राज्य कृषि समाचार (State News)किसानों की सफलता की कहानी (Farmer Success Story)

किसान गुलाब सिंह की कहानी: खेत में पसीना, खाते में खुशी

09 दिसंबर 2024, रायपुर: किसान गुलाब सिंह की कहानी: खेत में पसीना, खाते में खुशी – खेतों में दिन-रात मेहनत करने वाले किसानों के लिए फसल की अच्छी उपज और सही मूल्य ही उनकी खुशहाली का आधार है। बारिश और फसल की उपज का संतुलन किसानों की मेहनत को सार्थक बनाता है। छत्तीसगढ़ के कई इलाकों में सिंचाई के साधन सीमित हैं, और यहां के किसानों की खेती काफी हद तक मौसम पर निर्भर करती है। ऐसे में फसल का सही मूल्य मिलना और उपज बेचने की सुविधाएं उनके लिए जीवन को थोड़ा आसान बना देती हैं।

कोरबा विकासखंड के सुदूरवर्ती गांव ठाड़पखना के 70 वर्षीय किसान गुलाब सिंह अपने अनुभव साझा करते हुए बताते हैं कि किसानों के लिए आसमान और सरकार दोनों पर निर्भरता जरूरी हो जाती है। इस साल अच्छी बारिश होने से उनकी धान की फसल ठीक हुई है। गुलाब सिंह बताते हैं कि खेती का काम मेहनत भरा है, और उन्हें हर साल नई उम्मीदों के साथ फसल तैयार करनी पड़ती है।

उन्होंने बताया कि धान की फसल को सुरक्षित बाजार में बेचकर जब खाते में राशि आती है, तो वह उनके परिवार की जरूरतें पूरी करने में मदद करती है। गुलाब सिंह इस बार भी अपनी फसल के अच्छे मूल्य मिलने की उम्मीद कर रहे हैं।

धान की मिंजाई और उपज का मूल्यांकन

गुलाब सिंह ने बताया कि पिछले साल उन्हें प्रति क्विंटल धान का मूल्य ₹3100 मिला था। इसके साथ ही उन्हें दो साल के बकाया बोनस की राशि भी प्राप्त हुई थी, जिससे उनका परिवार आर्थिक रूप से थोड़ा मजबूत हुआ। उनके पास 6-7 एकड़ जमीन है, जिस पर वे धान की खेती करते हैं।

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वे बताते हैं कि इस साल बारिश ने निराश नहीं किया और फसल बेहतर हुई। हालांकि, सिंचाई के साधनों की कमी के कारण पहाड़ी इलाकों के किसान मौसम पर पूरी तरह निर्भर रहते हैं। मिंजाई के बाद वे अपनी फसल को उपार्जन केंद्र में बेचने की तैयारी कर रहे हैं और इसके लिए उन्होंने पंजीयन भी करा लिया है।

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गुलाब सिंह ने बताया कि पहले धान बेचने में काफी परेशानी होती थी, लेकिन अब प्रक्रिया पहले की तुलना में सरल हो गई है। किसान उपार्जन केंद्रों पर अपनी उपज बेचकर सीधे भुगतान प्राप्त कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि धान का समर्थन मूल्य मिलने के साथ ही उन्हें अतिरिक्त राशि भी दी जाती है, जो उनकी जरूरतों को पूरा करने में सहायक है।

गुलाब सिंह ने कहा कि पहाड़ी इलाकों में सिंचाई के साधनों की कमी अब भी एक बड़ी समस्या है। हालांकि, बेहतर बारिश और फसल का अच्छा मूल्य मिलने से उनकी आर्थिक स्थिति में थोड़ी राहत आई है।

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