राज्य कृषि समाचार (State News)

इंदौर जिले में फसल अवशेष (नरवाई) जलाने पर प्रतिबंध

नरवाई जलाने पर लगेगा 15 हजार तक का जुर्माना

03 अप्रैल 2026, इंदौरइंदौर जिले में फसल अवशेष (नरवाई) जलाने पर प्रतिबंध – फसल अवशेष (नरवाई) जलाने पर प्रतिबंध लगाया गया है। प्रतिबंध का उल्लंघन करने वालों के विरूद्ध कार्रवाई की जाएगी। नरवाई जलाते पाये जाने पर 15 हजार रुपये तक का अर्थदंड लगाया जाएगा। नरवाई प्रबंधन के बारे में जनजागरण के लिए गाँव-गाँव तक रथ पहुँचेगा। इस रथ को अपर कलेक्टर श्री नवजीवन विजय पवार ने झण्डी दिखाकर रवाना किया। कलेक्टर श्री शिवम वर्मा ने निर्देश दिए कि प्रतिबंधात्मक आदेश का सख्ती से पालन सुनिश्चित कराया जाए। किसानों को नरवाई प्रबंधन के तौर-तरीके बताये जाए तथा उन्हें जागरूक करते हुए वैकल्पिक व्यवस्था मुहैया  कराएं ।

निर्देशानुसार 02 अप्रैल से 16 अप्रैल 2026 तक प्रत्येक ग्राम पंचायत मुख्यालय पर कृषि से संबंधित मैदानी अधिकारियों एवं राजस्व विभाग के पटवारी/पंचायत विभाग के पंचायत सचिव के साथ समन्वय कर कृषक संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया जायेगा तथा किसानों को नरवाई जलाने से होने वाले नुकसानों से किसानों को अवगत कराया जायेगा तथा फसल अवशेष (नरवाई) प्रबंधन की तकनीकी जानकारी से अवगत कराया जायेगा।

उप संचालक कृषि श्री सी.एल. केवड़ा ने बताया कि वर्तमान में जिले में गेहूं फसल की कटाई का कार्य लगभग प्रारंभ हो चुका है। गेहूं फसल की कटाई के पश्चात सामान्य तौर पर किसान नरवाई में आग लगा देते है, जिससे पर्यावरण में प्रदूषण के साथ-साथ मिट्टी की संरचना भी प्रभावित होती है। जिले में गेहूं की कटाई के बाद बचे हुए फसल अवशेष (नरवाई) जलाना खेती के लिये आत्मघाती कदम है।

अपर कलेक्टर श्री नवजीवन विजय पवार द्वारा किसानों से अपील की गई है कि नरवाई न जलाऐं, नरवाई जलाने से पर्यावरण को नुकसान होता है। किसान यदि नरवाई जलाते है तो राज्य शासन के नोटिफिकेशन प्रावधान अनुसार पर्यावरण विभाग द्वारा उक्त अधिसूचना अंतर्गत नरवाई में आग लगाने के विरूद्ध पर्यावरण क्षतिपूर्ति राशि दण्ड का प्रावधान किया गया है। आदेश के अनुसार यदि कोई व्यक्ति/निकाय/कृषक जिसके पास 2 एकड़ तक की भूमि है तो उसकों नरवाई  जलाने पर पर्यावरण क्षति के रूप में 2500 रुपये प्रति घटना के मान से आर्थिक दण्ड अधिरोपित किया जाएगा। जिसके पास 2 से 5 एकड़ तक की भूमि है तो उसकों नरवाई जलाने पर पर्यावरण क्षति के रूप में 5 हजार रुपये प्रति घटना के मान से आर्थिक दण्ड भरना होगा। 5 एकड़ से अधिक भूमि है तो उसकों नरवाई जलाने पर पर्यावरण क्षति के रूप में 15 हजार रुपये प्रति घटना के मान से आर्थिक दण्ड का प्रावधान होगा।

खेत में गेहूं एवं अन्य फसलों के अवशेषों (नरवाई) को जलाने से जमीन में उपस्थित लाभदायक सूक्ष्म जीवाणु, केंचुए नष्ट हो जाते है, जिससे जमीन की उर्वरा शक्ति कम होती है। भूमि कठोर हो जाती है, जिसके कारण भूमि की जल धारण क्षमता कम हो जाती है। नरवाई में आग लगाने से आस-पास की खड़ी फसलों में आग लगने से एवं जन/धन हानि की आशंका रहती है। पर्यावरण प्रदूषित हो जाता है। वातावरण के तापमान में वृद्धि होती है, जिससे धरती गर्म होती है।

नरवाई प्रबंधन के बारे में बताया गया कि स्ट्रॉ रीपर (भूसा मशीन) से भूसा बनाया जा सकता है। वेलर मशीन द्वारा बेल बनाकर कागज उद्योग, बायोमास, डेयरी में भूसा की पूर्ति की जा सकती है। मल्चर मशीन द्वारा फसल अवशेषों को बारीक काट कर खेत में जैविक खाद के रूप में उपयोग किया जा सकता है। कम्बाईन हार्वेस्टर के साथ स्ट्रॉ मैनेजमेंट सिस्टम वाले हार्वेस्टर का प्रयोग करें। खेत में कल्टीवेटर, रोटावेटर या डिस्क हेरो आदि की सहायता से फसल अवशेषों को भूमि में मिलाने से आने वाली फसलों में जीवांश खाद की बचत की जा सकती है। पशुओं के लिए भूसा और खेत के लिए बहुमूल्य पोषक तत्वों की उपलब्धता बढ़ाने के साथ मिट्टी की संरचना को बिगड़ने से बचाया जा सकता है। नरवाई में आग लगाने पर पुलिस द्वारा प्रकरण भी कायम किया जा सकता है।

जिला प्रशासन, किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग, कृषि अभियांत्रिकी विभाग संयुक्त रूप से जिले के किसानों से आग्रह किया है कि फसल कटाई के पश्चात फसल अवशेष (नरवाई) में आग नहीं लगाये, नरवाई का उचित प्रबंधन कर भूमि, वातावरण को नुकसान न पहुंचाते हुए पशुओं के लिये भूसा, जैविक खाद तैयार करें, जिससे फसल उत्पादन के अतिरिक्त भी आय प्राप्त की जा सकती है।

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