राज्य कृषि समाचार (State News)

खरगोन कलेक्टर ने नाबार्ड के पोटेंशियल लिंक्ड क्रेडिट प्लान का विमोचन किया

कृषि और संबद्ध क्षेत्रों में पूंजी निर्माण की गति को बढ़ाएं  –  कलेक्टर भव्या मित्तल

29 जनवरी 2026, (दिलीप दसौंधी, कृषक जगत, मंडलेश्वर): खरगोन कलेक्टर ने नाबार्ड के पोटेंशियल लिंक्ड क्रेडिट प्लान का विमोचन किया –  खरगोन कलेक्टर श्रीमती भव्या मित्तल ने गत दिनों नाबार्ड द्वारा वर्ष 2027- 28 के लिए  तैयार की गई  पीएलपी ( पोटेंशियल  लिंक्ड क्रेडिट प्लान) का विमोचन किया।  विमोचन के समय श्री सुमेर सिंह सोलंकी, एलडीएम, श्री तुषार अग्रवाल, चीफ मैनेजर, बैंक ऑफ़ इंडिया उपस्थित थे।

श्री विजेंद्र पाटिल, सहायक महाप्रबंधक, नाबार्ड ने बताया कि  खरगोन जिले के लिए ₹. 10,461 करोड़ की ऋण योजना बनाई गई  है  । यह ऋण आकलन भारत सरकार एवं मध्य प्रदेश सरकार की प्राथमिकताओं/नीतियों में बदलाव से उत्पन्न  संभावनाएं , आधारभूत / सहायक सुविधाओें में सुधार, स्केल ऑफ फ़ाइनेंस, यूनिट कॉस्ट,  सब्सिडी  योजनाओं इत्यादि संभावित उपलब्धि, गत वर्षो में बैंकों की उपलब्धियों, पिछले आधार स्तरीय ऋण प्रवाह को ध्यान में रख कर किया गया हैं। गत वर्ष खरगोन  जिले  में प्राथमिकता प्राप्त क्षेत्र में ऋण प्रवाह 11 % की दर से बढ़ा  है । उपर्युक्त को ध्यान में रखते हुए ऋण योजना  में  15 % की वृद्धि की  गई है । वर्ष  2026 -27  में कृषि क्षेत्र हेतु ₹. 7658   करोड़, एमएसएमई क्षेत्र हेतु ₹2138 करोड़ तथा अन्य प्राथमिकता क्षेत्र के लिए ₹.  665 करोड़ का  आकलन  किया गया है। कृषि मियादी ऋण ₹  2542 करोड़ का आकलन किया गया है जो कुल कृषि ऋण का लगभग 33 प्रतिशत है।

वर्ष  2026-27  के लिए, नाबार्ड ने, एसएचजी / जेएलजी वित्त पोषण , सिंचाई सुविधाओं में विस्तार, डेयरी विकास में सुधार, कृषक उत्पादन संगठन इत्यादि जैसे क्षेत्रों पर ज़ोर देने की आवश्यकता जताई  है । उच्च मूल्य वाली कृषि के साथ-साथ संबद्ध गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए अच्छी गुणवत्ता वाली नर्सरियों, हैचरी, मछली बीज फार्म आदि की आवश्यकता है। कृषि आधारित अर्थव्यवस्था की अंतर्निहित क्षमता को प्राप्त करने के लिए कृषि उपज और कृषि प्रसंस्कृत उत्पादों, खास कर मिर्च, के विपणन चैनलों को बढ़ाने की आवश्यकता है। नाबार्ड कई विकास गतिविधियों को बढ़ावा दे रहा है जिसमें स्वयं सहायता समूह/ संयुक्त देयता समूह प्रोमोटिंग संस्थान, एफपीओ , कार्यशालाओं का आयोजन, सेमिनार, प्रशिक्षण शिविर, जल संसाधन के माध्यम से प्रकृतिक संसाधन प्रबंधन, गैर कृषि क्षेत्र के लिए ऋण आधारित प्रशिक्षण इत्यादि प्रमुख हैं।

एजीएम नाबार्ड ने सभी बैंक को  फूड – एग्रो प्रोसेसिंग, एफ़पीओ फाइनन्सिंग एवं नाबार्ड द्वारा वित्त पोषित बिस्टान एवं नागलवाड़ी लिफ्ट सिंचाई योजना से लाभान्वित क्षेत्रों में माइक्रो (ड्रिप/स्प्रिंकलर) इरीगेशन  के लिए ऋण प्रवाह बढ़ाने पर ज़ोर दिया। सभी गतिविधियों में जेएलजी (संयुक्त देयता समूह) के माध्यम से ऋण प्रवाह बढ़ाने की प्रचुर सम्भावना  है।   कलेक्टर ने निर्देशित किया  कि  बैंकों, सरकारी विभागों और गैर सरकारी संगठनों को वर्ष 2026-27 के लिए जिलों में मूल्यांकित समग्र ऋण क्षमता को मूर्त रूप देने के लिए मिलकर काम करना होगा, विशेष रूप से कृषि और संबद्ध क्षेत्रों में पूंजी निर्माण की गति को तेज करने और किसानों की आय बढ़ाने के लिए।

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