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खेत से सालाना 50 हजार की आय से 1.68 करोड़ तक का सफर

जैन टिश्यू कल्चर भगवा अनार और आधुनिक तकनीक ने बदली किसान नारिंगाराम चौधरी की तकदीर

लेखक: जितेंद्र श्रीकांत झंवर, मीडिया विभाग, जैन इरिगेशन,  जलगांव  

27 जून 2026, भोपाल: खेत से सालाना 50 हजार की आय से 1.68 करोड़ तक का सफर – राजस्थान के जालोर जिले की सायला तहसील का दुधवा गांव आज आधुनिक बागवानी और जल-कुशल कृषि का एक प्रेरणादायी मॉडल बनकर उभरा है. कम वर्षा, भीषण गर्मी, चुनौतीपूर्ण जलवायु और रेत वाली जमीन इन परिस्थितियों के बावजूद यहां के किसानों ने आधुनिक तकनीकों को अपनाकर खेती में सफलता की नई इबारत लिखी है. इन्हीं प्रगतिशील किसानों में से एक हैं नारिंगाराम मालाराम जी चौधरी. कभी पारंपरिक फसलों जैसे गेहूं, अरंडी और बाजरा की खेती से सालाना मात्र 50 हजार से 1 लाख रुपये तक की आय अर्जित करने वाले नारिंगारामजी ने आज अनार की खेती के माध्यम से आर्थिक समृद्धि का नया मुकाम हासिल किया है.

इस परिवर्तन के पीछे है उनकी नई सोच, निरंतर सीखने की ललक और आधुनिक कृषि तकनीकों पर भरोसा है. जैन इरिगेशन के भगवा टिश्यू कल्चर अनार पौधे, टपक (ड्रिप) सिंचाई प्रणाली और फर्टिगेशन तकनीक ने उनके खेती के तरीके को पूरी तरह बदल दिया. आज नारिंगाराम  किसानों के लिए प्रेरणा बन चुके हैं. उनका अनार निर्यात होता है और खेती से करोड़ों रुपये की आय प्राप्त हो रही है.  कैसे एक किसान ने पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर अनार उत्पादन में सफलता की नई कहानी लिखी. आइए जानते हैं उनकी जुबानी…

मेरी पढ़ाई केवल पांचवीं कक्षा तक ही हुई है. बचपन से ही मैं अपने परिवार की खेती से जुड़ा रहा और अपने पूर्वजों द्वारा अपनाई गई पारंपरिक खेती की पद्धतियों को नजदीक से देखता आया हूँ. हमारे खेत में मुख्य रूप से बाजरा, गेहूँ और अरंडी जैसी फसलें उगाई जाती थीं. खेती से सालाना कभी 50 हजार रुपये तो कभी 1 से 1.5 लाख रुपये तक की आय होती थी. परिवार में आठ सदस्य हैं और उनकी आजीविका का एकमात्र आधार खेती ही थी. हालांकि संसाधन सीमित थे, लेकिन मेरे मन में हमेशा खेती में कुछ नया करने और बेहतर अवसर तलाशने की इच्छा रहती थी. मैं मानता था कि यदि किसान नई तकनीकों और आधुनिक कृषि पद्धतियों को अपनाए, तो खेती को अधिक लाभदायक बनाया जा सकता है. इसी सोच के साथ मैंने आसपास के प्रगतिशील किसानों का एक समूह बनाया और उन्नत खेती के तौर-तरीकों को समझने के लिए देश के विभिन्न राज्यों का भ्रमण शुरू किया.

