बीज स्वावलंबन में बीज संघ की भूमिका

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  • ए. के. सिंह, प्रबंध संचालक ,बीज संघ, भोपाल
  • डॉ. श्रीमती स्मृति व्यास, क्षेत्रीय प्रबंधक, बीज संघ, इन्दौर

4 जून 2022, बीज स्वावलंबन में बीज संघ की भूमिका – वर्तमान में हमारा देश आजादी की 75वीं वर्षगांठ का अमृत महोत्सव मना रहा है, जिसके अंतर्गत आत्मनिर्भर भारत की परिकल्पना को साकार करने हेतु विशेष प्रयास किए जा रहे हैं। कृषि क्षेत्र में कृषकों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए कृषि का महत्वपूर्ण आदान बीज स्वावलंबन इस दिशा में महत्वपूर्ण कड़ी है। अपने क्षेत्र विशेष के कृषकों को उन्नत किस्मों के प्रमाणित व आधार बीज सहजता से उपलब्ध कराने के लिए मध्यप्रदेश शासन के मार्गदर्शन में मध्य प्रदेश राज्य सहकारी बीज उत्पादक एवं विपणन संघ मर्यादित (बीज संघ) का गठन वर्ष 2004 में किया गया है, ताकि सभी फसलों की उन्नत किस्मों के बीजों का प्रसार कर बीज प्रतिस्थापन दर में वृद्धि हो सके।

प्राथमिक बीज उत्पादक सहकारी समिति का गठन

बीज उत्पादन कार्यक्रम लेने वाले इच्छुक उस कार्यक्षेत्र में निवासरत 21 विभिन्न परिवारों के कृषक, बीज उत्पादक सहकारी समिति गठन के लिए अपने जिले के उपायुक्त सहकारिता कार्यालय में संपर्क कर मध्य प्रदेश सहकारी समितियां अधिनियम 1960 के अंतर्गत प्राथमिक बीज उत्पादक सहकारी समिति का गठन कर पंजीयन करा सकते हैं। प्राथमिक बीज उत्पादक सहकारी समितियों को बीज संघ की सदस्यता प्राप्त किए जाने के संबंध में जानकारी बीज संघ की वेबसाइट  www.beejsanghmp.org   पर निम्नानुसार उपलब्ध है –

  • सदस्यता आवेदन निर्धारित प्रपत्र में।
  • संस्था का उप/सहायक आयुक्त सहकारिता द्वारा जारी पंजीयन प्रमाण पत्र की सत्यापित प्रति।
  • संस्था के संचालक मंडल की बैठक में बीज संघ की सदस्यता हेतु लिए गये प्रस्ताव/ठहराव में निर्णय की सत्यापित प्रति।
  • सदस्यता शुल्क रूपये 125, अंशपूंजी रूपये 3000, कुल राशि रूपये 3125 (तीन हजार एक सौ पच्चीस ) का बैंक ड्राफ्ट (डी डी) म. प्र. राज्य सहकारी बीज उत्पादक एवं विपणन संघ मर्या. भोपाल के पक्ष में देय।
  • संस्था के पंजीकृत उपनियम (बॉयलाज) की सत्यापित प्रति।
  • संस्था के कम से कम 50 सदस्यों की सूची, उनके द्वारा धारित कृषि भूमि के रकबे की जानकारी सहित।
  • उप संचालक कृषि द्वारा जारी संस्था के बीज विक्रय लायसेंस की सत्यापित प्रति
  • म. प्र. राज्य बीज प्रमाणीकरण संस्था द्वारा बीज उत्पादन कार्यक्रम लिए जाने हेतु जारी उत्पादक संस्था पंजीयन प्रमाण पत्र की सत्यापित प्रति।
  • संस्था के गोदाम का नक्शा, स्थान के विवरण सहित।
  • उप/सहायक आयुक्त सहकारिता सह जिला प्रबंधक बीज संघ की अनुशंसा सहित अग्रेषण पत्र।

बीज संघ की सदस्यता का आवेदन उपरोक्त दस्तावेजों के साथ उप/सहायक आयुक्त सहकारिता सह जिला प्रबंधक बीज संघ के माध्यम से, बीज संघ मुख्यालय मध्यप्रदेश राज्य सहकारी बीज उत्पादक एवं विपणन संघ मर्यादित भोपाल को प्रेषित किया जा सकता है। वर्ष 2021-22 में बीज संघ की 799 सदस्य समितियों में से 403 सदस्य समितियों द्वारा खरीफ एवं रबी में बीज उत्पादन कार्यक्रम लिया गया है। बीज संघ की सदस्यता में उत्तरोत्तर वृद्धि हो रही है।

आधार बीज उत्पादन कार्यक्रम

बीज उत्पादक सहकारी समितियों द्वारा खरीफ एवं रबी मौसम में विभिन्न फसलों के उच्च गुणवत्तायुक्त आधार बीज उत्पादन कार्यक्रम लिए जाने हेतु, बीज संघ भोपाल को प्रजनक बीजों की विभिन्न किस्मों की मॉंग प्रस्तुत की जाती है। भारत सरकार कृषि विभाग द्वारा प्रदेश को प्राप्त प्रजनक बीजों के आवंटन उपरांत,संचालक कृषि मध्य प्रदेश द्वारा बीज संघ को आवंटन जारी किया जाता है। उक्त प्राप्त आवंटन के परिप्रेक्ष्य में, बीज संघ द्वारा देश एवं प्रदेश के कृषि अनुसंधान केन्द्रों से उठाव और,परिवहन कराकर, प्रजनक बीजों की मांग करने वाली बीज समितियों को उनके मुख्यालय पर उपलब्ध कराया जाता है। शासन द्वारा भी विभिन्न योजना अंतर्गत प्रजनक बीज खरीदी, आधार बीज/प्रमाणित बीज उत्पादन कार्यक्रम, आधार बीज/ प्रमाणित बीज वितरण हेतु अनुदान का प्रावधान है, जो समिति बीज संघ की सदस्य है, वे इसका लाभ प्राप्त कर सकती हैं।

बीज की पूर्ति करने में बीज संघ की भूमिका

वर्तमान खरीफ 2022 में सीजन में बीज संघ की वेबसाईट  www.beejsanghmp.org   के पार्टल पर उप/सहायक आयुक्त सहकारिता सह जिला प्रबंधक बीज संघ के माध्यम से विभिन्न जिलों की सदस्य प्राथमिक बीज उत्पादक सहकारी समितियों द्वारा सोयाबीन, अरहर, मूंग, उड़द, मूंगफली, धान, तिल, रामतिल, कोदो, कुटकी प्रजनक बीजों की आनलाईन मांग प्रस्तुत की गई है। संचालक कृषि से प्राप्त आवंटन उपरांत बीज अनुसंधान प्रदाय केन्द्रों से प्रजनक बीजों का उठाव करते हुए समितियों को उपलब्ध कराया जा रहा है। शासन के निर्देशानुसार समितियों को पूरे प्रदेश में प्रमाणित बीज की पूर्ति करने में बीज संघ के माध्यम से बीज उत्पादक सहकारी समितियों की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। यदि इनके द्वारा उपलब्ध कराए गए बीज का वित्तीय प्रबंधन (भुगतान) उचित समय पर किया जाए तो इन्हें कार्य करने में सुविधा रहेगी तथा प्रदेश में बीज प्रतिस्थापन दर में निश्चित वृद्धि होगी एवं उत्पादन बढ़ेगा।

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