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राज्य कृषि समाचार (State News)

गुजरात के किसानों को राहत: खरीफ फसलों की सिंचाई के लिए सीएम भूपेंद्र पटेल ने दी पानी छोड़ने की मंजूरी, 80 हजार हेक्टेयर को मिलेगा लाभ

11 अक्टूबर 2026, भोपाल: गुजरात के किसानों को राहत: खरीफ फसलों की सिंचाई के लिए सीएम भूपेंद्र पटेल ने दी पानी छोड़ने की मंजूरी, 80 हजार हेक्टेयर को मिलेगा लाभ – गुजरात में बारिश की कमी के बीच खरीफ फसलों की सिंचाई के लिए सरकार ने कडाना बांध से पानी छोड़ने का फैसला किया है। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने 10 अक्टूबर से 5,500 क्यूसेक पानी छोड़ने की मंजूरी दी है। गुजरात सरकार के सूचना निदेशालय, गांधीनगर की ओर से जारी बयान के अनुसार, माही कमांड क्षेत्र में करीब 80 हजार हेक्टेयर में खड़ी खरीफ फसलों की सिंचाई के लिए 198 मिलियन क्यूबिक मीटर (MCM) पानी छोड़ा जाएगा। इस क्षेत्र में खेड़ा और आणंद जिले शामिल हैं।

गुजरात में औसत से कम हुई बारिश

गुजरात में 1 जून से 10 अक्टूबर के बीच 810 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है। यह इस अवधि की औसत बारिश का 89 प्रतिशत है। पिछले साल इसी अवधि में 975 मिलीमीटर बारिश हुई थी, जो औसत का करीब 110 प्रतिशत थी। अक्टूबर के शुरुआती दिनों में बारिश की कमी और बढ़ गई है। 1 से 10 अक्टूबर के बीच राज्य में केवल 0.3 मिलीमीटर बारिश हुई, जबकि इस अवधि में औसतन 11 मिलीमीटर बारिश होती है। इस तरह बारिश में करीब 97 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई। बारिश की कमी को देखते हुए सरकार ने माही कमांड क्षेत्र में खड़ी खरीफ फसलों को सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराने का फैसला लिया है। खरीफ सीजन के अंतिम चरण में यह पानी फसलों की सिंचाई में मदद करेगा।

खेड़ा और आणंद में 3.8 लाख हेक्टेयर में खरीफ बुवाई

खेड़ा और आणंद जिलों में इस खरीफ सीजन में कुल 3.8 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में बुवाई हुई है। इसमें धान, सब्जियों और तंबाकू की खेती का बड़ा हिस्सा शामिल है। दोनों जिलों में करीब 2.37 लाख हेक्टेयर में धान की खेती हुई है। यह गुजरात के कुल धान की खेती वाले क्षेत्र का लगभग एक चौथाई है। इसके अलावा, 34,900 हेक्टेयर में सब्जियों और 29,000 हेक्टेयर में तंबाकू की बुवाई की गई है। राज्य के कुल तंबाकू खेती क्षेत्र का करीब 77 प्रतिशत हिस्सा इन दोनों जिलों में है।

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गुजरात में खरीफ फसलों की बुवाई में गिरावट

इस साल गुजरात में खरीफ फसलों की कुल बुवाई 83.42 लाख हेक्टेयर में हुई है, जबकि पिछले तीन वर्षों का औसत बुवाई क्षेत्र 85.53 लाख हेक्टेयर रहा है। इस तरह इस साल बुवाई का कुल क्षेत्र औसत से कम है। कुछ तिलहन और दलहन फसलों की बुवाई में ज्यादा गिरावट दर्ज की गई है। तिल की बुवाई पिछले तीन वर्षों के औसत 49,550 हेक्टेयर के मुकाबले घटकर 20,348 हेक्टेयर रह गई है। इसमें करीब 59 प्रतिशत की कमी आई है। वहीं, मूंग की बुवाई 56,236 हेक्टेयर के औसत से घटकर 32,857 हेक्टेयर रह गई है, जो करीब 32 प्रतिशत की गिरावट है। ग्वार की बुवाई का क्षेत्र भी 40 प्रतिशत घटा है।

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पहले भी सिंचाई के लिए अतिरिक्त पानी देने का फैसला

इससे पहले 5 सितंबर को मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल की अध्यक्षता में गांधीनगर में हुई उच्चस्तरीय बैठक में किसानों को सिंचाई के लिए अतिरिक्त पानी उपलब्ध कराने के उपायों पर निर्णय लिया गया था। यह फैसला बारिश और जलाशयों में पानी की आवक को लेकर बनी चिंताओं के बीच लिया गया था। उस समय सरकार ने नर्मदा परियोजना से माही कमांड क्षेत्र में 20 दिनों के लिए 5,000 क्यूसेक पानी देने की मंजूरी दी थी। इसके अलावा, साउनी योजना की लिंक-1 के जरिए देवभूमि द्वारका और जामनगर में पानी की आपूर्ति 10 दिन बढ़ाई गई थी। उत्तर गुजरात में सुजलाम-सुफलाम पाइपलाइन योजना के माध्यम से 2,000 क्यूसेक पानी की आपूर्ति भी 15 दिन बढ़ाई गई थी।

अल नीनो के संभावित असर पर भी नजर

5 सितंबर की बैठक में अल नीनो की मौजूदा परिस्थितियों के कारण बारिश और पानी की उपलब्धता पर पड़ने वाले संभावित असर की भी समीक्षा की गई थी। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए थे कि यदि बारिश पर्याप्त नहीं होती है और जलाशयों में पानी की आवक नहीं बढ़ती है, तो पेयजल की जरूरतों को प्राथमिकता दी जाए। साथ ही शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में पानी की आपूर्ति निर्बाध बनाए रखने के निर्देश दिए गए थे। 

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