इसी दौरान मुझे गुजरात जाने का अवसर मिला, जहाँ पहली बार मैंने जैन इरिगेशन के मार्गदर्शन में विकसित अनार के बगीचे देखे. अनार की उत्कृष्ट गुणवत्ता, पौधों की स्वस्थ वृद्धि और किसानों की आर्थिक प्रगति ने मुझे बेहद प्रभावित किया. इसके बाद मैं सीधे जलगांव में जैन इरिगेशन पहुँचा. वहाँ मैंने आधुनिक कृषि तकनीकों, टिश्यू कल्चर पौधों, टपक सिंचाई (ड्रिप इरिगेशन) और फर्टिगेशन प्रणाली को करीब से देखा और समझा. जैन इरिगेशन के प्रदर्शन प्लॉटों पर अनार की सफल खेती देखकर मेरे मन में विश्वास जागा कि यदि सही तकनीक और उचित मार्गदर्शन मिले, तो हमारे क्षेत्र में भी अनार की खेती सफल हो सकती है. इसके बाद मैंने जैन टिश्यू कल्चर के भगवा अनार की खेती करने का निर्णय लिया. इस निर्णय को अंतिम रूप देने से पहले मैं तीन बार जैन इरिगेशन गया, विशेषज्ञों से चर्चा की, तकनीकी जानकारी प्राप्त की और अनार खेती के हर पहलू को समझा. हालाँकि मेरा यह निर्णय आसान नहीं था. मेरे माता-पिता और आसपास के कई किसान इसके खिलाफ थे. उनका मानना था कि हमारे क्षेत्र की रेतीली जमीन और वातावरण में अनार की खेती सफल नहीं हो सकती. लेकिन जैन इरिगेशन के डेमो प्लॉट, वहाँ के कृषि वैज्ञानिकों और एग्रोनॉमिस्ट्स से हुई विस्तृत चर्चा के बाद मेरा आत्मविश्वास और मजबूत हो गया. मैंने तय कर लिया था कि यदि खेती में बदलाव लाना है, तो जोखिम उठाना ही होगा. इसी दृढ़ विश्वास के साथ मैंने अनार की खेती की शुरुआत की और यह निर्णय आगे चलकर मेरे जीवन का सबसे महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ.

40 एकड़ खेत में जैन की ड्रिप सिंचाई प्रणाली

मैंने 21 फरवरी 2020 को अपने 10 एकड़ खेत में जैन टिश्यू कल्चर के भगवा अनार के 3,500 पौधे 13×9 फीट के अंतर पर लगाए. तथा 6,500 गूटी पौधे लगाए. वैज्ञानिक खेती और सटीक जल प्रबंधन इसलिए प्रत्येक पौधे को 6 ड्रिपर लगाए गए तथा हर कतार में दो लेटरल पाइप बिछाए गए. ड्रिपर का डिस्चार्ज 4 लीटर प्रति घंटा (LPH) रखा गया था. इसके साथ ही जैन की फर्टिगेशन प्रणाली इंस्टॉलेशन की और पौधों को आवश्यकता अनुसार पानी और पोषक तत्व उपलब्ध कराए गए. आज मेरे पूरे 40 एकड़ खेत में जैन की ड्रिप सिंचाई प्रणाली स्थापित है.  मैं पूरे विश्वास और गर्व के साथ कह सकता हूँ कि हमारे खेत में शत-प्रतिशत जैन ड्रिप का उपयोग होता है. इसकी शुरुआती लागत भले ही कुछ अधिक हो, लेकिन एक बार लगाने के बाद इसका रखरखाव खर्च लगभग नगण्य होता है. पाइप और अन्य घटकों की गुणवत्ता अत्यंत उत्कृष्ट है.  इनके वॉल और फिटिंग जल्द खराब नहीं होते तथा पाइप इतने मजबूत हैं कि वर्षों तक बिना किसी परेशानी के कार्य करते हैं. दूसरी कंपनियों की ड्रिप प्रणाली कम कीमत में उपलब्ध हो सकती है, लेकिन बार-बार मरम्मत और रखरखाव का खर्च अंततः अधिक पड़ता है.

