Ad DesktopAd TabletAd Mobile
राज्य कृषि समाचार (State News)

मक्का की बपर पैदावार चाहते हैं? वैज्ञानिकों की ये सलाह जरूर अपनाएं

11 जुलाई 2026, रायपुर: मक्का की बंपर पैदावार चाहते हैं? वैज्ञानिकों की ये सलाह जरूर अपनाएं – छत्तीसगढ़ के किसानों को मक्का की खेती से अधिक उत्पादन दिलाने और आधुनिक कृषि तकनीकों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर ने राज्य स्तरीय कृषि निर्देशिका जारी की है। विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने मौजूदा मौसम को मक्का की बुवाई के लिए अनुकूल बताते हुए किसानों से समय पर वैज्ञानिक तरीके से बोनी करने की अपील की है। उनका कहना है कि सही समय पर बुवाई और संतुलित पोषण अपनाने से फसल का उत्पादन और गुणवत्ता दोनों में सुधार होगा।

समय पर करें सीधी और कतार में बुवाई

कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार, मौसम पूर्वानुमान को देखते हुए किसान खेतों में मक्का की सीधी बुवाई और कतार (लाइन) में बोनी जल्द पूरी करें। वैज्ञानिकों का कहना है कि कतारों में बुवाई करने से पौधों का बेहतर विकास होता है, फसल प्रबंधन आसान रहता है और उत्पादन में वृद्धि होती है।

बीज की सही मात्रा और पौधों के बीच रखें उचित दूरी

विश्वविद्यालय ने सलाह दी है कि संकर (हाइब्रिड) किस्मों के लिए 15 से 20 किलोग्राम बीज प्रति हेक्टेयर, जबकि संयुक्त/संकुल किस्मों के लिए 20 से 25 किलोग्राम बीज प्रति हेक्टेयर का उपयोग करें। बेहतर उत्पादन के लिए कतार से कतार की दूरी 60 से 75 सेंटीमीटर और पौधे से पौधे की दूरी 20 से 25 सेंटीमीटर रखें। वहीं, मध्यम एवं देर से पकने वाली किस्मों की बुवाई 75×25 सेंटीमीटर की दूरी पर करने की सलाह दी गई है।

Ad DesktopAd TabletAd Mobile
Ad DesktopAd TabletAd Mobile

संतुलित उर्वरक का करें प्रयोग

वैज्ञानिकों ने बताया कि अच्छी पैदावार और मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने के लिए संतुलित मात्रा में उर्वरकों का उपयोग जरूरी है। किसानों को प्रति हेक्टेयर 80 से 120 किलोग्राम नत्रजन (नाइट्रोजन), 50 से 75 किलोग्राम स्फुर (फास्फोरस) तथा 30 से 50 किलोग्राम पोटाश का प्रयोग करने की सलाह दी गई है। इससे पौधों की बढ़वार बेहतर होगी और उत्पादन में वृद्धि होगी।

कृषक जगत को व्हाट्सएप पर फॉलो करें
खेती-किसानी की ताज़ा खबरें, सीधे आपके फ़ोन पर
चैनल फॉलो करें

वैज्ञानिक पद्धति अपनाने की अपील

इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय ने किसानों से मौसम आधारित कृषि सलाह का पालन करने और वैज्ञानिक तकनीकों को अपनाने की अपील की है। विश्वविद्यालय का कहना है कि समय पर बुवाई, सही बीज दर, उचित पौध दूरी और संतुलित उर्वरक प्रबंधन अपनाकर किसान न केवल उत्पादन बढ़ा सकते हैं, बल्कि खेती की लागत कम कर अपनी आय में भी बढ़ोतरी कर सकते हैं।

आपने उपरोक्त समाचार कृषक जगत वेबसाइट पर पढ़ा: हमसे जुड़ें
> नवीनतम कृषि समाचार और अपडेट के लिए आप अपने मनपसंद प्लेटफॉर्म पे कृषक जगत से जुड़े – गूगल न्यूज़, व्हाट्सएप्प
> कृषक जगत अखबार की सदस्यता लेने के लिए यहां क्लिक करें – घर बैठे विस्तृत कृषि पद्धतियों और नई तकनीक के बारे में पढ़ें
> कृषक जगत ई-पेपर पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें: E-Paper
> कृषक जगत की अंग्रेजी वेबसाइट पर जाने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें: Global Agriculture