Ad DesktopAd TabletAd Mobile
राज्य कृषि समाचार (State News)

फूलगोभी की वैज्ञानिक खेती से गौरेला के किसान प्रमोद सिंह को दो एकड़ में डेढ़ लाख का मुनाफा

07 अक्टूबर 2026, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही: फूलगोभी की वैज्ञानिक खेती से गौरेला के किसान प्रमोद सिंह को दो एकड़ में डेढ़ लाख का मुनाफा – छत्तीसगढ़ के गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के देवरगांव के किसान प्रमोद सिंह ने परंपरागत खेती के साथ आधुनिक तकनीक अपनाकर फूलगोभी की खेती से दो एकड़ जमीन में 1.50 लाख रुपये का शुद्ध लाभ कमाया है। प्रमोद सिंह विकासखंड गौरेला के अंतर्गत आने वाले इस गांव में पहले परंपरागत तरीके से ही सब्जियां उगाते थे।

उद्यानिकी विभाग के अधिकारियों और मैदानी कर्मचारियों से संपर्क के बाद उन्होंने फसल प्रबंधन के वैज्ञानिक तरीके अपनाने शुरू किए। समय पर आवश्यक कृषि कार्य करना, बेहतर प्रबंधन और उन्नत तकनीकों का इस्तेमाल उनकी सफलता की मुख्य वजह बनी।

पहले प्रमोद सिंह अपने खेत में धान और परंपरागत सब्जियां ही उगाते थे, जिनसे होने वाली आमदनी सीमित रहती थी। बीज, खाद और सिंचाई के खर्च के बाद ज्यादा मुनाफा नहीं बच पाता था, जिससे परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने में मुश्किल होती थी। उद्यानिकी विभाग के संपर्क में आने के बाद उन्होंने अपनी खेती का तरीका पूरी तरह बदलने का फैसला किया।

Ad DesktopAd TabletAd Mobile
Ad DesktopAd TabletAd Mobile

उद्यानिकी विभाग की तकनीकी मदद से बदली तस्वीर

विभाग के अधिकारियों ने प्रमोद सिंह को समय-समय पर उन्नत कृषि तकनीकों, फसल प्रबंधन और विभागीय योजनाओं की जानकारी दी। इसके बाद उन्होंने अपने खेत में बेहतर किस्म की फूलगोभी लगाई और खाद-पानी के प्रबंधन पर खास ध्यान दिया। पौध रोपाई की सही दूरी, समय पर निराई-गुड़ाई और संतुलित खाद के इस्तेमाल पर भी उन्होंने विभाग की सलाह का पूरा पालन किया।

कृषक जगत को व्हाट्सएप पर फॉलो करें
खेती-किसानी की ताज़ा खबरें, सीधे आपके फ़ोन पर
चैनल फॉलो करें

गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिला पहाड़ी और ठंडी जलवायु वाला इलाका है, जहां फूलगोभी जैसी सब्जियों की खेती के लिए मिट्टी और मौसम दोनों अनुकूल माने जाते हैं। इसी वजह से जिले में पिछले कुछ वर्षों में सब्जी की खेती की ओर किसानों का रुझान बढ़ा है।

जिले में छोटी जोत वाले किसानों की संख्या अधिक है, इसलिए कम जमीन में भी ज्यादा मुनाफा देने वाली फसलों को प्राथमिकता दी जा रही है। उद्यानिकी विभाग किसानों को समय-समय पर बीज, पौध और जरूरी उपकरणों की जानकारी भी उपलब्ध कराता है, ताकि वे अपने स्तर पर उन्नत खेती शुरू कर सकें।

प्रमोद सिंह की यह सफलता आसपास के गांवों के किसानों के लिए भी मिसाल बन रही है। उद्यानिकी विभाग के अधिकारियों का कहना है कि जिले के अन्य किसानों को भी इसी तरह की वैज्ञानिक तकनीक अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है, ताकि कम जमीन में भी बेहतर आमदनी हासिल की जा सके। आने वाले समय में विभाग की योजना है कि फूलगोभी के साथ-साथ अन्य सब्जियों की खेती को भी इसी मॉडल से बढ़ावा दिया जाए।

फूलगोभी एक नकदी फसल है जिसकी बाजार में मांग त्योहारी और सर्दी के मौसम में खासतौर पर बढ़ जाती है। कम समय में तैयार होने और बार-बार खेत खाली कर अगली फसल लगाने की सुविधा की वजह से पहाड़ी इलाकों के किसान अब धान की जगह इस तरह की सब्जियों को प्राथमिकता देने लगे हैं। उद्यानिकी विभाग का कहना है कि इससे न सिर्फ किसानों की आय बढ़ेगी, बल्कि स्थानीय बाजार में भी सब्जियों की उपलब्धता बेहतर होगी।

प्रमोद सिंह की कहानी यह भी दिखाती है कि फसल चुनते समय इलाके की मिट्टी, मौसम और नजदीकी बाजार की मांग का ध्यान रखना कितना जरूरी है। उद्यानिकी विभाग के अधिकारियों का कहना है कि वे गांव-गांव जाकर किसानों से सीधे संवाद कर रहे हैं, ताकि हर किसान अपनी जमीन और संसाधनों के हिसाब से सही फसल का चुनाव कर सके। विभाग की कोशिश है कि अगले सीजन तक जिले के और किसान भी फूलगोभी जैसी उन्नत सब्जी खेती को अपनाएं।

आपने उपरोक्त समाचार कृषक जगत वेबसाइट पर पढ़ा: हमसे जुड़ें
> नवीनतम कृषि समाचार और अपडेट के लिए आप अपने मनपसंद प्लेटफॉर्म पे कृषक जगत से जुड़े – गूगल न्यूज़, व्हाट्सएप्प
> कृषक जगत अखबार की सदस्यता लेने के लिए यहां क्लिक करें – घर बैठे विस्तृत कृषि पद्धतियों और नई तकनीक के बारे में पढ़ें
> कृषक जगत ई-पेपर पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें: E-Paper
> कृषक जगत की अंग्रेजी वेबसाइट पर जाने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें: Global Agriculture