प्रति पौधा 40 किलोग्राम फल से बढ़ी आय

पौधे लगाने के कुछ ही महीनों बाद मुझे गूटी पौधों और जैन टिश्यू कल्चर भगवा पौधों के बीच स्पष्ट अंतर दिखाई देने लगा. जैन टिश्यू कल्चर के पौधे अधिक स्वस्थ, हरे-भरे और एकसमान वृद्धि वाले थे. उनकी बढ़वार तेज थी और पौधों में बेहतर स्फूर्ति दिखाई देती थी. करीब ढाई वर्ष बाद, जुलाई 2022 में भगवा अनार के पौधों पर पहला बहार (फलधारण) शुरू हुआ. जुलाई से दिसंबर 2022 के दौरान मुझे लगभग 30,000 किलोग्राम अनार का उत्पादन प्राप्त हुआ. औसतन प्रत्येक पौधे से लगभग 8.5 किलोग्राम फल मिला. इस उत्पादन से मुझे लगभग 28 लाख रुपये की आय प्राप्त हुई, जबकि कुल खर्च 17.5 लाख रुपये रहा.

वर्ष 2023 में दूसरे बहार के दौरान उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि हुई और मुझे लगभग 90 टन अनार का उत्पादन प्राप्त हुआ. औसतन प्रत्येक पौधे से लगभग 25.7 किलोग्राम फल मिला. इस सीजन में मेरी कुल आय 75 लाख रुपये रही, जबकि खर्च 20 लाख रुपये के आसपास रहा.  इसके बाद तीसरे बहार में उत्पादन और गुणवत्ता दोनों ने नए रिकॉर्ड स्थापित किए. बेहतर प्रबंधन, स्वस्थ पौधों और वैज्ञानिक खेती के परिणामस्वरूप मुझे अनार की फसल से लगभग 1 करोड़ 68 लाख रुपये की आय प्राप्त हुई. इस दौरान भी मेरा कुल खर्च लगभग 20 लाख रुपये ही रहा. इस समय औसतन प्रत्येक पौधे से लगभग 40 किलोग्राम फल मिला. कभी सालभर की मेहनत के बाद जहां मात्र 50 हजार से 1.5 लाख रुपये की आय होती थी, वहीं आज एक एकड़ अनार की खेती से 14.8 लाख रुपये का शुद्ध लाभ मिल रहा है. आज मेरे परिवार के लिए अनार खेती समृद्धि और आत्मविश्वास का आधार बन चुकी है.

पाँच साल बाद भी पौधे हरे-भरे

पहले बहार की सफलता के बाद मेरा आत्मविश्वास और बढ़ गया. जैन टिश्यू कल्चर के भगवा अनार पौधों का उत्कृष्ट प्रदर्शन देखकर मैंने वर्ष 2021 और 2022 में भी जैन टिश्यू कल्चर अनार का क्षेत्रफल बढ़ाया और अतिरिक्त पौधरोपण किया. आज मेरे खेत में 5 से 6 वर्ष पुराने अनार के पौधे पूरी तरह स्वस्थ, हरे-भरे हैं. हमारे पूरे क्षेत्र में मेरी खेती इतने  सशक्त और स्वस्थ अनार के बगीचे नही है. पौधों को रोगों से सुरक्षित रखने के लिए मैंने शुरू से ही नीम आधारित उत्पादों और नीम खली (निमफली) का नियमित उपयोग किया. इससे पौधों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ी और रासायनिक दवाओं पर निर्भरता भी कम हुई. मेरा मानना है कि स्वस्थ पौधे ही बेहतर उत्पादन की नींव होते हैं. हालांकि खेती में चुनौतियां कभी समाप्त नहीं होती. रोगों और कीटों के साथ-साथ मौसम की मार का भी सामना करना पड़ता है. पिछले वर्ष क्षेत्र में सामान्य से अधिक वर्षा हुई, जिससे बगीचों में जलभराव और रोगों का खतरा बढ़ गया था. लेकिन ड्रिप सिंचाई प्रणाली और जल प्रबंधन और निचरेवाली रेतीली जमीन के कारण हमने स्थिति को प्रभावी ढंग से नियंत्रित किया. वर्षा के दौरान सिंचाई को आवश्यकता अनुसार कम किया और खेत में अतिरिक्त नमी का प्रबंधन किया, जिससे पौधों पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ा.

