

म.प्र. में बागवानी फसलों का क्षेत्रफल
पुष्प          30,799 हेक्टेयर
औषधि       37,617 हेक्टेयर
फल           3,75,448 हेक्टेयर
मसाला       7,23,462 हेक्टेयर
सब्जी         9,32,674 हेक्टेयर
कुल क्षेत्र      21,99,000 हे.

बीमा हेतु अनुशंसित बागवानी फसलें
खरीफ : संतर, केला, पपीता, प्याज, मिर्च, बैंगन, टमाटर।
रबी : आलू, टमाटर, बैंगन, प्याज, फूलगोभी, पत्तागोभी, हरी मटर, धनिया, लहसुन, आम, अनार, अंगूर।

 

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