राष्ट्रीय कृषि समाचार (National Agriculture News)

भारतीय खेती के लिए क्यों जरूरी है वैज्ञानिक सोच? नई दिल्ली में विशेषज्ञों की बड़ी बैठक

01 मई 2025, नई दिल्ली: भारतीय खेती के लिए क्यों जरूरी है वैज्ञानिक सोच? नई दिल्ली में विशेषज्ञों की बड़ी बैठक – राष्ट्रीय कृषि विज्ञान अकादमी (NAAS) और ट्रस्ट फॉर एडवांसमेंट ऑफ एग्रीकल्चरल साइंसेज (TAAS) ने आज नई दिल्ली में एक समारोह का आयोजन किया, जिसमें दो प्रमुख कृषि वैज्ञानिकों—डॉ. हिमांशु पाठक, महानिदेशक, ICRISAT, और डॉ. एम.एल. जाट, सचिव, कृषि अनुसंधान और शिक्षा विभाग (DARE) व महानिदेशक, ICAR—को उनकी नई जिम्मेदारियों के लिए सम्मानित किया गया।

कार्यक्रम का एक प्रमुख आकर्षण TAAS और NAAS के बीच एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर था, जिसका उद्देश्य कृषि विज्ञान, अनुसंधान और नीति विकास में सहयोग को बढ़ावा देना है।

साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण पर जोर

डॉ. एम.एल. जाट ने अपने संबोधन में कृषि क्षेत्र में साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा, “हमें वैश्विक रुझानों के संदर्भ में उभरती कृषि मांगों का अध्ययन करना होगा। आंतरिक और बाह्य क्षमताओं को मजबूत करना और उनके बीच तालमेल सुनिश्चित करना एक लचीला कृषि पारिस्थितिकी तंत्र बनाने की कुंजी है।” उन्होंने भारतीय कृषि की विविधता से उत्पन्न चुनौतियों का जिक्र करते हुए एकीकृत और सुनियोजित दृष्टिकोण की जरूरत बताई।

विज्ञान की भूमिका पर चर्चा

ICRISAT के महानिदेशक डॉ. हिमांशु पाठक ने सामाजिक परिवर्तन में विज्ञान की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि प्रत्येक समाज को वैज्ञानिक सोच को अपनाना और बढ़ावा देना चाहिए। उन्होंने CGIAR और NAAS के बीच पिछले सहयोगों की सफलता का उल्लेख करते हुए ICAR, CGIAR और विशेष नवाचार टीम (SIT) के बीच साझेदारी को और मजबूत करने की उम्मीद जताई।

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चुनौतियां और समाधान

TAAS के अध्यक्ष डॉ. आर.एस. परोदा ने राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा, पोषण सुरक्षा और पर्यावरणीय स्थिरता को प्रमुख चुनौतियां बताया। उन्होंने कहा, “जलवायु परिवर्तन को कम करना, गैर-उपजाऊ क्षेत्रों को हरा-भरा करना और पुनर्जनन कृषि को बढ़ावा देना इन चुनौतियों का समाधान हो सकता है।”

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कार्यक्रम में डॉ. पी.के. जोशी, डॉ. अशोक के. सिंह और डॉ. डब्ल्यू.एस. लाकड़ा जैसे विशेषज्ञों ने भी विचार रखे। उन्होंने भारतीय कृषि के सामने भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए निरंतर सहयोग के महत्व पर जोर दिया।

यह आयोजन कृषि क्षेत्र में नवाचार, साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण और समावेशी विकास के प्रति सामूहिक प्रतिबद्धता को दोहराने का अवसर बना। विशेषज्ञों ने एकजुट होकर किसानों के जीवन को बेहतर बनाने और राष्ट्रीय लक्ष्यों के साथ तालमेल बिठाने की आवश्यकता पर बल दिया।

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