175 रुपये प्रति किलोग्राम के दाम

मेरे बगीचे में उत्पादित अनार की गुणवत्ता शुरू से ही उत्कृष्ट रही है. फल का रंग, आकार, चमक, फल का वजन और आंतरिक गुणवत्ता इतनी बेहतर थी कि मेरे अनार को निर्यात (एक्सपोर्ट) के लिए चयनित किया गया. उस समय जब स्थानीय बाजार में अनार का भाव लगभग 100 रुपये प्रति किलोग्राम था, तब मेरे बगीचे का एक्सपोर्ट क्वालिटी वाला माल 175 रुपये प्रति किलोग्राम के दाम से बिका. सबसे खास बात यह रही कि जो फल एक्सपोर्ट के लिए चयनित नहीं हुए, यानी रिजेक्ट माल भी मुझे स्थानीय बाजार में 100 रुपये प्रति किलोग्राम के अच्छे भाव से बिक गया. यह मेरे लिए केवल आर्थिक सफलता नहीं थी, बल्कि इस बात का प्रमाण भी था कि यदि किसान गुणवत्तापूर्ण उत्पादन पर ध्यान दे, तो उसे बाजार में बेहतर मूल्य अवश्य प्राप्त होता है.

अनार की खेती से बदली परिवार की तकदीर

अनार की खेती से प्राप्त आय ने मेरे जीवन और परिवार की तस्वीर पूरी तरह बदल दी. मैंने खेती में लगातार निवेश किया, ड्रिप इरिगेशन, टिश्यू कल्चर और फर्टिगेशन को अपनाया और अपने बगीचे का विस्तार किया. आधुनिक कृषि पद्धतियों और वैज्ञानिक प्रबंधन के कारण खेती एक पारंपरिक व्यवसाय से आगे बढ़कर एक लाभदायक उद्यम बन गई. आज मुझे सबसे अधिक संतोष इस बात का है कि खेती से मिली सफलता ने मेरे बच्चों के लिए बेहतर भविष्य के द्वार खोले हैं. मेरे बच्चे जहाँ पहले सीमित अवसरों तक ही पहुँच पाते थे, गाव में पढते थे वहीं आज मैं अपने बच्चों को उच्च शिक्षा के लिए जोधपुर और दिल्ली जैसे शहरों में पढ़ा रहा हूँ. यह मेरे लिए किसी भी आर्थिक उपलब्धि से बड़ी खुशी है. खेती से प्राप्त आर्थिक लाभ के बल पर मैंने अपने परिवार के लिए एक बेहतर और आधुनिक घर का निर्माण किया है. खेती से प्राप्त आय के बल पर मैंने लगभग 100 बीघा अतिरिक्त कृषि भूमि खरीदी, जिससे मेरे कृषि व्यवसाय का और विस्तार हुआ. कभी सीमित आय और अनिश्चितता से जूझने वाला मेरा परिवार आज आत्मविश्वास, आर्थिक स्थिरता और नए सपनों के साथ आगे बढ़ रहा है.

