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राज्य कृषि समाचार (State News)

मध्यप्रदेश में मानसून की दस्तक से पहले मौसम बदला, भोपाल-ग्वालियर समेत कई जिलों में बारिश-आंधी; सीहोर और सागर में तेज हवाओं का अलर्ट

15 जून 2026, भोपाल: मध्यप्रदेश में मानसून की दस्तक से पहले मौसम बदला, भोपाल-ग्वालियर समेत कई जिलों में बारिश-आंधी; सीहोर और सागर में तेज हवाओं का अलर्ट –  भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अनुसार मध्यप्रदेश में मानसून के आगमन से पहले मौसम का मिजाज बदलने लगा है। पिछले 24 घंटों के दौरान भोपाल और ग्वालियर संभाग के जिलों में अनेक स्थानों पर तथा इंदौर, नर्मदापुरम, उज्जैन, चंबल, जबलपुर और सागर संभाग के कुछ क्षेत्रों में बारिश दर्ज की गई। कई जिलों में गरज-चमक, आंधी और तेज हवाओं का असर देखने को मिला। मौसम विभाग ने आगामी दिनों में भी प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश, वज्रपात और तेज हवाओं की संभावना जताई है।

भोपाल-ग्वालियर संभाग में सबसे ज्यादा असर, कई जिलों में बारिश

पिछले 24 घंटों के दौरान प्रदेश के भोपाल और ग्वालियर संभाग के जिलों में अनेक स्थानों पर वर्षा दर्ज की गई, जबकि इंदौर, नर्मदापुरम, उज्जैन, चंबल, जबलपुर और सागर संभाग के कुछ इलाकों में भी बारिश हुई। सबसे अधिक वर्षा चांद क्षेत्र में 44.2 मिमी दर्ज की गई। इसके अलावा मकसूदनगढ़ में 37.2 मिमी, पोहरी में 31 मिमी, बैराड़ में 29 मिमी, सिरोंज में 27 मिमी और इछावर में 23 मिमी बारिश रिकॉर्ड की गई।

बारिश के साथ कई जिलों में तेज हवाएं भी चलीं। सीहोर में 61 किमी प्रति घंटा, गुना में 59 किमी प्रति घंटा, भोपाल और सागर में 57 से 59 किमी प्रति घंटा तक हवा की रफ्तार दर्ज की गई। इसके अलावा होशंगाबाद, इंदौर, अशोकनगर, ग्वालियर और राजगढ़ में भी तेज हवाओं का असर रहा।

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खजुराहो रहा सबसे गर्म, पचमढ़ी सबसे ठंडा

मौसम विभाग के अनुसार प्रदेश का सर्वाधिक अधिकतम तापमान 42.4 डिग्री सेल्सियस खजुराहो (छतरपुर) में दर्ज किया गया। इसके बाद दतिया में 41.6 डिग्री और नौगांव (छतरपुर) में 41.4 डिग्री सेल्सियस तापमान रिकॉर्ड हुआ।

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वहीं सबसे कम न्यूनतम तापमान 19.6 डिग्री सेल्सियस पचमढ़ी (नर्मदापुरम) में दर्ज किया गया। भोपाल में 20.8 डिग्री और दमोह में 21.2 डिग्री सेल्सियस न्यूनतम तापमान रहा।

सिनोप्टिक स्थिति: मानसून आगे बढ़ रहा, मध्यप्रदेश पर असर शुरू

मौसम विभाग के अनुसार दक्षिण-पश्चिम मानसून 15 जून को आंध्र प्रदेश, पश्चिम बंगाल, तेलंगाना, ओडिशा, झारखंड और बिहार के कई हिस्सों में आगे बढ़ चुका है। अगले चार से पांच दिनों के दौरान मानसून के महाराष्ट्र, कर्नाटक, तेलंगाना, ओडिशा, झारखंड, बिहार के शेष भागों तथा छत्तीसगढ़ के कुछ हिस्सों में आगे बढ़ने के लिए परिस्थितियां अनुकूल बनी हुई हैं।

इसके अलावा पंजाब से बिहार तक एक मौसमी द्रोणिका (ट्रफ) सक्रिय है। दक्षिण मध्य महाराष्ट्र, दक्षिण पंजाब और दक्षिण-पूर्व पाकिस्तान से लगे क्षेत्रों में ऊपरी वायु चक्रवाती परिसंचरण बने हुए हैं, जिससे मध्य भारत में मौसम गतिविधियां बढ़ रही हैं। एक पश्चिमी विक्षोभ भी सक्रिय है, जबकि 18 जून से उत्तर-पश्चिम भारत में एक नया पश्चिमी विक्षोभ प्रभावी होने की संभावना है।

मौसम पूर्वानुमान: कई जिलों में बारिश, आंधी और वज्रपात के आसार

मौसम विभाग ने अगले 24 घंटों के दौरान प्रदेश के कई जिलों में गरज-चमक के साथ बारिश और तेज हवाओं की संभावना जताई है। सीहोर और सागर जिलों में 50 से 60 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की चेतावनी जारी की गई है।

वहीं भोपाल, विदिशा, रायसेन, राजगढ़, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, बुरहानपुर, खंडवा, देवास, शाजापुर, आगर-मालवा, मंदसौर, नीमच, गुना, अशोकनगर, शिवपुरी, ग्वालियर, दतिया, भिंड, मुरैना, श्योपुर, अनूपपुर, डिंडोरी, जबलपुर, नरसिंहपुर, छिंदवाड़ा, सिवनी, मंडला, बालाघाट, पांढुर्ना, दमोह, छतरपुर, टीकमगढ़ और निवाड़ी जिलों में 40 से 50 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से तेज हवाओं के साथ वज्रपात और वर्षा की संभावना है।

मौसम विभाग का कहना है कि अगले चार दिनों के दौरान प्रदेश के अधिकतम तापमान में कोई विशेष परिवर्तन होने की संभावना नहीं है।

किसानों के लिए विशेष सलाह

मौसम विभाग और कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को सलाह दी है कि वर्षा की संभावना को देखते हुए सिंचाई, उर्वरक प्रयोग और पौध संरक्षण रसायनों के छिड़काव का कार्य फिलहाल टाल दें। खेतों में जल निकासी की उचित व्यवस्था सुनिश्चित करें ताकि जलभराव से फसलों की जड़ों को नुकसान न पहुंचे।

तेज हवाओं से सब्जी फसलों, बेलदार पौधों और युवा फलदार पौधों को नुकसान से बचाने के लिए उन्हें सहारा (स्टेकिंग) दें। कटाई की गई उपज, बीज, उर्वरक और कृषि यंत्रों को जलरोधक तिरपाल से ढंककर सुरक्षित रखें। पॉलीहाउस, नेट हाउस और अन्य संरक्षित खेती की संरचनाओं को भी मजबूत करें।

पशुपालकों को सलाह दी गई है कि पशुओं को सुरक्षित एवं हवादार आश्रय में रखें, आंधी-तूफान और बिजली गिरने के दौरान उन्हें खुले में चराने से बचें तथा स्वच्छ पेयजल और पर्याप्त चारे की उपलब्धता सुनिश्चित करें। बागवानों को कमजोर और रोगग्रस्त शाखाओं की छंटाई करने तथा बारिश के बाद फसलों का निरीक्षण कर आवश्यक पौध संरक्षण उपाय अपनाने की सलाह दी गई है। साथ ही किसानों से मौसम की ताजा जानकारी पर नजर रखते हुए कृषि कार्यों की योजना बनाने का आग्रह किया गया है।

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