राज्य कृषि समाचार (State News)

लौकी, खीरा और तरबूज, इनकी बनी रहती है मांग, इसलिए किसान कर रहे है खेती

14 फ़रवरी 2025, भोपाल: लौकी, खीरा और तरबूज, इनकी बनी रहती है मांग, इसलिए किसान कर रहे है खेती – लौकी, खीरा हो या फिर तरबूज, इन सभी की मांग सीजन के अनुसार बाजारों में बनी रहती है और यही कारण है कि देश के अधिकांश किसानों द्वारा इनकी खेती समय के अनुसार करते है. लौकी गर्मी के दिनों में उपयोग में आई जाती हवहीं इसकी सब्जी भी लोग पसंद करते है इसलिए किसान इसकी  खेती करते है वहीं तरबूज की भी अब मांग आने वाले दिनों में बढ़ने वाली है क्योंकि गर्मी के दिनों में लोग ताजगी के लिए तरबूज का सेवन करते है.

कृषि विशेषज्ञों ने बताया कि  इस साल देश में समय से पहले ही देश में तापमान बढ़ने लगा है. तापमान बढ़ने के कारण रबी सीजन में उगाई गई अधिकांश फसलों की कटाई भी होने लगी है. रबी सीजन की कटाई के तुरंत बाद ही जायद फसलों की बुवाई शुरू हो जाती है. लौकी हरी सब्जियों में काफी खास मानी जाती है. लौकी की खेती के लिए भी जायद सीजन बेस्ट है. इसे  किसी भी तरह की मिट्टी में उगा सकते हैं. बुवाई के 60 दिनों के बाद ही लौकी की अधिकांश किस्में फल देने लगती हैं. गर्मी के दिनों में लौकी की मांग खूब होती है. खीरा पानी दार फल होता है जो गर्मी के दिनों में काफी फायदेमंद माना जाता है. खीरे की खेती के लिए जल धारण वाली बलुई दोमट मिट्टी अच्छी मानी जाती है. खीरे की सबसे अधिक खेती जायद में ही होती है. खीरे की फसल भी 60 दिनों में तैयार हो जाती है, अभी उगाकर अप्रैल-मई में अच्छी कमाई कर सकते हैं. गर्मी के दिनों में सबसे खास फल तरबूज को माना जाता है. तरबूज उगाने के लिए बलुई मिट्टी सबसे अच्छी मानी जाती है. इसकी ज्यादातर खेती नदियों के किनारे की जाती है. तरबूज की फसल भी लगभग तीन महीने में तैयार हो जाती है. फरवरी में उगाने वाले किसान पूरी गर्मी इससे अच्छी खासी कमाई कर सकते हैं. 

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