राज्य कृषि समाचार (State News)

स्लीमनाबाद टनल बनेगी विंध्य-बुंदेलखंड की अमृतधारा

नर्मदा का पानी पांच जिलों के खेतों तक पहुंचेगा, 1.85 लाख हेक्टेयर भूमि को मिलेगी सिंचाई सुविधा

20 जुलाई 2026, भोपाल: स्लीमनाबाद टनल बनेगी विंध्य-बुंदेलखंड की अमृतधारा – मध्य प्रदेश के विंध्य और बुंदेलखंड क्षेत्र के लिए वर्ष 2026 एक ऐतिहासिक सौगात लेकर आया है। कटनी जिले में निर्माणाधीन स्लीमनाबाद टनल परियोजना अब पूर्णता की ओर बढ़ रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने हाल ही में करीब 12 किलोमीटर लंबी इस अत्यंत चुनौतीपूर्ण टनल का जमीनी निरीक्षण किया।

निरीक्षण के बाद मुख्यमंत्री ने कहा कि विंध्य क्षेत्र प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध है, लेकिन पानी की कमी लंबे समय से विकास की बड़ी बाधा रही है। स्लीमनाबाद टनल के माध्यम से नर्मदा का पानी विंध्य क्षेत्र तक पहुंचेगा और कटनी, रीवा, सतना, मैहर तथा पन्ना जिले के किसानों के लिए यह परियोजना ‘अमृतधारा’ साबित होगी।

इस महत्वाकांक्षी परियोजना की सबसे बड़ी विशेषता इसकी जटिल इंजीनियरिंग है। टनल कई स्थानों पर जमीन से करीब 120 फीट नीचे बनाई गई है और नेशनल हाईवे, रेलवे लाइन तथा घनी आबादी के नीचे से सुरक्षित रूप से गुजरती है। इसके ऊपर कटनी नदी का प्राकृतिक प्रवाह भी जारी रहेगा। यानी जमीन के नीचे टनल से नर्मदा का पानी और उसके ऊपर कटनी नदी—यह इंजीनियरिंग का अनूठा उदाहरण है।

परियोजना के निर्माण में आधुनिक जर्मन तकनीक और टीबीएम मशीन का उपयोग किया गया है। इससे निर्माण कार्य के दौरान पर्यावरणीय क्षति को न्यूनतम रखा गया। लगभग 1600 करोड़ रुपये की इस परियोजना में केंद्र सरकार का भी करीब 275 करोड़ रुपये का सहयोग है।

सोन कछार से 152 क्यूबिक डिस्चार्ज के माध्यम से कुल 1 लाख 85 हजार हेक्टेयर कमांड एरिया में सिंचाई सुविधा उपलब्ध होगी। इसमें सतना जिले में 1,04,970 हेक्टेयर, मैहर में 54,227 हेक्टेयर, कटनी में 21,823 हेक्टेयर, रीवा में 3,532 हेक्टेयर और पन्ना में 448 हेक्टेयर भूमि को लाभ मिलेगा।

स्लीमनाबाद टनल केवल एक निर्माण परियोजना नहीं, बल्कि सूखे और जल संकट से जूझते क्षेत्रों के लिए विकास की नई धारा है। नर्मदा का पानी खेतों तक पहुंचने से कृषि उत्पादन बढ़ेगा, किसानों की आय मजबूत होगी और विंध्य क्षेत्र में आर्थिक गतिविधियों को नई गति मिलेगी। यह परियोजना सचमुच पानी के साथ विकास की भी अमृतधारा लेकर आएगी।

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