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राज्य कृषि समाचार (State News)

मध्य प्रदेश में तापमान सामान्य से ऊपर, नर्मदापुरम में 38.8°C के तक पहुंचा टेंप्रेचर, देखिए अन्य जिलों का हाल

26 मार्च 2026, भोपाल: मध्य प्रदेश में तापमान सामान्य से ऊपर, नर्मदापुरम में 38.8°C के तक पहुंचा टेंप्रेचर, देखिए अन्य जिलों का हाल – IMD भोपाल के अनुसार, 26 मार्च 2026 को मध्य प्रदेश के सभी संभागों में मौसम शुष्क और स्थिर रहा। पिछले 24 घंटों में अधिकतम और न्यूनतम तापमान में कोई विशेष परिवर्तन नहीं देखा गया। केवल  नर्मदापुरम  और चंबल संभाग के जिलों में न्यूनतम तापमान सामान्य से 2.2 डिग्री सेल्सियस अधिक रहा, जबकि अन्य जिलों में तापमान सामान्य स्तर पर बना रहा।

प्रदेश में सर्वाधिक अधिकतम तापमान  नर्मदापुरम   में 38.8°C दर्ज किया गया, जबकि सबसे कम न्यूनतम तापमान पचमढ़ी में 14.4°C रहा। यह स्थिति प्रदेश में गर्म और शुष्क मौसम की लगातार प्रवृत्ति को दर्शाती है।

सबसे अधिकतम तापमान वाले जिले

प्रदेश में सबसे अधिक अधिकतम तापमान वाले जिले इस प्रकार हैं: नर्मदापुरम में 38.8°C, रतलाम में 38.6°C, खंडवा में 38.5°C, रायसेन/खरगोन में 38.0°C और भैंदा (सीहोर) में 37.6°C। इन जिलों में धूप तेज और तापमान सामान्य से अधिक रहा।

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सबसे कम न्यूनतम तापमान वाले जिले

सबसे ठंडे जिले पचमढ़ी (नमदीपुरम) में 14.4°C, करौंदी (कटनी) में 14.8°C, कांकेरपुर (शहडोल) में 15.2°C, रीवा में 16.0°C और राजगढ़/दितया में 16.4°C रहे। इन क्षेत्रों में रात का तापमान सामान्य से कम रहा और फसल संरक्षण के लिए सतर्क रहने की आवश्यकता है।

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मौसम परिस्थितियां

प्रदेश में पश्चिमी विक्षोभ और मध्य-पश्चिमी जेट स्ट्रीम के प्रभाव से 5.8 किमी ऊंचाई पर स्थित वायुमंडलीय स्थितियां सामान्य रहीं। दक्षिण-पूर्वी राजस्थान और उससे सटे क्षेत्रों में 1.5 किमी ऊँचाई पर ऊपरी वायु चक्रवात सक्रिय है। वहीं ऊपरी-पश्चिमी भारत में समुद्र तल से 12.6 किमी ऊँचाई पर लगभग 185 किमी/घंटा की गति से पश्चिमी जेट स्ट्रीम हवाएँ बह रही हैं। IMD के अनुसार, 28 मार्च की रात से पश्चिमी विक्षोभ उत्तर-पश्चिमी भारत को प्रभावित कर सकता है।

कृषकों के लिए मौसम सलाह

– गेहूँ की फसल में दाना भरने के समय समय पर सिंचाई करके मिट्टी में नमी बनाए रखें।
– फसलों की नियमित निगरानी करें और कीट या रोग दिखाई देने पर नियंत्रण उपाय अपनाएं।
– पक चुकी सरसों और अन्य रबी फसलों की समय पर कटाई करें ताकि दाने झड़ने से नुकसान न हो।
– जहां सिंचाई सुविधा उपलब्ध हो, वहां मूंग और उड़द जैसी फसलें बोई जा सकती हैं।
– टमाटर, मिर्च और बैंगन जैसी सब्जियों में नियमित सिंचाई और पोषक तत्वों का संतुलन बनाए रखें।
– रस चूसने वाले कीट और फल छेदक कीटों की निगरानी करें तथा अनुशंसित पौध संरक्षण उपाय अपनाएं।
– बागों में फूल आने और शुरुआती फल बनने के समय उचित सिंचाई और पोषण बनाए रखें।

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