टीकमगढ़ कलेक्टर ने क्षेत्र के प्रगतिशील कृषकों के खेतों का किया निरीक्षण
15 अप्रैल 2026, टीकमगढ़: टीकमगढ़ कलेक्टर ने क्षेत्र के प्रगतिशील कृषकों के खेतों का किया निरीक्षण – कलेक्टर श्री विवेक श्रोत्रिय द्वारा आज क्षेत्र के प्रगतिशील कृषकों के खेतों का निरीक्षण किया गया। इस दौरान उन्होंने प्रगतिशील कृषक श्री राधे कुशवाहा द्वारा ड्रिप एवं मलचिंग प्रणाली , श्री प्रागीलाल अहिरवार एवं उनके पुत्र द्वारा फूलों एवं सब्जियों की खेती एवं श्रीमती वंदना अग्रवाल के परिवार से शेड नेट हाउस प्रणाली का उपयोग कर उगाई जा रही विभिन्न उद्यानिकी फसलों का अवलोकन किया और उनसे खेती की आधुनिक तकनीकों एवं उत्पादन संबंधी जानकारी ली।कलेक्टर ने किसानों से संवाद करते हुए उन्नत खेती अपनाने, फसल विविधीकरण एवं नवीन तकनीकों के उपयोग पर बल दिया।
जिले के ग्राम परा में प्रगतिशील किसान श्री राधे कुशवाहा ड्रिप एवं मलचिंग प्रणाली द्वारा आधुनिक तकनीकों को अपनाने से खेती की दिशा और दशा तेजी से बदल रही है। ड्रिप सिंचाई एवं मल्चिंग प्रणाली ने उनकी आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। कम पानी में अधिक उत्पादन देने वाली इन तकनीकों से न केवल जल संरक्षण हो रहा है, बल्कि फसलों की गुणवत्ता और उत्पादन में भी उल्लेखनीय वृद्धि देखी जा रही है।ड्रिप सिंचाई प्रणाली के माध्यम से फसलों को बूंद-बूंद पानी सीधे जड़ों तक पहुंचाया जाता है, जिससे पानी की बचत के साथ-साथ खरपतवार की समस्या भी कम होती है। वहीं मल्चिंग तकनीक में प्लास्टिक शीट बिछाकर मिट्टी की नमी को बनाए रखा जाता है, जिससे फसलें अधिक स्वस्थ और उत्पादक बनती हैं।
देश में किसानों की आय बढ़ाने एवं जल संरक्षण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से केंद्र सरकार द्वारा संचालित प्रधान मंत्री कृषि सिंचाई योजना (पीएमकेएसवाई) के अंतर्गत ड्रिप सिंचाई प्रणाली को तेजी से प्रोत्साहित किया जा रहा है। इस योजना के माध्यम से किसानों को आधुनिक सूक्ष्म सिंचाई तकनीक अपनाने हेतु प्रोत्साहित किया जा रहा है, जिससे कम पानी में अधिक उत्पादन संभव हो रहा है। योजना के तहत किसानों को ड्रिप एवं स्प्रिंकलर जैसी आधुनिक सिंचाई प्रणालियों पर 45ः से लेकर 90ः तक अनुदान दिया जा रहा है, जिससे छोटे एवं सीमांत किसान भी आसानी से इन तकनीकों को अपना पा रहे है।
ड्रिप सिंचाई प्रणाली के उपयोग से पानी की 30 से 60 प्रतिशत तक बचत संभव हो रही है, वहीं फसलों की उत्पादकता में भी उल्लेखनीय वृद्धि देखी जा रही है। इससे किसानों की लागत घटने के साथ-साथ आय में वृद्धि हो रही है। योजना का मुख्य उद्देश्य “प्रति बूंद अधिक फसल” के सिद्धांत को बढ़ावा देना है, जिसके तहत खेतों तक पानी की पहुंच सुनिश्चित करने के साथ जल उपयोग दक्षता में सुधार किया जा रहा है।किसानों द्वारा ड्रिप सिंचाई अपनाने से बिजली एवं पानी की खपत कम हो रही है और खेती अधिक लाभकारी बन रही है। सरकार द्वारा दी जा रही सब्सिडी राशि सीधे किसानों के बैंक खाते में डीबीटी के माध्यम से भेजी जाती है, जिससे पारदर्शिता भी सुनिश्चित हो रही है।सरकार द्वारा इस योजना को वर्ष 2026 तक विस्तारित किया गया है, जिससे देश के अधिक से अधिक किसानों को आधुनिक सिंचाई सुविधाओं का लाभ मिल सकेगा और कृषि क्षेत्र में सतत विकास को गति मिलेगी।
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