केवीके सिवनी की रबी फसलों हेतु सामयिक सलाह
28 दिसंबर 2025, सिवनी: केवीके सिवनी की रबी फसलों हेतु सामयिक सलाह – कृषि विज्ञान केन्द्र, सिवनी के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ. शेखर सिंह बघेल तथा वैज्ञानिक डॉ. एन.के. सिंह ने रबी फसलों, विशेषकर गेहूं की फसल के लिए कृषकों को आवश्यक सामयिक सलाह दी है।
वैज्ञानिकों ने बताया कि जिन क्षेत्रों में गेहूं की फसल 25–30 दिन की हो चुकी है और पत्तियों का रंग हरे से पीले की ओर बदल रहा है, यह फसल में पोषक तत्वों की कमी का संकेत है। समय पर ध्यान न देने पर फसल की बढ़वार रुक सकती है और उत्पादन में कमी आ सकती है। गेहूं में पीलापन आने के प्रमुख कारण नाइट्रोजन की कमी होने पर पुरानी पत्तियां पहले पीली होती हैं और धीरे-धीरे ऊपर तक प्रभाव दिखाई देता है।आयरन की कमी में पत्तियां पीली हो जाती हैं, लेकिन नसे हरी रहती हैं।जिंक की कमी से पत्तियों में सफेदी आ जाती है और पौधे छोटे रह जाते हैं।जल प्रबंधन में असंतुलन, जैसे जलभराव या अत्यधिक नमी से जड़ें कमजोर हो जाती हैं।
बेहतर पैदावारके लिए सुझाव – वैज्ञानिकों ने कृषकों को सलाह दी कि खेत में जैविक खाद का उपयोग अवश्य करें, जलभराव न होने दें तथा ठंड के कारण पीलापन दिखाई देने पर हल्की सिंचाई करना लाभकारी रहता है। गेहूं में पीलापन दूर करने हेतु पोषक तत्व प्रबंधन नाइट्रोजन की कमी में 40–50 किलोग्राम यूरिया प्रति एकड़ देने से शीघ्र प्रभाव दिखाई देता है।पानी में घुलनशील उर्वरक एन.पी.के. 19:19:19 या 12:32:16 का 2 प्रतिशत घोल (2 किलोग्राम प्रति 100 लीटर पानी) बनाकर छिड़काव करें। आयरन की कमी में फेरस सल्फेट 0.5 प्रतिशत तथा साइट्रिक एसिड (नींबू का रस) 0.1 प्रतिशत मिलाकर छिड़काव करें। जिंक की कमी के समाधान हेतु जिंक सल्फेट 21 प्रतिशत की 25 किलोग्राम मात्रा प्रति एकड़ अगली सिंचाई के साथ डालें। वैज्ञानिकों ने बताया कि समय पर उचित पोषक तत्वों का प्रयोग करने से गेहूं की फसल पुनः हरी-भरी हो जाती है तथा उत्पादन में भी वृद्धि होती है।
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