राजगढ़: वाटरशेड परियोजना से बदली खेती, 1 बीघा में 70 कटहल लगाए; ₹1.25 लाख तक अतिरिक्त आय की उम्मीद
18 सितंबर 2026, राजगढ़: राजगढ़: वाटरशेड परियोजना से बदली खेती, 1 बीघा में 70 कटहल लगाए; ₹1.25 लाख तक अतिरिक्त आय की उम्मीद – प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना 2.0 के तहत वाटरशेड विकास परियोजना ने राजगढ़ जिले के खिलचीपुर विकासखंड के ग्राम गोपालपुरा निवासी किसान जानकी लाल की खेती को नई दिशा दी है। परियोजना से पहले क्षेत्र में खेती मुख्य रूप से वर्षा आधारित थी। पानी के बहाव के कारण खेतों में नमी और सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध नहीं हो पाता था। किसान पारंपरिक फसलों पर निर्भर थे, जिससे कम आय, अधिक लागत और मौसम आधारित जोखिम का सामना करना पड़ता था।
1 बीघा में लगाए 70 कटहल के पौधे
वाटरशेड परियोजना के तहत जानकी लाल ने वर्ष 2024 में अपनी एक बीघा निजी भूमि पर 70 उच्च गुणवत्ता वाले कटहल के पौधे लगाए। जल एवं मृदा संरक्षण के उपायों से पौधों को अनुकूल वातावरण मिला। वर्तमान में सभी पौधे करीब 6 फीट की ऊंचाई तक पहुंच चुके हैं। कटहल के पौधों को अपनाकर जानकी लाल ने पारंपरिक खेती के साथ फसल विविधीकरण की दिशा में कदम बढ़ाया है। पौधों के बीच उपलब्ध जगह में अन्य फसलों की खेती कर वे अतिरिक्त आय प्राप्त कर रहे हैं।
फल उत्पादन से ₹1.25 लाख तक अतिरिक्त आय की उम्मीद
आगामी वर्षों में कटहल के पौधों से फल उत्पादन शुरू होने पर करीब ₹90 हजार से ₹1.25 लाख तक की अतिरिक्त आय प्राप्त होने की संभावना है। इससे किसान की पारंपरिक खेती के साथ आय का एक और स्रोत विकसित होने की उम्मीद है।
दूसरे किसानों के लिए बने प्रेरणा
जानकी लाल के खेत में विकसित कटहल के पौधे अब गांव के अन्य किसानों के लिए भी प्रेरणा का माध्यम बन रहे हैं। वाटरशेड परियोजना के माध्यम से जल एवं मृदा संरक्षण के साथ किसानों को बागवानी और फसल विविधीकरण से जोड़कर उनकी आय के अतिरिक्त स्रोत विकसित करने का प्रयास किया जा रहा है। ग्राम गोपालपुरा की यह पहल सरकारी योजना के प्रभावी क्रियान्वयन से खेती में आए बदलाव को दर्शाती है।
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