राज्य कृषि समाचार (State News)

कृषि को रखेंगे सर्वोपरि तभी होगा सबका उद्धार

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एमपीयूएटी की तर्ज पर सौ गांवों में काम करेगा राजस्थान विद्यापीठ

04 जून 2024, उदयपुर: कृषि को रखेंगे सर्वोपरि तभी होगा सबका उद्धार – जनार्दन राय नागर राजस्थान विद्यापीठ (डीम्ड टू बी विश्वविद्यालय) जल्द ही कृषि शिक्षा को बढ़ावा देने के लिये महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, उदयपुर के साथ एम.ओ.यू. (मैमोरेंडम ऑफ अंडस्टेडिंग) करेगा तथा एक सौ गांवों को गोद लेकर वहां के सर्वांगीण विकास को अमली जामा पहनाएगा। राजस्थान विद्यापीठ विश्वविद्यालय के कुलपति कर्नल प्रो. शिव सिंह सारंगदेवोत ने अपने कार्यकाल के 12 वर्ष की पूर्णता पर हुए अभिनंदन समारोह में यह बात कही।
एमपीयूएटी कुलपति डॉ. अजीत कुमार कर्नाटक ने प्रो. सारंगदेवोत को साफा-माला पहनाकर सम्मान किया व बारह वर्षों के कार्यकाल में अर्जित विलक्षण उपलब्धियों के लिये बधाई दी। इस मौके पर एमपीयूएटी की वरिष्ठ अधिकारी परिषद् (एसओसी) के सदस्यों डॉ. आर.ए. कौशिक, डॉ. पी.के. सिंह, डॉ. लोकेश गुप्ता, वित्त  नियंत्रक श्री विनय भाटी, डॉ. एस.के. इंटोदिया, डॉ. वी. नेपालिया, डॉ. लतिका व्यास ने भी प्रो. सारंगदेवोत को उपरणा पहनाकर सम्मानित किया।
प्रो. सारंगदेवोत ने कहा कि राजस्थान विद्यापीठ की स्थापना वर्ष 1937 में श्री जनार्दन राय नागर (जन्नूभाई) ने इस सपने के साथ की ताकि मेवाड़-वागड़ अंचल में शिक्षा की अलख जगाकर होनहार बच्चों को विकास की मुख्य धारा में जोड़ा जा सके। तब बहुत कम छात्रों के साथ विद्यापीठ ने अपना सफर शुरू किया जो आज लगभग 10 हजार छात्र-छात्राओं के वटवृक्ष के रूप में पल्लवित हो रहा है।

एमपीयूएटी  कुलपति डॉ. कर्नाटक ने कहा कि राजस्थान विद्यापीठ की उपलब्धियां निःसंदेह उल्लेखनीय है। मेवाड़-वागड़ में विद्यापीठ और विद्याभवन जैसी संस्थाओं ने शिक्षा की ज्योत को अविराम चेतन कर रखा है जिसके सुपरिणाम सबके सामने है। उन्होंने कहा कि आज प्रदेश में सरकारी, निजी और डीम्ड को मिलाकर लगभग 80 विश्वविद्यालय संचालित है। सभी विश्वविद्यालयों को किसी न किसी रूप में कृषि को अंगीकार करना होगा तभी गांव, शहर, प्रदेश व पूरे देश का समग्र विकास सम्भव है।                                                 

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