गुणवत्तापूर्ण पौधों का चयन

आज मैं अनार की खेती करने वाले किसानों से अपने अनुभव के आधार पर एक बात जरूर कहना चाहूँगा. यदि कम लागत में अधिक और गुणवत्तापूर्ण उत्पादन प्राप्त करना है, तो शुरुआत जैन टिश्यू कल्चर अनार पौधों से करें. कम कीमत वाली गुटी खरीदकर अनार की खेती का भविष्य नहीं बनाया जा सकता. अधिकांश बीमारियां गुटी के माध्यम से ही आती हैं. अनार की खेती की सफलता की नींव पौधों पर ही निर्भर करती है और जैन टिश्यू कल्चर अनार के पौधे तेल्या बीमारी, विल्ट (मर रोग) और नेमाटोड जैसे कीटों एवं बीमारियों से मुक्त होते हैं. यही कारण है कि मेरी फसल बेहद अच्छी है. कई किसान पैसे बचाने के चक्कर में अपनी फसल गंवा देते हैं. शुरुआत में बचाए गए पैसे आगे चलकर बड़े नुकसान का कारण बनते हैं. गुटी के पौधे शुरुआत में भले ही अच्छे दिखें, लेकिन उनकी वृद्धि, उत्पादन क्षमता, फल का आकार, फल की गुणवत्ता और फल की चमक टिश्यू कल्चर अनार के पौधों जैसी नहीं हो सकती. यदि किसान शुरुआत में ही प्रमाणित और गुणवत्तापूर्ण टिश्यू कल्चर पौध सामग्री का चयन करे, तो उसे वर्षों तक उसका लाभ मिलता है.

मैं यह भी मानता हूँ कि खेती में सफलता केवल अच्छी किस्म या पौध सामग्री से नहीं मिलती, बल्कि नई तकनीकों को अपनाने, पौधों की ट्रेनिंग, प्रूनिंग, जल व्यवस्थापन, बदलते वातावरण के अनुसार पौधों को क्रॉप कूलिंग एवं क्रॉप कवर लगाना, कीट एवं बीमारियों का प्रबंधन करना, फलों को धूप से बचाने के लिए फ्रूट कवर लगाना, पौधों की अवस्था के अनुसार फर्टिगेशन करना और निरंतर नई सोच के साथ खेती में कार्य करना इन्हीं सब बातों से अनार की खेती में सफलता मिल सकती है. मैंने हर चरण में नई जानकारी प्राप्त करने का प्रयास किया, विशेषज्ञों की सलाह मानी और आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाया. यही सोच मेरी सफलता की सबसे बड़ी ताकत बनी. यदि किसान बदलाव को स्वीकार करने का साहस करे, नई तकनीकों पर विश्वास रखे और गुणवत्तापूर्ण कृषि आदानों का चयन करे, तो खेती में असीम संभावनाएँ हैं. मेरी सफलता की यह कहानी उसी विश्वास का परिणाम है.

भगवा अनार के पौधों ने दी खेती को नई दिशा

मेरे व्यक्तिगत अनुभव के आधार पर मैं पूरे विश्वास के साथ कह सकता हूँ कि जैन इरिगेशन के टिश्यू कल्चर भगवा अनार पौधों ने मेरी खेती को नई दिशा दी है. इन पौधों की एकरूपता, स्वस्थ वृद्धि, बेहतर उत्पादन क्षमता और गुणवत्ता ने मुझे अपेक्षा से कहीं अधिक परिणाम दिए हैं. यही कारण है कि आज भी मैं जैन के पौधों और तकनीकों पर पूरा भरोसा करता हूँ. इस पूरे सफर में जैन इरिगेशन की टीम का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण रहा है. पौधों के चयन से लेकर बगीचे की स्थापना, ड्रिप सिंचाई, फर्टिगेशन, वैज्ञानिक खेती की तकनीकों, समय-समय पर तकनीकी मार्गदर्शन तथा फर्जी सलाहकारों (कन्सलटेंट) से बचाव तक हर चरण पर जैन के एग्रोनॉमिस्टों ने मेरा मार्गदर्शन किया और पूरा सहयोग दिया. यही कारण है कि आज मैं जिस मुकाम पर खड़ा हूँ, उसमें मेरी मेहनत के साथ-साथ जैन इरिगेशन की तकनीक, गुणवत्ता और समर्पित टीम का भी महत्वपूर्ण योगदान है.

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