Ad DesktopAd TabletAd Mobile
राज्य कृषि समाचार (State News)

घरेलू मांग कम होने के कारण जीरे में फिलहाल तेजी की स्थिति नहीं

08 मार्च 2025, इंदौर: घरेलू मांग कम होने के कारण जीरे में फिलहाल तेजी की स्थिति नहीं – गुजरात में प्रतिकूल मौसम के कारण जीरे की नई फसल में लगभग एक महीने की देरी हो चुकी है। गुजरात और राजस्थान जैसे प्रमुख उत्पादक राज्यों में इस सीजन बोवनी में देरी हुई थी। हालांकि, घरेलू मांग कम होने के कारण फिलहाल तेजी की स्थिति नहीं बन पा रही है।

मौजूदा स्टाक से निर्यात मांग को पूरा किया जा रहा है। किसानों के पास अभी भी लगभग 20 लाख बैग जीरा का स्टाक बताया जा रहा है, जिसमें से सीजन खत्म होने से पहले केवल 3-4 लाख बैग का ही कारोबार होने की उम्मीद है। इस तरह लगभग 16 लाख बैग का महत्वपूर्ण कैरी-फारवर्ड स्टाक बच सकता है।

बेहतर फसल की स्थिति और अच्छी बोवनी के साथ इस सीजन के लिए उत्पादन का स्तर पिछले साल के समान रहने की उम्मीद है। इंदौर में भी नए जीरे की फसल को ध्यान में रखते हुए पिछले दिनों आई गिरावट अब थम गई है। हालांकि आगे भी जीरे में कोई बड़ी तेजी नजर नहीं आ रही है।

Ad DesktopAd TabletAd Mobile
Ad DesktopAd TabletAd Mobile

इंदौर में जीरा भाव

इंदौर में जीरा 245 से 255, मीडियम 260 से 275, बेस्ट 290 से 300 रुपये प्रति किलो तक बोला जा रहा है। मसाला बोर्ड के अनुसार, भारत का जीरा उत्पादन 2023-24 में बढ़कर 8.6 लाख टन हो गया, जबकि पिछले साल यह 5.77 लाख टन था। इसके बावजूद, भारत का जीरा वैश्विक बाजारों में सबसे सस्ता बना हुआ है, जिससे यह चीन सहित खरीदारों के लिए पसंदीदा विकल्प बन गया है।

कृषक जगत को व्हाट्सएप पर फॉलो करें
खेती-किसानी की ताज़ा खबरें, सीधे आपके फ़ोन पर
चैनल फॉलो करें

भारतीय जीरे की कीमत 3,050 डॉलर प्रति टन है, जबकि चीनी जीरा 200-250 डालर अधिक महंगा है। जीरा निर्यात में जोरदार वृद्धि देखी गई, जो अप्रैल-नवंबर 2024 में 74.04 फीसदी बढ़कर 147,006.20 टन हो गया, जबकि एक साल पहले यह 84,467.16 टन था। हालांकि, नवंबर के निर्यात में अक्टूबर से 28.92 फीसदी की गिरावट आई।

(नवीनतम कृषि समाचार और अपडेट के लिए आप अपने मनपसंद प्लेटफॉर्म पे कृषक जगत से जुड़े – गूगल न्यूज़,  टेलीग्राम, व्हाट्सएप्प)

(कृषक जगत अखबार की सदस्यता लेने के लिए यहां क्लिक करें – घर बैठे विस्तृत कृषि पद्धतियों और नई तकनीक के बारे में पढ़ें)

कृषक जगत ई-पेपर पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें:

www.krishakjagat.org/kj_epaper/

कृषक जगत की अंग्रेजी वेबसाइट पर जाने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें:

www.global-agriculture.com