टीकमगढ़: बीज उत्पादन कार्यक्रम में रॉगिंग की महत्त्वपूर्ण भूमिका
10 फरवरी 2026, टीकमगढ़: टीकमगढ़: बीज उत्पादन कार्यक्रम में रॉगिंग की महत्त्वपूर्ण भूमिका – कृषि विज्ञान केंद्र टीकमगढ़ के प्रधान वैज्ञानिक एवं प्रमुख, डॉ बी.एस. किरार साथ ही वैज्ञानिक डॉ. एस.के. जाटव द्वारा कृषि महाविद्यालय, खुरई से आए हुए ग्रामीण कृषि कार्य अनुभव (रावे) कार्यक्रम के अंतर्गत छात्रों को रॉगिंग की प्रक्रिया प्रयोगिक रूप में सिखाई गई । साथ ही बताया गया कि किसान भाई खेत में बीज उत्पादन कार्यक्रम लेते हैं, तो खेत में रॉगिंग करना आवश्यक और अनिवार्य क्रिया है।
रॉगिंग का अर्थ है – खेत से अवांछित, अशुद्ध, रोगग्रस्त या किस्म से भिन्न पौधों को पहचान कर निकाल देना ताकि शुद्ध, गुणवत्तायुक्त और प्रमाणित बीज प्राप्त किया जा सके। रॉगिंग करने के बहुत महत्व होते हैं, जैसे – आनुवंशिक शुद्धता इसमें रॉगिंग द्वारा ऑफ-टाइप (किस्म से भिन्न) पौधों को हटाया जाता है, जिससे बीज की आनुवंशिक शुद्धता बनी रहती है। बीज प्रमाणीकरण में सहायक इसमें प्रमाणित एवं आधार बीज उत्पादन में रॉगिंग अनिवार्य है। बिना रॉगिंग के बीज प्रमाणीकरण संभव नहीं होता। उच्च गुणवत्ता वाला बीज उत्पादन इसमें रोगग्रस्त, कमजोर एवं असामान्य पौधों को निकालने से बीज की गुणवत्ता एवं अंकुरण क्षमता बढ़ती है। रोग एवं कीट प्रसार में कमी इसमें संक्रमित पौधों को हटाने से रोगों और कीटों का फैलाव रुकता है। शुद्ध एवं स्वस्थ पौधों से उत्पादित बीज की मांग अधिक होती है, जिससे किसान को बेहतर मूल्य प्राप्त होता है तथा उपज एवं बाजार मूल्य में वृद्धि होती है।
वैज्ञानिकों के अनुसार फसलों में रॉगिंग 4 बार की जानी चाहिये जैसे – अंकुरण अवस्था कमजोर एवं भिन्न पौधों की पहचान करके, वानस्पतिक अवस्था पत्तियों, तने एवं वृद्धि में भिन्नता होने पर, फूल आने की अवस्था फूलों के रंग, आकार एवं समय में अंतर होने पर, फल/बीज अवस्था फल या दाने के आकार-प्रकार में भिन्नता होने पर पौधों को निकाल देना चाहिये। किसान भाई यदि बीज उत्पादन कार्यक्रम कर रहा है तो अवश्य ही रॉगिंग करें, जिससे बीज शुद्ध बना रहता हैं और बीज की गुणवत्ता भी बनी रहती हैं। जिसे फसल की विभिन्न अवस्थाओं में सावधानीपूर्वक करना आवश्यक है। प्रभावी रॉगिंग से ही शुद्ध, स्वस्थ एवं प्रमाणित बीज का उत्पादन संभव है, जो कृषि उत्पादन बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
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