राज्य कृषि समाचार (State News)

जैव उर्वरक क्यों ज़रूरी हैं? उपज बढ़ाने का वैज्ञानिक तरीका, पूसाविशेषज्ञों की पूरी गाइड

10 दिसंबर 2025, नई दिल्ली: जैव उर्वरक क्यों ज़रूरी हैं? उपज बढ़ाने का वैज्ञानिक तरीका, पूसा विशेषज्ञों की पूरी गाइड – पूसा समाचार IARI ने किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण विषय लेकर आए हैं बायोफर्टिलाइज़र्स यानी जैव उर्वरकों से बीज संशोधन। विशेषज्ञ बताते हैं कि जैव उर्वरक या जीवाणु खाद दरअसल लाभदायक जीवाणुओं से तैयार किए जाते हैं।

क्यों आज के समय में जैव उर्वरक बेहद ज़रूरी हैं

ये जीवाणु मिट्टी और पौधों को पोषक तत्व उपलब्ध कराने में मदद करते हैं और साथ ही मिट्टी का स्वास्थ्य भी सुधारते हैं। पिछले कई वर्षों में लगातार रासायनिक उर्वरकों के बढ़ते उपयोग के कारण मिट्टी में मौजूद लाभदायक जीवाणुओं की संख्या घटती जा रही है, जिससे भूमि की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है। इसी वजह से जैव उर्वरकों का महत्व तेजी से बढ़ा है।

आज विभिन्न पोषक तत्वों के लिए अलगअलग प्रकार के जीवाणु खाद उपलब्ध हैं। नाइट्रोजन के लिए राइजोबियम दालों में उपयोग किया जाता है। यह दालों में बनने वाली गांठों की संख्या और आकार बढ़ाता है और हवा में मौजूद नाइट्रोजन को पौधे के लिए उपलब्ध कराता है। अन्न वाली फसलों जैसे गेहूंसरसों के लिए एज़ोटोबैक्टर, मोटे अनाजों के लिए एज़ोस्पिरिलम, और धान के लिए नीलहरित शैवाल और एजोला का प्रयोग किया जाता है।

फास्फोरस उपलब्ध कराने के लिए पीएसबी (फॉस्फेट सोल्यूबलाइजिंग बैक्टीरिया) और माइकोराइजा का उपयोग होता है, क्योंकि मिट्टी में मौजूद फास्फोरस आमतौर पर पौधों को सीधे उपलब्ध नहीं हो पाता। इसके अलावा पोटाश सोल्यूबलाइजिंग बैक्टीरिया, जिंक सोल्यूबलाइजिंग बैक्टीरिया, सल्फर और आयरन के लिए भी विशेष जैविक उत्पाद बाजार में मौजूद हैं।

बायोफर्टिलाइज़र्स से बीज व पौध का उपचार

जैव उर्वरक दो रूपों में मिलते हैं पाउडर और तरल। पाउडर वाले पैक में लगभग 200 ग्राम की मात्रा एक एकड़ के लिए पर्याप्त होती है, जबकि तरल रूप में 50 एमएल का पैक एक एकड़ के लिए बनाया जाता है। विशेषज्ञ बताते हैं कि पाउडर रूप का उपयोग करने के लिए पहले 5% गुड़ का घोल तैयार करना होता है 1 लीटर पानी में 50 ग्राम गुड़ उबालकर ठंडा करें और उसमें पाउडर मिलाकर बीज पर उपचार करें। पौध उपचार के लिए उसी घोल में पौधों की जड़ों को आधे से एक घंटे तक डुबोकर रखा जाता है।

तरल फॉर्मूलेशन को साधारण पानी में घोलकर बीजों पर मिलाया जा सकता है। ध्यान रहे, पानी की मात्रा इतनी हो कि बीज अच्छे से गीले हो जाएं। उपचार करते समय हाथों में ग्लव्स या पॉलिथीन पहनना बेहतर होता है। बीज उपचार के बाद बीजों को धूप में नहीं, बल्कि छाया में सुखाना चाहिए और जल्द ही बुवाई कर देनी चाहिए।

यदि जैव उर्वरकों को मिट्टी में मिलाना हो, तो उनमें मात्रा कुछ बढ़ानी पड़ती है। जैसे 50 एमएल की जगह 200 एमएल तरल को खाद या मिट्टी में मिलाकर जुताई से पहले खेत में छिड़काव किया जाता है। हालांकि विशेषज्ञों की स्पष्ट सलाह है कि सबसे प्रभावी तरीका बीज या पौध उपचार ही है, क्योंकि जीवाणु सीधे जड़ क्षेत्र (राइज़ोस्फेयर) में सक्रिय होकर पौधे को अधिक पोषक तत्व उपलब्ध करा पाते हैं।

सावधानियों में विशेषज्ञ बताते हैं कि जैव उर्वरकों को कभी भी धूप या अत्यधिक गर्म स्थान पर न रखें। उन्हें छायादार और कमरे के तापमान वाली जगह पर ही सुरक्षित रखा जाना चाहिए, क्योंकि धूप से जीवाणु नष्ट हो सकते हैं। किसान इन्हें IARI पूसा संस्थान के किसी भी कार्य दिवस पर जाकर खरीद सकते हैं या पूसा मेले में भी प्राप्त कर सकते हैं।

अंत में विशेषज्ञ किसानों से अपील करते हैं कि जैव उर्वरकों का उपयोग आज की खेती में बेहद ज़रूरी हो चुका है। चाहे किसान जैविक खेती करते हों या संरक्षित खेती, दोनों ही स्थितियों में ये जीवाणु खाद मिट्टी के स्वास्थ्य को सुधारने और बेहतर उत्पादन के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

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