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राज्य कृषि समाचार (State News)

उत्तरप्रदेश: बासमती चावल के लिए 11 कीटनाशक प्रतिबंधित, 60 दिनों तक रहेगी बिक्री पर रोक

25 अगस्त 2025, भोपाल: उत्तरप्रदेश: बासमती चावल के लिए 11 कीटनाशक प्रतिबंधित, 60 दिनों तक रहेगी बिक्री पर रोक – उत्तर प्रदेश सरकार ने बासमती चावल की गुणवत्ता सुधारने और अंतरराष्ट्रीय निर्यात मानकों के अनुरूप उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए बड़ा कदम उठाया है। राज्य के 30 जिलों में 11 रासायनिक कीटनाशकों की बिक्री, भंडारण, वितरण और उपयोग पर 60 दिनों के लिए प्रतिबंध लगाया गया है। यह आदेश 1 अगस्त 2025 से प्रभावी हो गया है।

ये हैं प्रतिबंधित कीटनाशक

जिला कृषि रक्षा अधिकारी निखिल देव तिवारी के अनुसार, प्रतिबंधित कीटनाशकों में ट्राईसाइक्लाजोल, ब्यूप्रोफेजिन, एसीफेट, क्लोरोपाइरीफास, टेबुकोनाजोल, प्रोपिकोनाजोल, थायोमेथाक्साम, प्रोफेनोफास, इमिडाक्लोप्रिड, कार्बेन्डाजिम और कार्बोफ्यूरान शामिल है। ये कीटनाशक फसलों में अवशेष के रूप में रह जाते हैं, जिससे न केवल गुणवत्ता प्रभावित होती है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजारों में बासमती चावल के निर्यात पर भी असर पड़ता है।

कृषि विभाग ने जारी की गाइडलाइन

कृषि विभाग ने प्रदेश के सभी कीटनाशी विक्रेताओं को इस प्रतिबंध के संबंध में स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं। विभाग ने चेतावनी दी है कि आदेश का उल्लंघन करने पर संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इस दौरान जैविक विकल्पों के रूप में नीम ऑयल, ट्राइकोडरमा, ब्युवेरिया बेसियाना जैसे जैविक कीटनाशकों के प्रयोग को बढ़ावा देने की सिफारिश की गई है।

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किसानों को दिए गए जरूरी निर्देश

कृषि विभाग ने किसानों से अपील की है कि वे फसल पकने से कम से कम एक माह पूर्व रासायनिक कीटनाशकों का उपयोग पूरी तरह बंद कर दें, ताकि फसल में किसी भी प्रकार का अवशेष न रह जाए। इसके अलावा, वैकल्पिक उपायों के तौर पर लाइट ट्रैप, फेरोमोन ट्रैप और स्टिकी ट्रैप के उपयोग को भी प्रोत्साहित किया गया है।

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गुणवत्ता और निर्यात को मिलेगा बढ़ावा

सरकार का मानना है कि इस प्रतिबंध से बासमती चावल की गुणवत्ता में सुधार होगा और अंतरराष्ट्रीय बाजार में उत्तर प्रदेश की हिस्सेदारी बढ़ेगी। साथ ही, यह कदम किसानों को जैविक खेती की ओर प्रेरित करेगा, जिससे दीर्घकालिक रूप से भूमि की उर्वरता और पर्यावरण की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकेगी।

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