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राज्य कृषि समाचार (State News)

यूपी में गन्ना सर्वेक्षण नीति लागू: 1 मई से किसानों की फसल का होगा GPS सर्वे, SMS से मिलेगी पूरी जानकारी  

25 अप्रैल 2026, भोपाल: यूपी में गन्ना सर्वेक्षण नीति लागू: 1 मई से किसानों की फसल का होगा GPS सर्वे, SMS से मिलेगी पूरी जानकारी – उत्तर प्रदेश सरकार ने गन्ना किसानों के लिए एक नई और आधुनिक व्यवस्था लागू करते हुए गन्ना सर्वेक्षण नीति जारी कर दी है। इसके तहत अब राज्य में गन्ने की फसल का सर्वे GPS तकनीक के माध्यम से किया जाएगा। यह सर्वेक्षण 1 मई 2026 से शुरू होकर 30 जून 2026 तक पूरा किया जाएगा। गन्ना विकास एवं चीनी उद्योग विभाग की आयुक्त वीना कुमारी मीना ने इसकी जानकारी दी।

आयुक्त के अनुसार सर्वेक्षण कार्य के दौरान गन्ना सर्वेक्षण टीम में एक राजकीय गन्ना पर्यवेक्षक और एक चीनी मिल कर्मचारी शामिल होंगे। इन सभी को सर्वेक्षण से पहले विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा ताकि कार्य को पारदर्शी और सटीक तरीके से पूरा किया जा सके। सर्वेक्षण की जानकारी सभी पंजीकृत किसानों को 3 दिन पहले मोबाइल एसएमएस के माध्यम से दी जाएगी। खेत पर किसान की उपस्थिति अनिवार्य होगी, ताकि किसी भी प्रकार की त्रुटि की संभावना न रहे।

GPS तकनीक से सीधे सर्वर पर होगा डेटा फीड

सर्वेक्षण के दौरान टीम किसानों के खेतों में पहुंचकर GPS के माध्यम से गन्ने की फसल का पूरा डेटा रिकॉर्ड करेगी, जिसे सीधे विभागीय सर्वर पर फीड किया जाएगा। इसके बाद खेत का क्षेत्रफल, गन्ने की किस्म और अन्य महत्वपूर्ण विवरण किसानों को SMS के जरिए भी भेजे जाएंगे। इससे प्रक्रिया में पारदर्शिता और सटीकता सुनिश्चित होगी।

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ऑनलाइन सत्यापन और पारदर्शी व्यवस्था

सरकार ने यह भी व्यवस्था की है कि गन्ना किसानों की भूमि का सत्यापन राजस्व विभाग की वेबसाइट www.upbhulekh.gov.in पर ऑनलाइन किया जा सकेगा। चीनी मिलें सर्वेक्षण के अंतिम आंकड़ों को विभागीय वेबसाइट पर ऑनलाइन पोर्ट करेंगी और अपने स्तर पर भी प्रदर्शित करेंगी, जिससे पूरी प्रक्रिया पारदर्शी बनी रहेगी।

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नए किसानों का पंजीकरण भी शामिल

इस सर्वेक्षण के दौरान नए गन्ना किसानों का पंजीकरण भी किया जाएगा। अधिकारियों के अनुसार 30 सितंबर 2026 तक पंजीकृत किसानों को ही गन्ना आपूर्ति का लाभ मिलेगा। उपज वृद्धि के लिए सर्वेक्षण से लेकर 30 सितंबर तक आवेदन स्वीकार किए जाएंगे। इसके लिए अलग-अलग श्रेणी के किसानों से नाममात्र शुल्क भी निर्धारित किया गया है, जिसमें अनुसूचित जाति व जनजाति के किसानों से 10 रुपये, लघु किसानों से 100 रुपये और अन्य किसानों से 200 रुपये प्रति आवेदन शुल्क लिया जाएगा।

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