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राज्य कृषि समाचार (State News)

किसानों की लागत घटाने और उपज का बेहतर दाम दिलाने में मददगार बनेगा किसान उत्पादक संगठन

10 किसानों से शुरू हो सकता है संचालक मंडल

 मैदानी क्षेत्रों में 300 और पहाड़ी क्षेत्रों में 100 किसानों की सदस्यता जरूरी

06 नवंबर 2026, भोपाल: किसानों की लागत घटाने और उपज का बेहतर दाम दिलाने में मददगार बनेगा किसान उत्पादक संगठन – खेती की बढ़ती लागत और फसलों का उचित मूल्य नहीं मिलना छोटे एवं सीमांत किसानों के सामने बड़ी चुनौती है। खाद, बीज और कृषि उपकरणों की महंगी कीमतों के कारण खेती पर खर्च लगातार बढ़ रहा है। वहीं, उपज बेचने के लिए किसानों को कई बार बिचौलियों पर निर्भर रहना पड़ता है। ऐसी परिस्थितियों में किसान उत्पादक संगठन किसानों के लिए उपयोगी माध्यम बन सकता है। इसके जरिए किसान सामूहिक रूप से खाद-बीज की खरीद कर सकते हैं और अपनी उपज को सीधे बड़ी मंडियों तथा खरीदारों तक पहुंचा सकते हैं।

क्या होता है किसान उत्पादक संगठन

किसान उत्पादक संगठन किसानों का ऐसा सामूहिक समूह होता है, जो कंपनी या सहकारी संस्था की तरह काम करता है। इसमें किसान मिलकर अपनी आर्थिक गतिविधियों का संचालन करते हैं। इसका प्रमुख उद्देश्य किसानों की सामूहिक शक्ति बढ़ाना और उन्हें कृषि कारोबार में बेहतर अवसर उपलब्ध कराना है।

अकेले किसान जब खाद, बीज और अन्य कृषि सामग्री खरीदते हैं तो उन्हें खुदरा कीमत चुकानी पड़ती है। इसके विपरीत संगठन के माध्यम से बड़ी मात्रा में एक साथ खरीद करने पर कम कीमत का लाभ मिल सकता है। इसी तरह किसान अपनी उपज को सामूहिक रूप से बेचकर बेहतर बाजार और उचित मूल्य प्राप्त करने का प्रयास कर सकते हैं।

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कैसे शुरू करें किसान उत्पादक संगठन

किसान उत्पादक संगठन बनाने के लिए सबसे पहले किसानों का समूह तैयार करना होता है। मैदानी क्षेत्रों में कम से कम 300 किसान सदस्यों का समूह जरूरी है, जबकि पहाड़ी और पूर्वोत्तर राज्यों में न्यूनतम 100 किसानों की सदस्यता का प्रावधान है। इसके संचालन के लिए कम से कम 10 संचालक मंडल सदस्यों की आवश्यकता बताई गई है।

समूह तैयार होने के बाद इसे कंपनी अधिनियम के अंतर्गत उत्पादक कंपनी के रूप में पंजीकृत कराया जा सकता है। इसके लिए संचालकों के पहचान संबंधी दस्तावेज, स्थायी खाता संख्या और इलेक्ट्रॉनिक हस्ताक्षर प्रमाणपत्र सहित आवश्यक कागजात तैयार करने होते हैं।

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पहले तय करें संगठन का काम

संगठन शुरू करने से पहले यह तय करना जरूरी है कि किसान मिलकर किस तरह का कारोबार करेंगे। इसके अंतर्गत अनाज की खरीद-बिक्री, खाद-बीज का वितरण, डेयरी, मुर्गीपालन, जैविक खेती और खाद्य प्रसंस्करण जैसे काम किए जा सकते हैं। किसान मिलकर आटा, अचार, मुरब्बा और अन्य कृषि आधारित उत्पाद तैयार कर उनका विपणन भी कर सकते हैं।

इसके लिए एक व्यावसायिक कार्ययोजना तैयार करना जरूरी है, जिसमें संगठन की गतिविधियों, संभावित बाजार, लागत और आमदनी का आकलन किया जाए।

कहां करें पंजीयन और मार्गदर्शन प्राप्त

किसान उत्पादक संगठन का कंपनी के रूप में पंजीयन करने के लिए कॉर्पोरेट कार्य मंत्रालय की आधिकारिक वेबसाइट www.mca.gov.in पर ऑनलाइन आवेदन किया जा सकता है। इसके लिए चार्टर्ड अकाउंटेंट अथवा कंपनी सचिव की सहायता भी ली जा सकती है।

इसके अलावा लघु कृषक कृषि व्यवसाय संघ और राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक जैसी संस्थाएं किसान उत्पादक संगठनों को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। किसान अपने जिले के कृषि विभाग, जिला कृषि अधिकारी और नजदीकी कृषि विज्ञान केंद्र से भी मार्गदर्शन प्राप्त कर सकते हैं।

सामूहिक प्रयास से बढ़ेगी किसानों की ताकत

किसान उत्पादक संगठन का सबसे बड़ा लाभ यह है कि छोटे किसान भी सामूहिक रूप से बड़े कृषि कारोबार का हिस्सा बन सकते हैं। इससे कृषि सामग्री की खरीद, उपज का भंडारण, प्रसंस्करण और विपणन जैसे कार्य आसान हो सकते हैं। हालांकि संगठन की सफलता के लिए पारदर्शी प्रबंधन, नियमित कामकाज और बाजार की सही जानकारी जरूरी है। सामूहिक प्रयासों से किसान अपनी लागत कम करने के साथ उपज का बेहतर मूल्य प्राप्त करने की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं।

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