राज्य कृषि समाचार (State News)

राजस्थान में 87.44 लाख किसानों की रजिस्ट्री पूरी, अब सरकारी योजनाओं में किसान ID होगी अनिवार्य  

18 अगस्त 2026, जयपुर: राजस्थान में 87.44 लाख किसानों की रजिस्ट्री पूरी, अब सरकारी योजनाओं में किसान ID होगी अनिवार्य – राजस्थान में कृषि क्षेत्र को डिजिटल रूप से मजबूत करने की दिशा में राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। प्रदेश में अब तक 87.44 लाख किसानों की किसान रजिस्ट्री पूरी हो चुकी है, जो भारत सरकार के निर्धारित लक्ष्य का 96.95 प्रतिशत है। इनमें 49.46 लाख पीएम-किसान लाभार्थी भी किसान रजिस्ट्री से जुड़ चुके हैं।

सरकार अब किसान रजिस्ट्री को कृषि विभाग की किसान-केंद्रित योजनाओं से जोड़ रही है। इसके तहत किसान ID को प्राथमिक पहचानकर्ता के रूप में अपनाया जा चुका है और सभी किसान हितैषी योजनाओं में इसके अनिवार्य उपयोग की व्यवस्था की जा रही है।

सरकारी योजनाओं में किसान ID का होगा इस्तेमाल

मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास की अध्यक्षता में हुई कृषि स्टैक राज्य स्तरीय स्टीयरिंग समिति की बैठक में किसान रजिस्ट्री, डिजिटल क्रॉप सर्वे, उर्वरक वितरण और किसान कल्याण योजनाओं के डिजिटलीकरण की समीक्षा की गई। बैठक में संबंधित विभागों को निर्देश दिए गए कि किसान हित से जुड़ी योजनाओं में किसान ID के अनिवार्य उपयोग को सुनिश्चित किया जाए।

इसके अलावा मुख्यमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की 26वीं किस्त से किसान ID को अनिवार्य किए जाने की दिशा में भी कार्रवाई की जाएगी। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना को सहकारिता विभाग से कृषि विभाग में स्थानांतरित करने के संबंध में भी प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है।

भूमि रिकॉर्ड से भी जुड़ेगी किसान ID

सरकार किसान रजिस्ट्री और RoR यानी Record of Rights के बीच डेटा सिंक्रनाइजेशन करने जा रही है। यह कार्य 31 अगस्त 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य है। इसके बाद दोनों प्रणालियों के बीच लगातार डेटा आदान-प्रदान की व्यवस्था विकसित की जाएगी। वहीं, नामांतरण की प्रक्रिया में आवेदक का आधार नंबर और किसान ID दर्ज करना अनिवार्य करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके लिए 15 सितंबर 2026 की समय-सीमा तय की गई है।

खाद और MSP खरीद से भी जुड़ेगी किसान रजिस्ट्री

राजस्थान में किसान रजिस्ट्री को उर्वरक वितरण और न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी MSP खरीद व्यवस्था से भी जोड़ा जाएगा। राजसमंद और सिरोही में फर्टिलाइजर डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम के सफल पायलट के बाद इसे अगस्त 2026 में पूरे प्रदेश में लागू करने का निर्णय लिया गया है। किसान रजिस्ट्री को खाद्य विभाग और राजफेड की MSP खरीद प्रणाली से भी प्राथमिकता के आधार पर एकीकृत किया जाएगा। शुरुआत में दो जिलों में इसका पायलट किया जाएगा। इससे पात्र किसानों की पहचान और खरीद प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और आसान बनाने में मदद मिलेगी।

किरायेदार किसानों को भी जोड़ा जाएगा

सरकार किरायेदार और वास्तविक खेती करने वाले किसानों को भी किसान रजिस्ट्री में शामिल करने की तैयारी कर रही है। इसके लिए एसओपी को अंतिम रूप देने और फील्ड स्तर पर कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। राज्य में शेष 600 ऑफलाइन गांवों को 15 सितंबर 2026 तक ऑनलाइन करने का लक्ष्य भी रखा गया है। वहीं कम प्रदर्शन वाले जिलों में नवंबर से राज्यव्यापी सैचुरेशन अभियान चलाया जाएगा।

डिजिटल क्रॉप सर्वे को भी मिलेगा बढ़ावा

रबी 2025-26 के डिजिटल क्रॉप सर्वे में लक्षित 2.36 करोड़ से अधिक खसरों में से 80.21 प्रतिशत का सर्वे पूरा हो चुका है। इसके लिए निजी सर्वेक्षकों और सरकारी पटवारियों की तैनाती की गई थी। खरीफ 2026-27 में सभी 424 ऑनलाइन तहसीलों में डिजिटल सर्वे किया जाएगा। कम से कम 25 प्रतिशत सर्वे किसान सेल्फ-गिर्दावरी के माध्यम से कराने का लक्ष्य रखा गया है। सैटेलाइट डेटा और AI आधारित फोटो वैलिडेशन का इस्तेमाल भी सर्वे की गुणवत्ता और पारदर्शिता बढ़ाने के लिए किया जा रहा है।

किसानों को डिजिटल सेवाओं की दी जाएगी जानकारी

किसान ID और किसान रजिस्ट्री को लेकर किसानों में जागरूकता बढ़ाने के लिए सोशल मीडिया के जरिए विशेष अभियान चलाया जाएगा। इसका उद्देश्य किसानों को डिजिटल कृषि सेवाओं, किसान ID बनाने और रजिस्ट्री से जुड़ी प्रक्रिया की जानकारी सरल भाषा में उपलब्ध कराना है। सरकार का लक्ष्य कृषि स्टैक को केवल डिजिटल रिकॉर्ड तक सीमित रखने के बजाय किसानों तक सरकारी योजनाओं और सेवाओं की पहुंच को सरल, पारदर्शी और लक्षित बनाना है।

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