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राज्य कृषि समाचार (State News)

नागालैंड की वेसालु पूरो ने फूलों की खेती से बनाई नई पहचान, मन की बात में हुआ जिक्र

04 अक्टूबर 2026, फेक (नागालैंड): नागालैंड की वेसालु पूरो ने फूलों की खेती से बनाई नई पहचान, मन की बात में हुआ जिक्र – नागालैंड के फेक जिले के फुत्सेरो गांव की वेसालु पूरो ने समाज कार्य में मास्टर डिग्री हासिल करने के बाद फूलों की खेती को अपना पेशा बनाया। आज वे अपने खेत से उगाए फूल दिल्ली और मुंबई तक भेज रही हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मन की बात कार्यक्रम के 137वें संस्करण में उनकी इस यात्रा का जिक्र किया।

वेसालु एक किसान परिवार में बड़ी हुईं और बचपन से ही अपने माता-पिता को खेतों में काम करते देखती रही हैं। इसी दौरान उनके मन में फूलों की खेती के प्रति रुचि पैदा हुई।

2021 में शुरू हुई छोटी शुरुआत

वेसालु ने 2021 में अपनी जमीन के एक चौथाई एकड़ हिस्से पर ग्लेडियोलस फूल की खेती से शुरुआत की। पहले ही प्रयास में उन्हें पांच हजार से ज्यादा फूल मिले, जिससे उनका हौसला बढ़ा।

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शुरुआत में वेसालु अपने फूल नागालैंड के स्थानीय बाजारों में ही बेचती थीं। शादी-ब्याह और त्योहारी मौकों पर फूलों की अच्छी मांग को देखते हुए उन्होंने इसे व्यावसायिक रूप से आगे बढ़ाने का फैसला किया।

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कृषि विज्ञान केंद्र फेक का मिला साथ

वेसालु की इस यात्रा में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके), फेक का अहम योगदान रहा। केवीके ने उन्हें वैज्ञानिक तरीके से फूलों की खेती, कटाई और कटाई के बाद प्रबंधन का प्रशिक्षण दिया।

केवीके ने वेसालु को अर्का अमर किस्म के छह हजार ग्लेडियोलस कंद भी उपलब्ध कराए। इसके साथ ही केवीके के वैज्ञानिकों ने समय-समय पर उनके खेत का दौरा कर तकनीकी मार्गदर्शन दिया।

आज वेसालु ग्लेडियोलस के साथ-साथ हाइड्रेंजिया फूलों की भी खेती करती हैं और आगे हाइड्रोपोनिक्स तकनीक अपनाने की तैयारी में हैं। उनके फूल अब नागालैंड के स्थानीय बाजारों के अलावा दिल्ली और मुंबई की मंडियों तक पहुंच रहे हैं।

वेसालु ने मन की बात में अपना जिक्र होने पर कहा कि प्रधानमंत्री द्वारा उनकी यात्रा का उल्लेख किया जाना उनके लिए बड़े सम्मान और खुशी की बात है, और यह पल वे हमेशा याद रखेंगी।

पहाड़ी राज्य में फूलों की खेती की नई संभावना

नागालैंड जैसे पहाड़ी राज्य में ठंडी जलवायु और साफ पानी की उपलब्धता फूलों की खेती के लिए अनुकूल मानी जाती है। इसके बावजूद यहां अब तक ज्यादातर किसान परंपरागत खेती पर ही निर्भर रहे हैं। वेसालु की सफलता ने इलाके के कई युवाओं और महिलाओं को फूलों की खेती की तरफ देखने के लिए प्रेरित किया है।

देश में शादी-विवाह, धार्मिक आयोजनों और त्योहारों के मौके पर कटे हुए फूलों की मांग लगातार बढ़ रही है, और दिल्ली-मुंबई जैसे बड़े शहरों के फूल बाजारों में उत्तर-पूर्व के राज्यों से आने वाले फूलों को अच्छी कीमत मिल रही है। वेसालु ने इसी मांग को पहचान कर अपनी खेती को छोटे स्तर से व्यावसायिक रूप में बदला।

शिक्षा छोड़कर नहीं अपनाई, बल्कि साथ जोड़ी खेती

खास बात यह है कि वेसालु ने सामाजिक कार्य में मास्टर डिग्री हासिल करने के बावजूद खेती से मुंह नहीं मोड़ा, बल्कि अपनी पढ़ाई और परिवार के खेती के अनुभव दोनों का इस्तेमाल कर एक व्यवस्थित कारोबार खड़ा किया। कृषि विज्ञान केंद्र फेक के वैज्ञानिकों का कहना है कि वेसालु जैसे पढ़े-लिखे युवा जब खेती में वैज्ञानिक तरीके अपनाते हैं, तो आसपास के किसानों के लिए भी वे एक मॉडल बन जाते हैं।

केवीके अब इलाके के अन्य किसानों को भी गुणवत्तापूर्ण फूलों की खेती के लिए प्रोत्साहित कर रहा है, ताकि फेक जिला आगे चलकर पूर्वोत्तर भारत के फूल उत्पादन के एक प्रमुख केंद्र के रूप में अपनी पहचान बना सके।

वेसालु की योजना है कि आने वाले समय में वे अपने खेत का दायरा बढ़ाएं और हाइड्रोपोनिक्स तकनीक के जरिए पूरे साल फूलों की सप्लाई बनाए रख सकें, जिससे मौसम के उतार-चढ़ाव का उनकी कमाई पर कम असर पड़े। वे चाहती हैं कि आसपास के और परिवार भी इस कारोबार से जुड़ें, ताकि पूरे इलाके में फूलों की खेती से रोजगार के नए मौके बन सकें।

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