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राज्य कृषि समाचार (State News)

पशुओं के लिए वर्ष भर पौष्टिक चारे की उपलब्धता सुनिश्चित करने हेतु बनेंगे साइलेज

साइलेज निर्माण के लिये दी जाएगी आर्थिक मदद

06 नवंबर 2026, इंदौर: पशुओं के लिए वर्ष भर पौष्टिक चारे की उपलब्धता सुनिश्चित करने हेतु बनेंगे साइलेज – अल -नीनो एक जलवायु संबंधी घटना है, जिसके प्रभाव से मानसून की स्थिति प्रभावित होने तथा कुछ क्षेत्रों में सूखे एवं अत्यधिक गर्मी की परिस्थितियां निर्मित होने की आशंका रहती है। ऐसी परिस्थितियों में पशुओं के लिए हरे चारे की उपलब्धता में कमी की आशंका है। दुग्ध उत्पादन एवं पशुपालन की आर्थिक स्थिति प्रभावित नहीं हो इस संभावित चुनौती से निपटने के लिए साइलेज निर्माण एवं भंडारण एक प्रभावी वैज्ञानिक तकनीक है।

संयुक्त संचालक पशुपालन एवं डेयरी इंदौर संभाग डॉ. मनीष इंगोले ने पशुपालकों से अपील की है कि वे हरे चारे की उपलब्धता के समय पर्याप्त मात्रा में साइलेज तैयार कर सुरक्षित भंडारण करें। उन्होंने बताया कि साइलेज हरे चारे को वायु रहित अवस्था में किण्वन प्रक्रिया द्वारा संरक्षित करने की विधि है। यह पशुओं के लिए वर्षभर पौष्टिक एवं गुणवत्तापूर्ण चारे की उपलब्धता सुनिश्चित करने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है। विशेष रूप से सूखे एवं चारे की कमी की परिस्थितियों में साइलेज पशुपालकों के लिए उपयोगी सिद्ध होता है।

साइलेज निर्माण के लिए उपयुक्त फसलें एवं वैज्ञानिक विधि –  अच्छी गुणवत्ता का साइलेज बनाने के लिए मक्का, ज्वार, बाजरा, जई एवं अन्य उपयुक्त चारा फसलों का चयन किया जा सकता है। फसल को उचित अवस्था में काटकर छोटे-छोटे टुकड़ों में तैयार किया जाता है। इसके बाद साइलेज बंकर, गड्ढे अथवा विशेष प्लास्टिक बैग में परत-दर-परत भरकर अच्छी तरह दबाया जाता है, जिससे अंदर की हवा पूरी तरह निकल जाए। आवश्यकतानुसार गुड़, नमक एवं उपयुक्त जैविक कल्चर मिलाकर इसे पॉलीथिन से वायुरहित तरीके से बंद कर दिया जाता है। इस प्रक्रिया में चारे में उपस्थित लाभकारी जीवाणुओं द्वारा किण्वन होता है तथा चारा सुरक्षित रहता है। साइलेज को उपयोग से पहले कम से कम 45 दिनों तक वायुरहित अवस्था में भंडारित करना आवश्यक है। उचित निर्माण एवं भंडारण की स्थिति में साइलेज लगभग दो वर्ष तक सुरक्षित रखा जा सकता है।

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साइलेज निर्माण के लिए आवश्यक संसाधन एवं भंडारण व्यवस्था – साइलेज निर्माण के लिए साइलेज बंकर, एचडीपीई साइलेज बैग, प्लास्टिक शीट, ट्रैक्टर, ट्रॉली, चारा कटाई मशीन, पावर कुट्टी मशीन एवं आवश्यकतानुसार चारा हार्वेस्टर जैसे उपकरणों की आवश्यकता होती है। बड़े स्तर पर साइलेज निर्माण के लिए उपयुक्त क्षमता की कटाई एवं पैकिंग मशीनों का उपयोग किया जा सकता है। साइलेज के भंडारण के लिए कंक्रीट के स्थायी बंकर, प्लास्टिक बैग एवं पॉलीथिन कवर युक्त बेलर व्यवस्था उपयोगी है। छोटे पशुपालक 50 से 1000 किलोग्राम तक क्षमता वाले साइलेज बैग का उपयोग कर सकते हैं, जबकि बड़े स्तर पर 3 से 500 मीट्रिक टन क्षमता वाले साइलेज बंकर स्थापित किए जा सकते हैं।

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साइलेज निर्माण से स्वरोजगार एवं उद्यमिता के अवसर – डॉ. इंगोले ने बताया कि साइलेज निर्माण केवल पशुओं के लिए चारा संरक्षण की तकनीक ही नहीं, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार एवं उद्यमिता का एक बेहतर अवसर भी है। कृषक, युवा, किसान उत्पादक संगठन (FPO), सहकारी संस्थाएं एवं स्वयं सहायता समूह साइलेज निर्माण इकाइयां स्थापित कर स्थानीय पशुपालकों को गुणवत्तापूर्ण साइलेज उपलब्ध करा सकते हैं। इससे चारे की स्थानीय उपलब्धता बढ़ने के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार एवं आय के नए अवसर भी विकसित होंगे।

राष्ट्रीय पशुधन मिशन (NLM) एवं MSME के अंतर्गत वित्तीय सहायता –  संयुक्त संचालक डॉ. इंगोले ने बताया कि साइलेज निर्माण इकाई स्थापित करने के लिए केंद्र सरकार की राष्ट्रीय पशुधन मिशन (NLM) योजना के अंतर्गत उद्यमिता विकास कार्यक्रम में वित्तीय सहायता का प्रावधान है। योजना के तहत पात्र साइलेज प्लांट परियोजनाओं की लागत का 50 प्रतिशत अनुदान, अधिकतम 50 लाख रुपये तक उपलब्ध कराने का प्रावधान है। शेष राशि बैंक ऋण अथवा स्वयं के निवेश से लगाई जा सकती है। व्यक्तिगत उद्यमी, FPO, सहकारी संस्थाएं, स्वयं सहायता समूह (SHG) एवं अन्य पात्र संस्थाएं योजना के अंतर्गत आवेदन कर सकती हैं। अनुदान SIDBI के माध्यम से संबंधित बैंक अथवा वित्तीय संस्था के जरिए प्रदान किया जाता हैइसके अतिरिक्त मध्यप्रदेश MSME विकास नीति 2021 (सितंबर 2023 में संशोधित) के अंतर्गत पात्र सूक्ष्म एवं लघु उद्योगों को निवेश प्रोत्साहन सहित विभिन्न वित्तीय सुविधाओं का लाभ भी प्राप्त हो सकता है। उन्होंने पशुपालकों, कृषकों एवं युवाओं से आग्रह किया कि वे साइलेज निर्माण को अपनाकर पशुओं के लिए वर्षभर पौष्टिक चारे की उपलब्धता सुनिश्चित करें तथा इसे एक लाभकारी उद्यम के रूप में भी विकसित करें। इससे पशुपालन की उत्पादकता बढ़ाने, दुग्ध उत्पादन को बनाए रखने तथा विपरीत मौसमी परिस्थितियों में होने वाले आर्थिक नुकसान को कम करने में सहायता मिलेगी।

साइलेज निर्माण की तकनीक, इकाई स्थापना, राष्ट्रीय पशुधन मिशन एवं MSME योजनाओं की विस्तृत जानकारी के लिए नजदीकी पशु चिकित्सालय अथवा जिला पशुपालन एवं डेयरी विभाग कार्यालय से संपर्क किया जा सकता है।

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